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Last Updated:December 24, 2025, 17:29 IST
Save Aravali Movement: अरावली पर्वतमाला की रक्षा के लिए एक भावुक और अनोखी पहल सामने आई है. पर्यावरण प्रेमी नरपतसिंह ने अरावली को बचाने की गुहार लगाते हुए राजस्थान की वरिष्ठ अधिकारी टीना डाबी को खून से लिखा पत्र भेजा. पत्र में उन्होंने अरावली क्षेत्र में हो रहे खनन, पर्यावरण विनाश और इससे ग्रामीण जीवन पर पड़ रहे गंभीर प्रभावों का जिक्र किया. नरपतसिंह का कहना है कि अरावली केवल पहाड़ नहीं, बल्कि जल, जीवन और पर्यावरण संतुलन का आधार है. उनकी यह भावुक पहल सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है और Save Aravali आंदोलन को नई आवाज मिली है.
बाड़मेर. अरावली पर्वतमाला की रक्षा के लिए बाड़मेर से एक भावुक और साहसी आवाज उठी है. पर्यावरण प्रेमी नरपतसिंह राजपुरोहित ने अरावली को बचाने की मांग को लेकर अपने खून से पत्र लिखकर जिला कलेक्टर को सौंपा है. नरपतसिंह ने अपने खून से लिखा पत्र जिला कलेक्टर टीना डाबी को सौंपकर अरावली के संरक्षण की गुहार लगाई है.
अरावली पर्वतमाला की पीड़ा अब शब्दों में नहीं खून की स्याही में लिखी जा रही है. प्रकृति के लगातार हो रहे विनाश से आहत बाड़मेर के पर्यावरण प्रेमी नरपतसिंह राजपुरोहित ने अरावली को बचाने की गुहार लगाते हुए अपने खून से राष्ट्रपति को पत्र लिखकर जिला कलेक्टर टीना डाबी को सौंपा है.
प्रकृति को बचाने के लिए लिखा खून से पत्रइस भावुक पहल के पीछे नरपतसिंह का संदेश साफ है. उन्होंने कहा कि जब कागज पर लिखी बात अनसुनी रह जाए तो खून की स्याही से चेताना जरूरी हो जाता है. उन्होंने कहा कि यह विरोध किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नहीं बल्कि प्रकृति को बचाने के लिए है.
एक लाख हस्ताक्षर अभियान चलाकर देंगे बअरावली बचाओ का संदेशनरपतसिंह ने कहा कि वे इस मुद्दे को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रदेशभर में बाइक यात्रा करेंगे. इस दौरान वे 1 लाख हस्ताक्षरों का अभियान चलाकर अरावली बचाओ की आवाज को मजबूती देंगे. यात्रा के दौरान गांव-ढाणियों, कस्बों और शहरों में लोगों को अरावली के महत्व, जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाएगा. वे बताते है कि 26 दिसम्बर को सिवाना की पहाड़ियों से वे अपनी यात्रा शुरू करेगें.
क्या अरावली बचाने के लिए इस तरह खून से देना होगा पत्रपत्र में उन्होंने लिखा कि अरावली क्षेत्र में हो रहे पर्यावरणीय अपराधों को तत्काल रोका जाए और इसके संरक्षण के लिए ठोस नीति बनाई जाए. उन्होंने कहा कि यह खून नही अरावली के आंसू है. अगर अरावली बची रहेगी तभी पानी, खेती और जीवन बचेगा. अरावली के लिए बहा नरपतसिंह का खून एक सवाल छोड़ जाता है कि “क्या धरती को बचाने के लिए इंसान को खुद लहू बहाना पड़ेगा?
About the AuthorJagriti Dubey
With more than 6 years above of experience in Digital Media Journalism. Currently I am working as a Content Editor at News 18 in Rajasthan Team. Here, I am covering lifestyle, health, beauty, fashion, religion…और पढ़ें
Location :
Barmer,Rajasthan
First Published :
December 24, 2025, 17:29 IST
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अरावली की रक्षा के लिए नरपतसिंह का भावुक कदम, टीना डाबी तक पहुंची आवाज



