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Last Updated:December 08, 2025, 15:21 IST
Jaisalmer Tourist Places: जैसलमेर की यात्रा प्लान कर रहे हैं तो सोनार किले से लेकर सम सैंड ड्यून्स तक कई मंत्रमुग्ध कर देने वाली जगहें आपका दिल जीत लेंगी. गोल्डन सिटी की हवेलियां, थार डेजर्ट की रातें और इतिहास से भरी गलियां यहां की खूबसूरती को और खास बनाती हैं.
महाराजा जैसलसिंह के नाम पर बसी ‘स्वर्ण नगरी’ जैसलमेर थार रेगिस्तान के मध्य में स्थित है. यह शहर शानदार महलों, शांत मंदिरों और भव्य किलों से भरा पड़ा है. जैसलमेर अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और शाश्वत परंपराओं के लिए जाना जाता है. यहां आने वाले पर्यटकों को कई झीलें, जैन पूजा स्थल और भव्य हवेलियां देखने को मिलती हैं. जैसलमेर अपने अनोखे रेगिस्तान सफारी अनुभव के लिए भी प्रसिद्ध है.

सम सैंड ड्यून्स जैसलमेर से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित एक खूबसूरत रेगिस्तानी जगह है. यहां दूर-दूर तक सुनहरी रेत फैली हुई है और यहां की खूबसूरती आपको बेहद पसंद आएगी.

पटवा हवेली पांच जुड़ी हुई हवेलियों का एक सुंदर समूह है जिसे 19वीं शताब्दी में एक व्यापारी गुमान चंद पटवा ने बनवाया था. यह हवेली देखने में बेहद खूबसूरत है और यहां की नक्काशी भी आपको बेहद पसंद आएगी.
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14वीं शताब्दी की गडीसर झील कभी शहर की जीवन रेखा थी जो सूखे रेगिस्तान में पानी उपलब्ध कराती थी. यह झील बेहद ही खूबसूरत है और आपका मन मोह लेगा. यहां सूर्यास्त के समय का नजारा बहुत ही खूबसूरत दिखता है.

कुलधरा गांव अपनी भूतिया कहानियों को लेकर लोगों के बीच खूब प्रचलित है. जैसलमेर से सिर्फ 20 किलोमीटर दूर स्थित यह गांव कई किलोमीटर तक फैला हुआ है. यह गांव बेहद खूबसूरत है और बड़े पैमाने पर लोग इस गांव में घूमने के लिए आते हैं. यहां चारों तरफ सुनसान और बरसों पुरानी कहानी इसी गांव में दफन है.

जैसलमेर किले के अंदर स्थित सात प्राचीन मंदिरों का एक समूह जटिल नक्काशीदार जैन मंदिर हैं. अपनी शानदार दिलवाड़ा शैली की वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध ये मंदिर जैन अनुयायियों का एक प्रमुख तीर्थस्थल हैं और जैसलमेर में घूमने के लिए शीर्ष आध्यात्मिक स्थलों में से एक हैं. बारहवीं शताब्दी में निर्मित ये मंदिर पीले बलुआ पत्थर में उकेरी गई पशु और मानव मूर्तियों से सुसज्जित हैं. सात तीर्थंकरों (जैन साधुओं) रिखबदेव, संभवनाथ, चंद्रप्रभु, पारसनाथ, शीतलनाथ, शांतिनाथ और कुंथुनाथ को समर्पित ये मंदिर सभी आगंतुकों को एक शांत और आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करते हैं.

बड़ा बाग़ का अर्थ है ‘बड़ा बगीचा’ और यह क्षेत्र के प्रसिद्ध शासकों की समाधियों का एक संग्रह है. शहर से सिर्फ़ 5 किलोमीटर दूर स्थित बड़ा बाग़ जैसलमेर में घूमने के लिए एक मनमोहक जगह है. रेगिस्तान में एक बगीचे के पास स्थित ये अवशेष राजस्थान के पौराणिक अतीत के साक्षी हैं.इन समाधियों का निर्माण 17वीं शताब्दी में शुरू हुआ था और पहला समाधि स्थल महाराजा जय सिंह द्वितीय के सम्मान में उनके पुत्र ने बनवाया था.

तनोट माता मंदिर भारत-पाकिस्तान सीमा के पास स्थित है. 1971 में लोंगेवाला युद्ध में दूसरी तरफ से लगभग 3000 बम की भारी गोलाबारी हुई थी लेकिन मंदिर के आसपास कोई भी बम नहीं फटा. मंदिर के अंदर और आसपास के स्थानीय लोग और सैनिक सुरक्षित थे. तब से मंदिर की देखभाल सीमा सुरक्षा बल द्वारा की जाती है और बिना फटे बमों को परिसर में सुरक्षित रखा गया है.
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December 08, 2025, 15:21 IST
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