jnu Video Kabar Khudegi Slogans| JNU Vivad| jnu controversy: इंदिरा से लेकर मनमोहन तक..अब पीएम मोदी..JNU में कब-कब हुआ प्रधानमंत्रियों का विरोध?

Last Updated:January 07, 2026, 14:58 IST
JNU Slogan controversy, JNU History: देश की चुनिंदा यूनिवर्सिटी में से एक जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) एक बार फिर विवादों में है.इस बार यहां के एक कार्यक्रम में पीएम और गृह मंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगे हैं. सोशल मीडिया पर इसका वीडियो वायरल होने के बाद हंगामा मच गया, लेकिन यह पहली दफा नही है जब जेएनयू ने किसी पीएम का विरोध किया हो या उसके खिलाफ नारेबाजी की हो बल्कि इससे पहले इंदिरा गांधी से लेकर मनमोहन सिंह तक जेएनयू में विरोध होता आया है…
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JNU Violence, SC on Umar Khalid and Sharjeel Imam, jnu Video Kabar Khudegi Slogans: जेएनयू में कब कब हुआ पीएम का विरोध?
JNU Slogan controversy, JNU History: जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) हमेशा से चर्चा के केंद्र में रहा है. यहां के लड़के-लड़कियां सोशल जस्टिस, गवर्नमेंट की गलत नीतियों और समाज की समस्याओं पर अक्सर विरोध प्रदर्शन करते नजर आते हैं. यहां पर कई बार विवादित नारे भी लगे जो देश दुनिया में चर्चा का विषय बन गया. कई बार ये विरोध सीधे प्रधानमंत्री तक पहुंच जाता है और बड़ा हंगामा हो जाता है.आइए जानते हैं कि जेएनयू में कब-कब किस PM का विरोध हुआ और पूरा मामला क्या था?
JNU इंदिरा गांधी के समय: JNU स्टूडेंट्स ने किया विरोध
1975 में इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी लगा दी थी. पूरे देश में बोलने की आजादी छीन ली गई. JNU के स्टूडेंट्स ने इसका सबसे ज्यादा विरोध किया. वो छिप-छिपाकर काम करते थे. हॉस्टल के कमरों में एक्टिविस्ट्स को छुपाते, पुलिस से बचाते और अंडरग्राउंड बुलेटिन छापकर बांटते थे. एक बार एजुकेशन मिनिस्टर के प्रोग्राम में सब स्टूडेंट्स चुपचाप बाहर निकल गए. प्रबीर पुरकायस्थ और प्रकाश करात समेत कई स्टूडेंट्स को जेल भेज दिया गया. वाइस चांसलर ने कई स्टूडेंट्स को सस्पेंड किया. इसको लेकर तीन दिन की हड़ताल भी हुई. ये विरोध इसलिए था क्योंकि इमरजेंसी में लोकतंत्र दबाया जा रहा था. JNU की इसी लड़ाई से उसकी इमेज बनी कि यहां रूलिंग पार्टी को चुनौती देने से कोई नहीं डरता.
2005 में पीएम मनमोहन सिंह का हुआ विरोध
2005 में PM मनमोहन सिंह JNU में जवाहरलाल नेहरू की एक प्रतिमा का अनावरण करने आए थे. तब लेफ्ट-विंग ग्रुप AISA के स्टूडेंट्स ने उनके खिलाफ नारेबाजी की.पुलिस को बीच में आना पड़ा, और NSUI जैसे दूसरे ग्रुप्स भी इसमें शामिल हुए.जेएनयू स्टूडेंट्स का ये विरोध गवर्नमेंट की पॉलिसीज को लेकर था. ये JNU की हिस्ट्री में एक छोटा इंसीडेंट था.
