चोट से टूटी थीं हड्डियाँ, मगर हिम्मत नहीं… खेलो इंडिया में सिल्वर जीतने वाली गंगा की कहानी दिल हिला देगी!

Last Updated:November 27, 2025, 23:16 IST
Success Story : खेलो इंडिया जूडो प्रतियोगिता में मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय की गंगा थापा ने कठिन संघर्ष के बाद शानदार वापसी कर सिल्वर मेडल जीता और सभी के लिए प्रेरणा बनी हैं.
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उदयपुर. खेलो इंडिया के तहत शहर में आयोजित जूडो प्रतियोगिता इन दिनों खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन की वजह से सुर्खियों में है. राजस्थान की विभिन्न यूनिवर्सिटी के 128 खिलाड़ी इसमें हिस्सा ले रहे हैं, लेकिन इनमें से एक नाम सबसे अधिक चर्चा में है- मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय की बीए सेमेस्टर 5 की छात्रा गंगा थापा. गंगा आज उन खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनी हुई हैं जो कठिन परिस्थितियों के बाद भी अपने सपनों से समझौता नहीं करते.
गंगा थापा की जूडो यात्रा स्कूल के दिनों से शुरू हुई थी. स्कूल में जब एक प्रतियोगिता की तैयारी चल रही थी, तब उन्होंने कुछ छात्राओं को प्रैक्टिस करते देखा. उसी पल उनके मन में इस खेल को सीखने की इच्छा जागी. उन्होंने अपने शिक्षक से जूडो खेलने की बात कही और यहीं से वह सफर शुरू हुआ, जो आगे चलकर उन्हें खेलो इंडिया तक ले आया.
गंगा की संघर्ष यात्रा और चोट से उबरने की कहानीदेखते ही देखते गंगा एक के बाद एक प्रतियोगिताएं जीतने लगीं. उनका प्रदर्शन लगातार बेहतर होता गया और परिवार ने भी हर कदम पर उनका साथ निभाया. लेकिन हालात तब बदल गए जब एक राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के दौरान उन्हें गंभीर चोट लग गई. इस चोट में उनके हाथ और पैर की हड्डी टूट गई. डॉक्टरों ने उन्हें लंबे आराम की सलाह दी, लेकिन गंगा ने हार मानने से इनकार कर दिया.
जुनून और आत्मविश्वास ने संभालाचोट के बाद का समय गंगा के लिए सबसे कठिन दौर था. दर्द, असहाय महसूस करना और खेल से दूर रहना आसान नहीं था, लेकिन उनके जुनून और आत्मविश्वास ने उन्हें फिर संभाला. परिवार के समर्थन ने उन्हें नई मजबूती दी. धीरे-धीरे उन्होंने अपनी ट्रेनिंग फिर शुरू की और मेहनत के दम पर खेलो इंडिया जूडो प्रतियोगिता में शानदार वापसी करते हुए सिल्वर मेडल जीत लिया.
मानसिक शक्ति को मानती हैं सफलता की कुंजीगंगा थापा का कहना है कि कोई भी खेल मुश्किल नहीं होता. शारीरिक क्षमता से अधिक मानसिक शक्ति की जरूरत होती है. अगर परिवार साथ हो और दिल में जीत का जज़्बा हो तो कोई भी लड़की आगे बढ़ सकती है. उन्होंने बताया कि जूडो में सबसे अहम है मानसिक सतर्कता- कौन-सा मूव कब आएगा, इसका अंदाज़ा और फुर्ती. गंगा थापा आज न सिर्फ अपनी यूनिवर्सिटी का प्रतिनिधित्व कर रही हैं, बल्कि उन लड़कियों के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं जो कठिनाइयों में कदम पीछे खींच लेती हैं. उनका संदेश बिल्कुल साफ है- चुनौतियां चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, अगर इरादा मजबूत हो तो मंज़िल जरूर मिलती है.
नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें
नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल… और पढ़ें
Location :
Udaipur,Rajasthan
First Published :
November 27, 2025, 23:16 IST
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चोट से टूटी थीं हड्डियाँ, मगर हिम्मत नहीं… इस खिलाड़ी की कहानी दिल हिला देगी



