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वेदांता ग्रुप के चेयरमैन के लिए 7 जनवरी सबसे दुखद दिन, अमेरिका से आई बुरी खबर, दिग्‍गज उद्योगपति के नहीं रुक रहे आंसू

नई दिल्‍ली. वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के लिए 7 जनवरी, 2026 का दिन उनकी जिंदगी का सबसे कठिन दिन साबित हुआ. जब उन्‍हें अमेरिका से अपने 49 साल के बेटे की मौत की खबर मिली. इसकी जानकारी खुद अन‍िल अग्रवाल ने अपने फेसबुक पर साझा की है. उन्‍होंने बताया कि बेटा अपने दोस्‍तों के साथ स्‍कीईंग करने अमेरिका गया था, जहां हार्ट अटैक की वजह से उनका निधन हो गया. खबर आते ही उनके परिवार में शोक की लहर दौड़ गई.

अनिल अग्रवाल ने अपनी फेसबुक पोस्‍ट में लिखा, ‘आज मेरे जीवन का सबसे दर्दनाक दिन है. मेरा अग्निवेश, मेरा 49 साल का बेटा, आज हमारे बीच नहीं रहा. एक बाप के कंधे पर बेटे की अर्थी जाये इससे बुरा और क्या हो सकता है. अग्निवेश अपने दोस्तों के साथ अमेरिका में skiing करने गया था. वहां हादसा हो गया. वो Mount Sinai Hospital, New York में ठीक हो रहा था. हमें लगा सब ठीक हो जाएगा, लेकिन अचानक कार्डियक अरेस्‍ट हो गया और हमारा बच्चा हमें छोड़कर चला गया.’

1976 में हुआ था जन्‍मअनिल अग्रवाल आगे लिखते हैं, ‘3 जून 1976 को पटना में जब अग्नि हमारी दुनिया में आया, वो पल आज भी आंखों के सामने है. एक मिडिल क्‍लास बिहारी परिवार में जन्मा था अग्नि. तुम्हारे साथ बिताया गया हर एक पल आज बहुत याद आ रहा है बेटा. अपनी मां का दुलारा अग्नि बचपन में बेहद चंचल और शरारती था. हमेशा हंसता, हमेशा मुस्कुराता. यारों का यार था वो और अपनी बहन प्रिया को लेकर सबसे प्रोटेक्टिव भी.’

अजमेर से की थी पढ़ाईअग्रवाल ने आगे लिखा, ‘उसने Mayo College, Ajmer में पढ़ाई की. बेहद मजबूत व्‍यक्तित्‍व था अग्नि का. वहबॉक्सिंग चैंपियन, हॉर्स राइडिंग का शौकीन और कमाल का म्‍यूजिशियन था. उसने Fujeirah Gold जैसी शानदार कंपनी खड़ी की और Hindustan Zinc का चेयरमैन भी बना. लेकिन, इन सबसे ऊपर अग्नि बेहद साधारण था. हमेशा अपने दोस्‍तों और सहकर्मियों के बीच में ही रहता था. जिससे भी मिलता, उसे अपना बना लेता था. वो हमेशा जमीन से जुड़ा रहा सीधा, सच्चा, जिंदादिली और इंसानियत से भरा. वो सिर्फ बेटा नहीं था, वो मेरा दोस्त था, मेरी शान था, मेरी पूरी दुनिया था.’

बेटे की मौत से टूट गया परिवारवेदांता के चेयरमैन ने लिखा, ‘मैं और किरन टूट से गए हैं. बस यही सोच रहे हैं कि हमारा बेटा तो चला गया. लेकिन जो लोग हमारे वेदांता में काम करते हैं, वो सब अग्निवेश ही तो हैं. वो सब हमारे बेटे-बेटियां हैं. अग्नि और मेरा सपना था, हिंदुस्तान को आत्मनिर्भर बनाना. वो हमेशा कहता था कि पापा, हमारे देश में क्या नहीं है? फिर हम किसी से पीछे क्यों रहें? हमारी दिली इच्छा यही रही कि देश का कोई बच्चा भूखा न सोए, कोई बच्चा अनपढ़ न रहे, हर महिला अपने पैरों पर खड़ी हो और सभी युवाओं को रोजगार मिले.’

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