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भारत का पहला जैवलिन गोल्ड! सैनिक से चैंपियन बने सरनाम सिंह की कहानी – 6 घंटे की मेहनत, 33 मेडल देश का नाम 

Last Updated:December 04, 2025, 19:52 IST

Dhaulpur News Hindi : उत्तर प्रदेश के अई गांव के रहने वाले सरनाम सिंह भारतीय सेना के गौरव और जैवलिन थ्रो के चमकते सितारे रहे हैं. स्कूल गेम्स से लेकर एशियन लेवल तक 33 मेडल जीतकर उन्होंने देश का नाम रोशन किया. 1984 साउथ एशियन गेम्स में भारत को जैवलिन में पहला गोल्ड दिलाने वाले सरनाम सिंह आज भी अपने संघर्ष और उपलब्धियों से नई पीढ़ी के प्रेरणास्रोत हैं.

यह कहानी है सरनाम सिंह कि जिनका जन्म उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के फतेहाबाद तहसील के अई गांव में हुआ. उनके पिताजी पहलवान थे तो उनको देखकर ही वे खेल में जाना चाहते थे खेल के साथ-साथ वह भारतीय सेना में शामिल होने की तैयारी भी कर रहे थे. सरनाम सिंह ने स्कूल गेम्स और एशियाई गेम्स में कुल मिलाकर 33 मेडल जीते हैं और इन मेडलो को वह आज भी संभालकर रखते हैं. सरनाम सिंह 4 साल से राजस्थान के धौलपुर जिले में अपने परिवार के साथ रहते हैं.

18 सितंबर 1976 को वह भारतीय सेना में शामिल हो जाते हैं. भारतीय सेना में शामिल होने के बाद उनकी 9 महीने की ट्रेनिंग फर्रुखाबाद के फ़तेहगढ़ में हुई और ट्रेनिंग पूरी होने के पश्चात उनकी पहली पोस्टिंग सिक्किम मे हुई और राजपूत रेजीमेंट का हिस्सा बने. भारतीय सेना में जाने के 4 साल बाद उन्होंने फिर से जैवलिन खेलना शुरू कर दिया और भारतीय सेना की अलग-अलग टीम से वह जैवलिन खेलते रहे.

1982 में पहली बार एशियन गेम के ट्रायल में उन्होंने भाग लिया और देश में चौथा स्थान प्राप्त किया और इसके बाद 1984 में मुंबई नेशनल जैवलिन चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता और 1984 में फर्स्ट साउथ एशियन गेम काठमांडू नेपाल में आयोजित हुआ जिसमें गोल्ड मेडल जीतकर सरनाम सिंह ने इतिहास रच दिया और भारत को जैवलिन थ्रो गेम में पहला गोल्ड मेडल दिला दिया.

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इसके बाद 1985 में एशियन ट्रैक एंड फील्ड गेम का आयोजन जकारता में हुआ जिसमें वह पांचवें स्थान पर रहे. सन् 1985 में ही दिल्ली में नेशनल गेम का आयोजन होता है जिसमें सरनाम सिंह ने 78.38 मी का भाला फेंक कर देश में एक नया रिकॉर्ड स्थापित कर दिया और 1989 में पाकिस्तान में आयोजित फोर्थ साउथ एशियन गेम जैवलिन थ्रो में वह चौथे स्थान पर रहे. उन्हें बिना मेडल के ही संतोष करना पड़ा उसे समय के तत्कालीन रक्षा मंत्री मुलायम सिंह यादव भी सरनाम सिंह को सम्मानित कर चुके हैं.

1989 में दिल्ली में आयोजित एशियाई ट्रैक एंड फील्ड का आयोजन हुआ उसमें भी सरनाम सिंह को चौथे नंबर से ही संतोष करना पड़ा. सरनाम सिंह रोज 6 से 7 घंटे जैवलिन थ्रो फेंकने का अभ्यास करते थे और सन 2001 में वह भारतीय सेना से सूबेदार मेजर आनरेरी कैप्टन से रिटायर्ड हुए.

First Published :

December 04, 2025, 19:52 IST

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भारत का पहला जैवलिन गोल्ड! सैनिक से चैंपियन बने सरनाम सिंह की प्रेरक कहानी

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