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भुवनेश्‍वर के नवोदय विद्यालय में पीलिया का कहर, 54 बच्‍चे संक्रमित, हॉस्‍टल छोड़कर भाग रहे छात्र

ओडिशा के खोरधा स्थित पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय’ (JNV) के गलियारों में इन दिनों पढ़ाई की गूंज नहीं बल्कि बीमारी की दहशत पसरी है. यहां एक-दो नहीं बल्कि 54 छात्र पीलिया (Jaundice) की चपेट में आ चुके हैं, जिससे पूरे कैंपस में हड़कंप मच गया है. हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि खौफ के साये में 200 से अधिक छात्र स्कूल छोड़कर अपने घर लौट चुके हैं. जिस स्कूल को छात्रों के भविष्य संवारने का केंद्र होना था, वह आज संक्रमण की गिरफ्त में है. आरोप लग रहे हैं कि जब पहले छात्र ने अपनी बीमारी की सूचना दी तो प्रशासन ने उसे हल्के में लिया. क्या यह प्रशासनिक अनदेखी थी या दूषित पानी का घातक प्रहार? अब स्वास्थ्य विभाग की टीमें किचन से लेकर पानी की टंकियों तक की खाक छान रही हैं.

तेजी से बढ़ रहा है संक्रमितों का आंकड़ा

भुवनेश्वर के पास खोरधा जिले में स्थित इस विद्यालय में मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने 20 सैंपल लिए थे, जिनमें से 5 और छात्रों में संक्रमण की पुष्टि हुई. इसके साथ ही कुल मरीजों की संख्या 54 तक पहुंच गई है. जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CDMO) डॉ. संजय राय और जन स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रंजन मित्रा ने स्कूल का दौरा किया. उन्होंने किचन, भोजन बनाने के क्षेत्र और भंडारित खाद्य सामग्री का गहन निरीक्षण किया. स्वास्थ्य अधिकारियों को शक है कि दूषित पानी या बाहर से मंगाया गया खाना इस बीमारी की मुख्य वजह हो सकता है.

प्रशासनिक निर्देश और ‘डर’ का माहौल

स्वास्थ्य विभाग ने स्कूल स्टाफ को सख्त निर्देश दिए हैं:

·         खाना बनाने के दौरान ग्लव्स, मास्क और एप्रन का अनिवार्य उपयोग.

·         कैंपस की साफ-सफाई और हाइजीन पर विशेष ध्यान देना.

·         पानी की टंकियों की तत्काल सफाई और क्लोरीनीकरण.

दूसरी ओर, स्कूल के प्रिंसिपल ने अभिभावकों और छात्रों से ‘पैनिक’ न होने की अपील की है. उन्होंने घर जा चुके छात्रों से बिना किसी डर के वापस लौटने का आग्रह किया है. हालांकि, अभिभावक अभी भी डरे हुए हैं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठा रहे हैं.

क्या समय रहते टल सकती थी आफत?

1. शुरुआती लापरवाही का आरोप: संक्रमित छात्रों का दावा है कि बीमारी के शुरुआती लक्षणों की जानकारी देने के बावजूद स्कूल प्रबंधन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया. यदि पहले केस पर ही सख्त एक्शन होता, तो यह संख्या 54 तक नहीं पहुँचती.

2. हाइजीन ऑडिट की कमी: किसी भी आवासीय विद्यालय में भोजन और पानी की गुणवत्ता का साप्ताहिक ऑडिट होना अनिवार्य है. इतनी बड़ी संख्या में पीलिया फैलना सीधे तौर पर स्वच्छता मानकों की विफलता को दर्शाता है.

3. आवासीय शिक्षा पर प्रभाव: 200 छात्रों का अचानक स्कूल छोड़ना न केवल उनकी पढ़ाई को बाधित करता है, बल्कि ‘पीएम श्री’ जैसे प्रतिष्ठित स्कूलों की छवि को भी नुकसान पहुँचाता है.

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