Jeera Ki Kheti | Jeera Farming Nagaur | Cumin Cultivation Rajasthan | Nagaur Famous Village | Jeera Khati Nagaur | Rajasthan Agriculture News

Last Updated:December 30, 2025, 10:46 IST
Jeera Ki Kheti: नागौर जिले का एक गांव जीरे की खाती के लिए पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध है. यहां लगभग हर किसान जीरे की खेती करता है, जो गांव की मुख्य पहचान बन चुकी है. स्थानीय मान्यता है कि यहां उगाया गया जीरा खास खुशबू और स्वाद के कारण अलग पहचान रखता है. पीढ़ियों से चली आ रही यह परंपरा किसानों की आजीविका का मजबूत आधार है और गांव को कृषि क्षेत्र में एक अलग मुकाम दिलाती है.
राजस्थान के नागौर जिले का हिलोड़ी गांव जीरे कि खेती के लिए प्रसिद्ध है. इस गांव में हर किसान जीरे की खेती करता है. यहां जीरे की कई तरह की किसानों की बुवाई होती है. यहां के किसान आधुनिक तकनीक का उपयोग कर ये खेती करते हैं. जीरे की खेती के अलावा यह गांव नीम के पेड़ो के कारण भी चर्चा में रहता है. यहां नीम के पेड़ काटने पर रोक है. अगर कोई ऐसा करता है तो उसे जुर्माना देना पड़ता है.

ग्रामीणों की मान्यता है कि नीम की पत्तियां रोग नाशक होने के साथ-साथ सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक भी हैं. इसके अलावा यहां के किसान नीम की पेड़ की पूजा भी करते हैं. इसी विश्वास के कारण नीम यहां के लोग पवित्र वृक्ष मनाते हैं और इससे अच्छी फसल वये सुख-समृद्धि की कामना की जाती है. नीम यहां केवल पेड़ नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन और परंपरा का अभिन्न हिस्सा है.

इस गांव के छोटे पहाड़ (डूंगरी) की ऊंचाई पर लोकदेवता देवनारायण जी का मंदिर है. यह मंदिर न केवल हिलोड़ी बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक माना जाता है., पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर दूर-दूर से दिखाई देता है और श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए कठिन चढ़ाई भी श्रद्धा के साथ करते हैं. मान्यता है कि इस मन्दिर में पूजा अर्चना करने से ही गांव में जीरे की फसल अच्छी होती है.
Add as Preferred Source on Google

इसी कारण हिलोड़ी गांव में जीरे की खेती प्रमुख रूप से की जाती है. किसान श्रवण के अनुसार गांव में जीरा एक बीघा में 2 से 4 क्विंटल तक उत्पादन देता है, जो सामान्य औसत से कहीं अधिक है. यह लोकदेवता देवनारायण जी की कृपा से होता है. उन्होंने बताया कि की आमतौर एक बीघा में 2 से कम जीरे का उत्पादन होता है. लेकिन इस गांव के किसान इससे अधिक उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं और समृद्ध बन रहे हैं.

इतिहास के अनुसार देवनारायण जी मंदिर का निर्माण दिल्ली के बादशाह की ओर से करवाया गया था, जबकि इसकी नींव दला राम लीलू ने रखी थी. मंदिर से जुड़ा यह ऐतिहासिक तथ्य आज भी ग्रामीणों में गर्व की भावना पैदा करता है. दला राम लीलू के वंशज आज भी रूण क्षेत्र में निवास करते हैं और पीढ़ियों से चली आ रही मंदिर की परंपराओं और धार्मिक व्यवस्थाओं का निर्वहन कर रहे हैं.

हिलोड़ी पंचायत में साल में दो बड़े मेले लगते हैं, जो क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान हैं. ये मेले माघ माह की छठ और भादवा शुक्ल पक्ष की छठ को आयोजित होते हैं. इन अवसरों पर हजारों श्रद्धालु दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं. मेलों के दौरान धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ ग्रामीण संस्कृति, मेल-मिलाप और परंपराओं की झलक भी देखने को मिलती है.
First Published :
December 30, 2025, 10:46 IST
homeagriculture
खेती से पहचान तक! नागौर का वो गांव जहां जीरे की खाती ने बदली किसानों की किस्मत



