क्या अनहेल्दी खाना आपके बच्चों को मोटा करने के साथ-साथ भौंदू भी बना रहा है! रिसर्च | The Gut Brain Secret connection Beyond Digestion How Microbes May Have Sculpted Human Intelligence New Research explaine qdps

Last Updated:January 06, 2026, 11:05 IST
हमारे शरीर के अंदर रहने वाले छोटे-छोटे बैक्टीरिया (microbes) सिर्फ खाना ही नहीं पचाते, बल्कि उन्होंने शायद हमें “इंसान” बनाने में और हमारी बुद्धि विकसित करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है. ये सामने आया है नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी की एक ताजा रिसर्च में, जिसमें ब्रेन और गट बैक्टेरिया के सीक्रेट कनेक्शन का खुलासा हुआ है. 
क्या आप भी अपने बच्चे के फर्स्ट आने पर या उसे खुश करने के लिए पार्टी के नाम पर जंक-फूड खिला देते हैं? ये जंक फूड मोटापे के लिए तो जिम्मेदार है ही, लेकिन अगर ताजा रिसर्च की मानें तो यही अनहेल्दी फूड की पार्टी आपके बच्चे के दिमाग के विकास पर भी असर डाल सकती है. दरअसल हमारी आंतों में रहने वाले बैक्टीरिया और हमारे ब्रेन के विकास का आपस में गहरा कनेक्शन होता है. गट-ब्रेन का ये सीक्रेट कनेक्शन सामने आया है नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी (Northwestern University) की एसोसिएट प्रोफेसर केटी अमाटो और उनकी टीम की एक नई रिसर्च में.
क्या कहती है रिसर्च?इस ताजा रिसर्च में वैज्ञानिकों ने पाया कि हमारी आंतों में रहने वाले बैक्टीरिया सीधे तौर पर हमारे मस्तिष्क के विकास और उसके काम करने के तरीके को प्रभावित करते हैं. यानी ऑटिज्म, बायपोलर और स्किजोफ्रेनिया जैसी मानसिक बीमारियां केवल ‘जेनेटिक’ नहीं हैं. बल्कि इनका गहरा कनेक्शन हमारी आंतों की सेहत से भी हो सकता है. नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी की यह रिसर्च PNAS (Proceedings of the National Academy of Sciences) जर्नल में प्रकाशित हुई है.
चूहों में डाला गया इंसान और बंदरों के बैक्टेरियाइस प्रयोगशाला में चूहों के अंदर इंसानों, गिलहरी बंदरों (बड़े दिमाग वाले बंदर) और मकाक (छोटे दिमाग वाले बंदर) के बैक्टीरिया डाले गए. बिना किसी माइक्रोब वाले चूहों में तीन अलग-अलग प्रजातियों के बैक्टीरिया डाले गए. शोध में देखा गया कि जब अलग-अलग दिमाग वाले बंदरों के बैक्टीरिया चूहों में डाले गए, तो उन चूहों का दिमाग उसी बंदर की तरह व्यवहार करने लगा.
वैज्ञानिकों ने आठ हफ्तों तक बैक्टीरिया के असर को इन बंदरों में देखा, जिसके बाद ये नतीजे जारी किए. इस रिसर्च में सामने आया कि बड़े दिमाग वाले बंदरों (इंसान और गिलहरी बंदर) के बैक्टीरिया ने चूहों के दिमाग में एनर्जी पैदा करने वाले और सीखने वाले जीन्स को सक्रिय कर दिया. जबकि छोटे दिमाग वाले मकाक के बैक्टीरिया वाले चूहों में ADHD और ऑटिज्म से जुड़े लक्षण दिखाई दिए.
आखिर क्यों किया गया ये रिसर्च?इंसानी दिमाग शरीर की बहुत ज्यादा ऊर्जा (Energy) खर्च करता है. वैज्ञानिक यह समझना चाहते थे कि विकास के दौरान इंसानों को इतनी ऊर्जा कहाँ से मिली? क्या आंतों के बैक्टीरिया ने खाना पचाकर दिमाग को वह एक्स्ट्रा पावर दी जिससे हम बुद्धिमान बन सके? साथ ही, वे ऑटिज्म और स्किजोफ्रेनिया जैसी स्थितियों के मूल कारण समझना चाहते थे.
क्या रहे शोध के मुख्य पहलू
आसान शब्दों में कहें तो, हम जो हैं और जैसा सोचते हैं, उसमें सिर्फ हमारी कोशिकाओं का हाथ नहीं है. हमारे अंदर रह रहे खरबों नन्हे बैक्टीरिया एक साइलेंट इंजीनियर की तरह हमारे दिमाग की मरम्मत और डिजाइनिंग कर रहे हैं. अगली बार जब आप कुछ खाएं, तो याद रखें कि आप सिर्फ अपना पेट नहीं, अपने दिमाग का ‘सॉफ्टवेयर’ भी अपडेट कर रहे हैं!
About the AuthorDeepika Sharma
दीपिका शर्मा पिछले 5 सालों से Hindi में काम कर रही हैं. News Editor के पद पर रहते हुए Entertainment सेक्शन को 4 सालों तक लीड करने के साथ अब Lifestyle, Astrology और Dharma की टीम को लीड कर रही हैं. पत्र…और पढ़ें
First Published :
January 06, 2026, 11:05 IST
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क्या अनहेल्दी खाना आपके बच्चों को मोटा करने के साथ-साथ भौंदू भी बना रहा है!
वैज्ञानिकों ने आठ हफ्तों तक बैक्टीरिया के असर को इन बंदरों में देखा, जिसके बाद ये नतीजे जारी किए. इस रिसर्च में सामने आया कि बड़े दिमाग वाले बंदरों (इंसान और गिलहरी बंदर) के बैक्टीरिया ने चूहों के दिमाग में एनर्जी पैदा करने वाले और सीखने वाले जीन्स को सक्रिय कर दिया. जबकि छोटे दिमाग वाले मकाक के बैक्टीरिया वाले चूहों में ADHD और ऑटिज्म से जुड़े लक्षण दिखाई दिए.
आखिर क्यों किया गया ये रिसर्च?इंसानी दिमाग शरीर की बहुत ज्यादा ऊर्जा (Energy) खर्च करता है. वैज्ञानिक यह समझना चाहते थे कि विकास के दौरान इंसानों को इतनी ऊर्जा कहाँ से मिली? क्या आंतों के बैक्टीरिया ने खाना पचाकर दिमाग को वह एक्स्ट्रा पावर दी जिससे हम बुद्धिमान बन सके? साथ ही, वे ऑटिज्म और स्किजोफ्रेनिया जैसी स्थितियों के मूल कारण समझना चाहते थे.
क्या रहे शोध के मुख्य पहलू
आसान शब्दों में कहें तो, हम जो हैं और जैसा सोचते हैं, उसमें सिर्फ हमारी कोशिकाओं का हाथ नहीं है. हमारे अंदर रह रहे खरबों नन्हे बैक्टीरिया एक साइलेंट इंजीनियर की तरह हमारे दिमाग की मरम्मत और डिजाइनिंग कर रहे हैं. अगली बार जब आप कुछ खाएं, तो याद रखें कि आप सिर्फ अपना पेट नहीं, अपने दिमाग का ‘सॉफ्टवेयर’ भी अपडेट कर रहे हैं!
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