2016 से 2020 तक खूब मचा बवाल
2016 से JNU में सबसे ज्यादा बवाल हुआ. 2016 में शुरू हुआ विवाद सबसे बड़ा था. 9 फरवरी 2016 को कुछ स्टूडेंट्स ने अफजल गुरु की फांसी के खिलाफ प्रोटेस्ट किया. प्रोग्राम कश्मीर की आजादी और ज्यूडिशियल किलिंग पर था. आरोप लगा कि कुछ उपद्रवी आए और भारत तेरे टुकड़े होंगे जैसे नारे लगाने लगे.ABVP ने इसका विरोध किया और शिकायत की. जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने JNUSU प्रेसिडेंट कन्हैया कुमार, उमर खालिद और अनिर्बन भट्टाचार्य को देशद्रोह मामले में अरेस्ट कर लिया. जिसके बाद बवाल मच गया. पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हुए.स्टूडेंटस के लिए हुए प्रोटेस्ट्स में राहुल गांधी और सीताराम येचुरी जैसे लीडर्स भी शामिल हुए. गवर्नमेंट ने इसे एंटी-नेशनल बताया. होम मिनिस्टर राजनाथ सिंह और स्मृति ईरानी ने सख्त बयान दिए. पूरे देश में बवाल मचा, राहुल गांधी और लेफ्ट लीडर्स स्टूडेंट्स के सपोर्ट में आए. बाद में कोर्ट ने बेल दे दी और जांच में पता चला कि विवादित नारे बाहर वालों ने लगाए थे. फिर 2019-2020 में फीस बढ़ोतरी और हॉस्टल रूल्स के खिलाफ लंबी हड़ताल चली. 5 जनवरी 2020 को मास्क पहने कुछ लोग कैंपस में घुसे और स्टूडेंट्स-टीचर्स पर हमला किया. कई लोग घायल हुए. ये CAA-NRC के विरोध से भी जुड़ा था, जहां स्टूडेंट्स मोदी गवर्नमेंट की नीतियों को अल्पसंख्यकों के खिलाफ बता रहे थे.वामदलों ने जेएनयू के कुलपति जगदीश कुमार पर भी कई आरोप लगाए.
अब क्या हुआ: मोदी-शाह के खिलाफ लगे नारे
अभी 6 जनवरी 2026 को JNUSU ने A Night of Resistance नाम से एक कार्यक्रम रखा. ये 2020 के कैंपस हमले की छठी बरसी थी और उमर खालिद-शरजील इमाम जैसे लोगों की बेल रिजेक्ट होने के खिलाफ थी, लेकिन इस दौरान कुछ स्टूडेंट्स ने PM मोदी और होम मिनिस्टर अमित शाह के खिलाफ भद्दे और उत्तेजक नारे लगाए. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा जिसके बाद देश भर में बवाल मच गया.इस मामले को लेकर बीजेपी के कई नेता हमलावर हो गए.उन्होंने इस पर आपत्ति जताई.
पुलिस ने दर्ज की एफआईआर
इस घटना के बाद JNU प्रशासन की ओर से 7 जनवरी को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई जिसके बाद FIR दर्ज हुई.इसमें JNUSU प्रेसिडेंट अदिति मिश्रा समेत कई स्टूडेंट्स को नामजद किया गया. यूनिवर्सिटी की ओर से कहा गया कि इस तरह की घटनाओं से कैंपस का माहौल बिगड़ सकता है.ऐसे में प्रशासन इस पर सख्त कार्रवाई करेगा.यूनिवर्सिटी को लैब ऑफ हेट नहीं बनने दिया जाएगा. इस घटना के बाद BJP के कई मिनिस्टर्स किरेन रिजिजू, पीयूष गोयल, गिरिराज सिंह ने भी आपत्ति जताई. JNUSU का कहना है कि ये उनकी अभिव्यक्ति की आजादी है और असली मुद्दा तो 2020 का हमला और अन्याय है. ये ताजा मामला पुरानी घटनाओं से जुड़ा है- 2016 में उमर खालिद का नाम था. 2020 का हमला याद किया जा रहा था. JNU हमेशा से गवर्नमेंट की नीतियों पर सवाल उठाता रहा है लेकिन विवादित नारेबाजी की वजह से हमेशा विवादों में घिर जाता है. जिसकी वजह से जेएनयू पर हमेशा सवालिया निशान लगाया जाता है.
About the AuthorDhiraj Raiअसिस्टेंट एडिटर
न्यूज़18 हिंदी (Network 18) डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर के तौर पर कार्यरत. न्यूज 18 में एजुकेशन, करियर, सक्सेस स्टोरी की खबरों पर. करीब 15 साल से अधिक मीडिया में सक्रिय. हिन्दुस्तान, दैनिक भास्कर के प्रिंट व …और पढ़ें
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January 07, 2026, 14:57 IST
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इंदिरा से लेकर मनमोहन तक..अब पीएम मोदी..JNU में कब-कब हुआ PM का विरोध?



