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भारत का इकलौता 800 साल पुराना मंदिर, जहां अंजनी माता कराती हैं बाल हनुमान को दुग्धपान

Last Updated:November 08, 2025, 12:43 IST

Karauli News Hindi : राजस्थान के करौली में अरावली की ऊंचाइयों पर स्थित 800 साल पुराना अंजनी माता मंदिर आस्था का केंद्र है. यहां माता अंजनी की दुर्लभ प्रतिमा अपने पुत्र बाल हनुमान को दुग्धपान कराती नजर आती है. मान्यता है कि मंदिर में सरकंडे के तीर चढ़ाने से कान के रोग हमेशा के लिए दूर हो जाते हैं.

करौली : धर्मनगरी करौली में त्रिकूट पर्वत पर स्थित अंजनी माता का एक अत्यंत प्राचीन और अद्वितीय मंदिर है, जो लगभग 800 वर्ष पुराना बताया जाता है. यह मंदिर पूरे देश में अपनी दुर्लभ प्रतिमा और मान्यताओं के कारण विशेष पहचान रखता है. यहां अंजनी माता स्वयं अपने पुत्र बाल हनुमान को गोद में लेकर दुग्धपान कराती हुई विराजमान हैं, ऐसी प्रतिमा देश में कहीं और नहीं है. यह मंदिर अरावली पर्वतमाला की ऊंचाई पर स्थित है, जहां से प्राकृतिक सौंदर्य का मनमोहक दृश्य दिखाई देता है. यहां से राजस्थान के प्रसिद्ध और विशाल पांचने बांध का दिलकश नजारा भी देखा जा सकता है.

इस मंदिर में माता अंजनी के सामने ही हनुमान जी के पुत्र मकरध्वज का मंदिर बना हुआ है. इतिहासकारों के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण सन् 1348 ईस्वी में यदुवंशी राजा अर्जुन देव ने कराया था. यदुवंशियों की कुलदेवी होने के कारण करौली नगर की स्थापना के साथ ही माता अंजनी की प्रतिष्ठा की गई थी. संगमरमर से बनी अंजनी माता की प्रतिमा कला और भक्ति दोनों का अद्भुत संगम है.

सरकंडे के तीर चढ़ाने की है परंपराअंजनी माता मंदिर की सबसे बड़ी मान्यता यह है कि यहां माता के दर्शन मात्र से कान के सभी रोग दूर हो जाते हैं. भक्त मंदिर में सरकंडे के तीर चढ़ाते हैं. कहा जाता है कि ऐसा करने से कान दर्द और अन्य रोगों से मुक्ति मिलती है. कई भक्त माता को सोने-चांदी के तीर भी अर्पित करते हैं. मंदिर में दर्शन के लिए आई श्रद्धालु नीतू गुप्ता बताती हैं, यहां अंजनी माता साक्षात विराजमान हैं और अपने भक्तों के सभी दुख-दर्द हर लेती हैं. पहले यहां सीढ़ियां नहीं थीं, भक्तों को पहाड़ चढ़कर ही आना पड़ता था. अब सीढ़ियां बनने से दर्शन आसान हो गए हैं. यहां माता स्वयं कानों के रोगों की दवाई देती हैं.

पत्थर के घर बनाने की अनोखी परंपराइस मंदिर में मन्नत पूरी होने पर पत्थर के छोटे घर बनाने की परंपरा है. श्रद्धालुओं का मानना है कि ऐसा करने से माता प्रसन्न होकर अपने भक्तों को सुंदर घर का आशीर्वाद देती हैं.

साल में एक बार लगता है विशाल मेलाहर साल देव उठनी एकादशी के अवसर पर यहां भव्य मेला भरता है, जिसमें देशभर से लाखों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए आते हैं. अरावली पर्वतमालाओं की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर भक्तों की आस्था और विश्वास का प्रतीक बना हुआ है. मंदिर के पुजारी कैलाश हरदेनिया के अनुसार यह मंदिर करौली रियासत से भी प्राचीन है. करौली की स्थापना का प्रतीक इसी मंदिर को माना जाता है. उनका मानना है कि हनुमान जी का जन्म भी यहीं हुआ था.

Rupesh Kumar Jaiswal

रुपेश कुमार जायसवाल ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के ज़ाकिर हुसैन कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस और इंग्लिश में बीए किया है. टीवी और रेडियो जर्नलिज़्म में पोस्ट ग्रेजुएट भी हैं. फिलहाल नेटवर्क18 से जुड़े हैं. खाली समय में उन…और पढ़ें

रुपेश कुमार जायसवाल ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के ज़ाकिर हुसैन कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस और इंग्लिश में बीए किया है. टीवी और रेडियो जर्नलिज़्म में पोस्ट ग्रेजुएट भी हैं. फिलहाल नेटवर्क18 से जुड़े हैं. खाली समय में उन… और पढ़ें

Location :

Karauli,Rajasthan

First Published :

November 08, 2025, 12:43 IST

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800 साल पुराना मंदिर! जहां अंजनी माता कराती हैं बाल हनुमान को दुग्धपान

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