Rajasthan

यूरिया समेत रासायनिक खाद की जगह किसान अपना सकते हैं ये देशी खाद, खुद कर सकते हैं खेत में तैयार

Last Updated:December 24, 2025, 13:24 IST

Agriculture Tips : खेतों में बुवाई से पहले रासायनिक खाद की बढ़ती मांग और कीमतों के बीच किसानों के लिए एक देसी और सस्ता विकल्प तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. सिरोही जिले में गाय के गोबर और गौमूत्र से तैयार होने वाली जीवामृत खाद खेती की तस्वीर बदल रही है और बेहतर उत्पादन का भरोसा दे रही है.

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सिरोही : इन दोनों खेतों में फसल की बुवाई से पहले किसानों को यूरिया खाद समेत रासायनिक खाद की जरूरत ज्यादा हो रही है. खाद और बीज के लिए सरकारी दामों पर किसानों की भीड़ साफ नजर आ रही है. ऐसे में किसानों के लिए यूरिया समेत रासायनिक खाद के बजाय देसी तरीके से तैयार एक तरल खाद अच्छे विकल्प के रूप में सामने आ रही है. जी हां, हम बात कर रहे हैं जीवामृत खाद की.

गाय के गोबर गौ मूत्र, छाछ आदि देशी उत्पादों से तैयार होने वाली ये खाद फसल के लिए अमृत समान मानी जाती है. राजस्थान के सिरोही जिले में तपोवन में ब्रह्माकुमारी संस्थान की ओर से जीवामृत और घन जीवामृत से पिछले 15 वर्षों से आधुनिक खेती की जा रही है. यहां देश भर से किसान इस खाद को तैयार करने की ट्रेनिंग भी लेने आते हैं. तपोवन के बीके ललन भाई ने यहां तैयार होने वाली जीवामृत खाद की जानकारी दी.

किसान ऐसे तैयार कर सकते है जीवामृतबीके ललन भाई ने बताया कि जीवामृत बनाने के लिए गाय के गोबर व मूत्र को छाछ, बेसन, गुड़, नीम और सरसो की खली आदि को निर्धारित मात्रा में पानी मिलाकर तैयार करना पड़ता हैं. इसके बाद इसे दो से तीन दिन तक विघटित होने के लिए छायादार जगह पर छोड़ दिया जाता है. इसके बाद इसे 1 लीटर को 100 लीटर पानी के साथ छोटे पौधों में ड्रिप से और बड़े पौधों में सीधे तौर पर दिया जाता है. वहीं घन जीवामृत बनाने के लिए जीवामृत तैयार होने के बाद इसे गाय के गोबर के साथ दुबारा विघटित किया जाता है. जिसे पुनः दो से तीन दिन तक रखा जाता है. इसके बाद इसका खेत में उपयोग किया जा सकता है.

जीवामृत के है ये फायदेंइसके उपयोग से खेत में लाभदायक केंचुए, जो जमीन के नीचे चले जाते है, वो वापस ऊपर आने लगते हैं और मिट्टी की कोमलता बरकरार रहती है. इससे भूमि उर्वरा शक्ति भी बढ़ जाती है और उत्पादन में बढ़ोत्तरी होती है. जीवामृत और घन जीवामृत का उपयोग बुवाई से पहले मिट्टी में अच्छी तरह से मिला दिया जाता है. जिससे उत्पादन व फसल उपज की गुणवत्ता भी काफी अच्छी हो जाती है.

About the AuthorRupesh Kumar Jaiswal

A Delhi University graduate with a postgraduate Diploma in Journalism and Mass Communication, I work as a Content Editor with the Rajasthan team at India Digital. I’m driven by the idea of turning raw in…और पढ़ें

Location :

Sirohi,Rajasthan

First Published :

December 24, 2025, 13:21 IST

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सिरोही में जीवामृत खाद से खेती के फायदे और बनाने की विधि.

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