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भारतीय सेना का धमाकेदार हेलिबोर्न अभ्यास: 12,500 फीट से छलांग और पैरा ट्रूपर्स की त्वरित तैनाती ने दुश्मन को चौंकाया

Last Updated:November 11, 2025, 21:14 IST

जैसलमेर सीमा पर भारतीय सेना वायुसेना ने बड़े पैमाने पर हेलिबोर्न अभ्यास कर बहु डोमेन युद्ध की तैयारी दिखाई. अनुभवी पैरा ट्रूपर्स ने 12,500 फीट से फ्री फॉल के साथ हथियार व उपकरण लेकर छलांग लगाई, जबकि करीब 400 जवान लगभग एक ब्रिगेड सुपर हरक्यूलिस और एन 32 विमानों से करीब 1,200 फीट से मास ड्रॉप के जरिए तैनात किए गए. यह अभ्यास त्वरित हवाई परिवहन, समन्वय और आश्चर्यजनक रणनीतिक तैनाती की क्षमता का प्रदर्शन था.

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जैसलमेर में सेना-वायुसेना का हेलिबोर्न अभ्यास, पैरा ट्रूपर्स की दिखी ताकतआपरेशन त्रिशूल में हुआ हेलिबोर्न अभ्यास

जैसलमेर. भारतीय सेना और वायुसेना ने पश्चिमी सीमावर्ती इलाके में एक विशाल हेलिबोर्न अभ्यास आयोजित किया, जिसमें पैरा‑ट्रूपर्स की बड़ी तादाद को हवा से गिराकर युद्ध की तैयारी दिखायी गयी. इस अभ्यास का उद्देश्य पारंपरिक ताकत के साथ एयरबोर्न क्षमताओं का तेज और निर्णायक कार्रवाई करने की सेना‑वायुसेना की क्षमता का प्रदर्शन करना था. हवाई क्षेत्र में एक के बाद एक पैरा‑ट्रूपर्स को उड़ान भरता देख ऐसा लगा मानो सीमा के ऊपर उड़न तश्तरी झुंड बन गए हो पर ये ‘उड़न तश्तरियां’ दरअसल बहादुर पैरा‑ट्रूपर्स थे. अनुभवी ट्रूपर्स ने करीब 12,500 फीट की ऊंचाई से फ्री‑फैलींग के माध्यम से छलांग लगाकर न केवल स्वयं बल्कि अपने हथियार और आवश्यक सामान भी साथ लेकर लैंडिंग की. यह फ्री‑फ्लाइंग थ्रो विशेष परिस्थितियों में तेज घुसपैठ और दुश्मन के पीछे दस्ते उतारने की रणनीति का हिस्सा है.

वायुसेना के मल्टी‑रोल परिवहन विमानों जिनमें सुपर हरक्यूलिस और एन‑32 विमानों का जिक्र किया गया. एक साथ कई पैरा‑ट्रूपर्स और उपकरणों का पारवहन किया. इसके अलावा वायुसेना के भारी परिवहन विमान से करीब चार सौ पैरा‑ट्रूपर्स, यानी लगभग एक ब्रिगेड बराबर जवानों को कम ऊंचाई से भी डाला गया, ताकि मल्टी‑पैथ ऑपरेशन्स और त्वरित प्रतिक्रिया का अभ्यास हो सके. अभ्यास में हथियारों, संचार उपकरणों और रसद के साथ समन्वित लैंडिंग पर विशेष ध्यान दिया गया.

वायुबलों के बीच सूचना‑साझा करने की क्षमता को निखारने का प्रयास

अभ्यास के आयोजकों ने बताया कि यह केवल शक्ति का प्रदर्शन नहीं, बल्कि वास्तविक युद्ध‑परिस्थितियों में तेज निर्णय‑क्षमता, समन्वय और जमीनी और वायुबलों के बीच सूचना‑साझा करने की क्षमता को निखारने का प्रयास था. ऐसे अभ्यास दुश्मन के लिए अप्रत्याशित रणनीतिक झटका देने में सक्षम होते हैं और सीमा‑सुरक्षा हेतु चुस्ती‑फुर्ती बढ़ाते हैं. सैन्य विश्लेषक इसके सैन्य महत्व को देखते हुए कहते हैं कि बहु‑डोमेन तैयारी से भारत न केवल पारंपरिक जमीन‑युद्ध में बल्कि हवाई और तकनीकी सिद्धांतों के समन्वित उपयोग में भी सक्षम दिखता है.

Monali Paul

Hello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ें

Hello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW… और पढ़ें

Location :

Jaisalmer,Rajasthan

First Published :

November 11, 2025, 21:14 IST

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जैसलमेर में सेना-वायुसेना का हेलिबोर्न अभ्यास, पैरा ट्रूपर्स की दिखी ताकत

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