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India-Mongolia Relations: बुद्ध ने जोड़ा, चीन तोड़ ना सका… भारत-मंगोलिया का अनोखा रिश्ता

Last Updated:October 15, 2025, 13:39 IST

India-Mongolia Relations: मंगोलिया के राष्ट्रपति खुरेलसुख उखना इन दिनों भारत यात्रा पर हैं. भारत और मंगोलिया बौद्ध धर्म, हिमालयन हेरिटेज और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़े हैं. दोनों के बीच मजबूत रणनीतिक साझेदारी है.

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बुद्ध ने जोड़ा, चीन तोड़ ना सका… भारत-मंगोलिया का अनोखा रिश्ताभले ही भारत और मंगोलिया की सीमाएं आपस में नहीं जुड़ी हैं, लेकिन भारत हमेशा मंगोलिया को अपना पड़ोसी मानता है.

India-Mongolia Relations: मंगोलिया एक ऐसा देश है, जहां भारतीयों से लोग बौद्ध धर्म से उनके संबंध और हिमालयन हेरिटेज के कारण प्रेम करते हैं. चीन और रूस मंगोलिया के पड़ोसी हैं. लेकिन हकीकत यह है कि पिछले कई सालों में भारत उनका वास्तविक रणनीतिक और आध्यात्मिक पड़ोसी बन गया है. भले ही भारत और मंगोलिया की सीमाएं आपस में नहीं जुड़ी हैं, लेकिन भारत हमेशा मंगोलिया को अपना पड़ोसी मानता है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के निमंत्रण पर मंगोलिया के राष्ट्रपति खुरेलसुख उखना चार दिनों की (13-16 अक्टूबर) भारत की यात्रा पर आए हुए हैं. चीन की महत्वपूर्ण भौगोलिक स्थिति और प्रभाव की छाया में भी दोनों देशों के बीच मजबूत आध्यात्मिक और रणनीतिक साझेदारी कायम हुई है.

भारत और मंगोलिया रणनीतिक साझेदार, आध्यात्मिक पड़ोसी और तीसरे पड़ोसी हैं. ‘तीसरा पड़ोसी’ शब्द मंगोलिया की विदेश नीति से जुड़ा है, जिसका अर्थ है रूस और चीन के अलावा अन्य देशों के साथ संबंध विकसित करना. यह नीति मंगोलिया को इन दो शक्तिशाली पड़ोसियों पर निर्भरता कम करने और अपने आर्थिक, राजनीतिक और रणनीतिक संबंधों को विविध बनाने में मदद करती है. भारत और मंगोलिया के बीच राजनयिक संबंध 1955 में स्थापित हुए थे. पिछले सात दशकों में दोनों देशों ने साझा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित एक घनिष्ठ और बहुआयामी साझेदारी विकसित की है. यह साझेदारी रक्षा और सुरक्षा, संसदीय आदान-प्रदान, विकास साझेदारी, ऊर्जा, खनन, सूचना प्रौद्योगिकी, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और सांस्कृतिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में फैली हुई है. 

10000 साल पुराने संबंधकई लोग भारत-मंगोलियाई संबंधों को 10000 साल से भी अधिक पुराना बताते हैं. उनके अनुसार हिमालय की तलहटी में कांगड़ा राज्य से भारतीय मंगोलिया के वर्तमान क्षेत्र में चले गए थे. इस मिशन का नेतृत्व राज्य के राजकुमार मंगलदेव ने किया था. ऐसा माना जाता है कि उनके वंशज 2000 साल बाद भारत लौट आए. मंगोलिया के पूर्व प्रधानमंत्री आनंदिन अमर ने अपनी पुस्तक ‘शॉर्ट हिस्ट्री ऑफ मंगोलिया’ में लिखा कि मंगोलियाई पूर्वज हिमालय के दक्षिण से आए थे.  

दोनों देशों का ऐतिहासिक जुड़ावभारत और मंगोलिया सदियों से बौद्ध धर्म के माध्यम से जुड़े हुए हैं. मंगोलिया में बौद्ध धर्म भारत से ही तिब्बत और हिमालय क्षेत्र के रास्ते पहुंचा. मंगोलियाई लोग भारत को ‘बुद्ध की भूमि’ मानते हैं और उनके लिए यह एक पवित्र तीर्थस्थल है. दोनों देश ‘आध्यात्मिक भाई-बहन’ (Spiritual Siblings) कहलाते हैं. बौद्ध ग्रंथों के अध्ययन, प्राचीन पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण (जैसे कि मंगोलियाई कंजूर की 108 खंडों की छपाई में भारत का सहयोग) और बुद्ध के पवित्र अवशेषों (जैसे सारिपुत्र और मौद्गल्यायन के अवशेष) को मंगोलिया भेजना इस सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रिश्ते को और मजबूत करता है.

चीन के प्रभुत्व के बीच ‘तीसरा पड़ोसी’मंगोलिया एक Landlocked देश है जो रूस और चीन के बीच स्थित है. अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण मंगोलिया चीन पर आर्थिक और परिवहन के लिए अत्यधिक निर्भर है. मंगोलिया अपनी विदेश नीति में भारत, अमेरिका, जापान और जर्मनी को अपना ‘तीसरा पड़ोसी’ मानता है. ताकि वह किसी एक बड़ी शक्ति पर अपनी निर्भरता को कम कर सके और अपनी संप्रभुता को बनाए रख सके. भारत को इसमें ‘आध्यात्मिक पड़ोसी’ का दर्जा प्राप्त है. भारत ने चीन और ताइवान के मजबूत विरोध के बावजूद मंगोलिया को संयुक्त राष्ट्र जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंचों की सदस्यता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. मंगोलिया संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए भारत की उम्मीदवारी का समर्थन भी करता है.

वर्तमान रणनीतिक साझेदारी2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंगोलिया यात्रा के दौरान दोनों देशों के संबंधों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ में बदला गया. दोनों देशों के बीच ‘नोमेडिक एलीफैंट’ (Nomadic Elephant) नामक वार्षिक सैन्य अभ्यास होता है. भारत, मंगोलिया के रक्षा बलों को प्रशिक्षण और उपकरण सहायता प्रदान करता है जिसमें सीमा सुरक्षा बलों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम शामिल हैं. भारत, मंगोलिया की पहली तेल रिफाइनरी परियोजना को $1.7 बिलियन की लाइन ऑफ क्रेडिट के साथ समर्थन दे रहा है, जो मंगोलिया की ईंधन आयात पर निर्भरता को कम करके उसकी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी. यह भारत की सबसे बड़ी विकास साझेदारी परियोजनाओं में से एक है.

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New Delhi,Delhi

First Published :

October 15, 2025, 13:32 IST

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