समाधान की जगह टकराव! भिवाड़ी-धारूहेड़ा रैम्प विवाद ने फिर पकड़ा तूल, अब आगे क्या?

नितिन शर्मा/खैरथल तिजारा. खैरथल तिजारा जिले के भिवाड़ी से एक बार फिर वही पुराना लेकिन लगातार उलझता जा रहा विवाद सामने आया है, जिसने राजस्थान और हरियाणा के बीच न सिर्फ प्रशासनिक बल्कि राजनीतिक तनाव भी पैदा कर दिया है. धारूहेड़ा बाईपास पर बना विवादास्पद रैम्प एक बार फिर चर्चा में है. जिस रैम्प को कुछ समय पहले अज्ञात लोगों ने तोड़ दिया था, उसे आज फिर से बना दिया गया. इस कदम के बाद भिवाड़ी के लोगों में नाराजगी और निराशा साफ देखी जा रही है.
यह मामला सिर्फ एक रैम्प का नहीं है, बल्कि वर्षों से चली आ रही जलभराव की उस समस्या का है, जिसने भिवाड़ी के हजारों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित किया है. बरसात का मौसम आते ही भिवाड़ी की सड़कें, कॉलोनियां और औद्योगिक क्षेत्र जलमग्न हो जाते हैं. लोग सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर समस्या का स्थायी समाधान कब होगा, या फिर हर साल यही कहानी दोहराई जाती रहेगी.
क्यों बनाया गया था रैंप?
दरअसल, भिवाड़ी और धारूहेड़ा के बीच नेशनल हाईवे बाईपास पर बना यह रैम्प पहली बार साल 2023 में हरियाणा प्रशासन द्वारा तैयार किया गया था. भिवाड़ी एक इंडस्ट्रियल एरिया है. यहां से औद्योगिक अपशिष्ट युक्त पानी निकलता है. यह पानी धारूहेड़ा की ओर न जाए इसके लिए हरियाणा की ओर से अपने क्षेत्र को जलभराव और प्रदूषण से बचाने के लिए यह रैंप बनाया गया था. लेकिन यही रैम्प भिवाड़ी के लिए बड़ी मुसीबत बन गया.
रैंप से भिवाड़ी वालों को क्या दिक्कत?रैम्प बनने के बाद बारिश के दिनों में भिवाड़ी में पानी की निकासी लगभग रुक गई. नतीजा यह हुआ कि भारी जलजमाव की स्थिति बनने लगी. कई कॉलोनियों में घरों तक पानी घुस गया, सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं और औद्योगिक इकाइयों को भी नुकसान झेलना पड़ा. भिवाड़ी के लोगों का आरोप है कि हरियाणा ने अपनी समस्या का समाधान तो कर लिया, लेकिन उसकी कीमत भिवाड़ी को चुकानी पड़ रही है. यही से विवाद की जड़ और गहरी हो गई.
राजनीतिक अखाड़ा बन गया मामला
यह मुद्दा अब सिर्फ स्थानीय समस्या नहीं रहा. धीरे-धीरे यह राजस्थान और हरियाणा के बीच एक राजनीतिक अखाड़ा बन गया. दोनों राज्यों के नेता और अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आए. कल ही इस मुद्दे को लेकर दिल्ली में एक हाईलेवल मीटिंग हुई थी, जिसमें स्थायी समाधान निकालने की बात कही गई थी. बैठक से उम्मीद जगी थी कि शायद अब कोई ठोस रास्ता निकलेगा.
मीटिंग के अगले ही दिन फिर बना रैम्पलेकिन हाईलेवल मीटिंग के ठीक अगले दिन रैम्प का दोबारा निर्माण हो जाना कई सवाल खड़े करता है. भिवाड़ी के लोगों का कहना है कि जब स्थायी समाधान की बात हो रही थी, तब बिना किसी साझा सहमति के रैम्प को फिर से बनाना उनकी परेशानियों को नजरअंदाज करने जैसा है.
अब सवाल यही है कि क्या यह रैम्प फिर से तोड़ा जाएगा, या फिर भिवाड़ी के लोग एक और बरसात जलभराव के साथ बिताने को मजबूर होंगे. यह विवाद फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा, और समाधान की जगह कहानी फिर वहीं आकर खड़ी हो गई है, जहां से शुरू हुई थी.



