राजस्थान में वंशवाद की राजनीति! बीजेपी और कांग्रेस दोनों में बराबर बढ़ी है अमरबेल; जानें कौन-सा परिवार रहा हावी

जयपुर. देश की राजनीति में वंशवाद की जड़ें काफी मजबूत है. बड़ी-छोटी तमाम पार्टियों में वंशवाद हावी है. राजस्थान भी इससे अछूता नहीं है. यहां भी राजनीति में वंशवाद की जड़े काफी मजबूत है. कांग्रेस से लेकर भाजपा तक में वंशवाद हावी है. ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स और ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ द्वारा किए गए विश्लेषण के अनुसार, राजस्थान विधानसभा के वर्तमान 200 विधायकों में से कुल 40 यानी लगभग 20 प्रतिशत विधायक वंशवादी पृष्ठभूमि से आते हैं. इस मामले में कांग्रेस सबसे आगे है. कांग्रेस के 69 विधायकों में से 21 विधायक वंशवादी हैं, जो पार्टी के विधायकों का लगभग 30 प्रतिशत है.
राजस्थान में परिवार की विरासत को आगे बढ़ाने में कांग्रेस ने प्रमुख भूमिका निभाई है. इन वंशवादी नेताओं में पूर्व केंद्रीय मंत्री राजेश पायलट के बेटे सचिन पायलट, पूर्व केंद्रीय मंत्री शीश राम ओला के बेटे बृजेंद्र ओला, पूर्व मंत्री रामनारायण चौधरी की बेटी रीता चौधरी, पूर्व मंत्री महिपाल मदेरणा की बेटी दिव्या मदेरणा जैसे प्रमुख चेहरे शामिल हैं. इनके अलावा, वर्तमान विधानसभा में कांग्रेस की ओर से कम से कम छह ऐसे सदस्य हैं, जिनके परिवार के सदस्य पहले मंत्री या सांसद रह चुके हैं. वंशवादी विधायकों की इस सूची में पूर्व विधायक भंवर लाल शर्मा के बेटे अनिल शर्मा, पूर्व मंत्री भंवर लाल मेघवाल के बेटे मनोज मेघवाल, पूर्व राज्यसभा सांसद अबरार अहमद के बेटे दानिश अबरार भी शामिल हैं.
बीजेपी और अन्य दलों का हाल
प्रमुख दलों के आंकड़ों पर गौर करें तो, भारतीय जनता पार्टी भी इस मामले में पीछे नहीं है. बीजेपी के 115 विधायकों में से 14 यानी लगभग 12 प्रतिशत विधायक वंशवादी हैं. वहीं, अन्य दलों और निर्दलीयों में वंशवादी विधायकों की संख्या कम है, लेकिन कुछ प्रमुख नाम शामिल हैं. वर्तमान बीजेपी सरकार के कई मंत्री भी वंशवादी पृष्ठभूमि से आते हैं. इनमें उप-मुख्यमंत्री दीया कुमारी पूर्व सांसद गायत्री देवी की पोती, विधायक सिद्धि कुमारी पूर्व सांसद करनी सिंह की पोती, दीप्ति महेश्वरी पूर्व मंत्री किरण महेश्वरी की बेटी और विश्वराज सिंह मेवाड़ मेवाड़ राजघराने के वारिस का नाम शामिल है.
राजनीति में तीसरी पीढ़ी की भी धमक
राजस्थान में दूसरी और तीसरी पीढ़ी के वंशवादी भी प्रमुखता से राजनीति में सक्रिय हैं. बीजेपी की विधायक ज्योति मिर्धा पूर्व सांसद नाथूराम मिर्धा की पोती, जिनके दादा और पिता दोनों प्रमुख नेता रहे, वह तीसरी पीढ़ी की वंशवादी हैं. इसी तरह, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे जो खुद विधायक हैं और विजयाराजे सिंधिया की बेटी, उनके बेटे दुष्यंत सिंह सांसद, पूर्व मंत्री दिगंबर सिंह के बेटे शैलेश सिंह, किरोड़ी सिंह बैसला के बेटे विजय बैसला जैसे नेता भी शामिल हैं. कांग्रेस के हरेंद्र मिर्धा पूर्व विधायक रिछपाल मिर्धा के बेटे, बीजेपी के राम स्वरूप लांबा पूर्व सांसद संवर लाल जाट के बेटे भी हैं, जिनके पिता या दादा सांसद या मंत्री थे. कुल मिलाकर, राजस्थान जैसे राज्य में जहां कई सामाजिक और प्रगतिशील आंदोलन हुए हैं, यह आंकड़ा दिखाता है कि राजनीति में योग्यता के बजाय पारिवारिक विरासत को प्राथमिकता देने की प्रवृत्ति अभी भी गहराई तक जमी हुई है.
कांग्रेस पार्टी में परिवारिक विरासत
सोनिया गांधी भी राजस्थान से राज्यसभा सांसद हैं जो पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पत्नी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की बहू हैं. इनके पुत्र राहुल गांधी सांसद हैं और लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं. पुत्री प्रियंका गांधी वाड्रा सांसद और एआईसीसी की महासचिव हैं. तीनों ही कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य हैं. वहीं रंदीप सिंह सुरजेवाला राजस्थान से ही राज्यसभा सांसद और एआईसीसी महासचिव के साथ सीडब्ल्यूसी सदस्य भी हैं. इनके पिता कांग्रेस नेता शमशेर सिंह सुरजेवाला हैं और पुत्र आदित्य सुरजेवाला विधायक हैं. प्रमोद तिवारी राजस्थान के पूर्व राज्यसभा सांसद हैं और पुत्री आराधना मिश्रा ‘मोना’ विधायक और कांग्रेस विधायक दल की नेता हैं.
वीरेंद्र सिंह विधायक हैं और इनके पिता पूर्व मंत्री और विधायक नारायण सिंह हैं. शोभारानी कुशवाह विधायक हैं और इनके पति पूर्व विधायक बी.एल. कुशवाह हैं. रूपिंदर सिंह कूनर विधायक हैं और इनके पित पूर्व विधायक गुरमीत सिंह कूनर हैं. राहुल कस्वां लोकसभा सांसद हैं और इनके पिता पूर्व सांसद राम सिंह कस्वां और दादा पूर्व सांसद दीप सिंह हैं. बृजेन्द्र सिंह ओला लोकसभा सांसद हैं और पिता पूर्व सांसद व विधायक शीशराम ओला हैं.
सचिन पायलट के पिता भी रह चुके हैं कद्दावर नेता
कुमारी रीता चौधरी विधायक हैं और पिता पूर्व मंत्री राम नारायण चौधरी हैं. हरेन्द्र मिर्धा विधायक हैं और पिता पूर्व स्पीकर नथूराम मिर्धा हैं.इसके अलावा पुत्र राजनीतिज्ञ रघुवेन्द्र मिर्धा हैं. सुशीला रमेश्वर डूडी विधायक हैं और पति रमेश्वर डूडी पूर्व सांसद और नेता प्रतिपक्ष हैं. रोहित बोहरा विधायक हैं पिता पूर्व विधायक प्रद्युम्न सिंह हैं. मुकुल वासनिक राज्यसभा सांसद हैं के साथ एआईसीसी महासचिव, सीडब्ल्यूसी सदस्य हैं और पिता पूर्व सांसद बालकृष्ण वासनिक हैं. नीरज डांगी राज्यसभा सांसद हैं और पिता पूर्व मंत्री और विधायक दिनेश डांगी हैं. अनिल कुमार शर्मा विधायक हैं और पिता पूर्व विधायक भंवरलाल शर्मा हैं.
मनोज कुमार विधायक हैं और पिता भंवरलाल मेघवाल पूर्व मंत्री रह चुके हैं. वहीं सचिन पायलट विधायक के साथ एआईसीसी महासचिवऔर सीडब्ल्यूसी सदस्य हैं जबकि पिता राजेश पायलट कांग्रेस के कद्दावर नेता रहने के साथ केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं. इस फेहरिस्त में लोकसभा सांसद हरीशचंद्र मीणा भी शामिल हैं. इनके भाई नामो नारायण मीणा पूर्व में केन्द्रीय मंत्री रह चुके हैं.
भाजपा में भी वंशवाद की जड़ें मजबूत
भाजपा में भी वंशवाद की जड़ें मजबूत हैं. इसमें किरोड़ी लाल मीणा विधायक और कैबिनेट मंत्री हैं और पत्नी गोलमा देवी पूर्व विधायक हैं जबकि भतीजा राजेंद्र मीणा विधायक हैं. मेवाड़ राजघराने से आने वाले विश्वराज सिंह मेवाड़ विधायक और पत्नी महिमा कुमारी मेवाड़, लोकसभा सांसद हैं. विधायक शैलेश सिंह पूर्व मंत्री दिगंबर सिंहके पुत्र हैं और इनके ससुर कांग्रेस विधायक विद्याधर सिंह हैं. सिद्धि कुमारी विधायक हैं और दादा कर्णी सिंह पूर्व सांसद रह चुके हैं. विधायक व राज्य मंत्री कृष्ण कुमार विश्नोई के पिता पूर्व विधायक लादूराम हैं. अंशुमान सिंह भाटी विधायक हैं और पिता पूर्व सांसद महेंद्र भाटी हैं जबकि दादा पूर्व विधायक देवी सिंह भाटी हैं. कल्पना देवी विधायक हैं और पति इजयराज सिंह पूर्व सांसद हैं. वहीं ससुर ब्रिजराज सिंह पूर्व सांसद हैं. विधायक जगत सिंह पूर्व केंद्रीय मंत्री पूर्व केंद्रीय मंत्री के. नटवर सिंह के पुत्र हैं. रामस्वरूप लाम्बा विधायक हैं और पिता पूर्व सांसद संवरलाल जाट हैं. हेमंत मीणा विधायक व राज्य मंत्री एवं पिता नंदलाल मीणा पूर्व में मंत्री रहे हैं.
दीप्ति किरण महेश्वरी विधायक हैं और इनकी माता किरण महेश्वरी पूर्व में विधायक रह चुकी हैं. शांता अमृतलाल मीणा विधायक हैं और पति पूर्व विधायक अमृतलाल मीणा हैं. झाबर सिंह खाररा विधायक व राज्य मंत्री हैंऔर पिता पूर्व मंत्री हर्लाल सिंह खाररा हैं. राजघराने से ताल्लुक रखने वाली दिया कुमारी विधायक व उपमुख्यमंत्री हैं जबकि दादी पूर्व सांसद गायत्री देवी हैं. अरुण चौधरी विधायक हैं और इनके पित अमराराम चौधरी पूर्व में विधायक रहे हैं. मंजू शर्मा लोकसभा सांसद हैं और इनके पिता भंवरलाल शर्मा पूर्व में विधायक रहे हैं. वहीं विधायक गुरवीर सिंह के दादा गुरजंत सिंह बराड़ पूर्व विधायक रह चुके हैं. इसके अलावा अतुल भंसाली के चाचा कैलाश भंसाली भी पूर्व में विधायक रह चुके हैं.



