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Kali Mata Temple Mystery | Temple Open During Eclipse | Surya Chandra Grahan Temple | Kali Mata Mandir Belief

Last Updated:January 09, 2026, 15:15 IST

Surya Chandra Grahan Mandir: काली माता मंदिर आस्था और रहस्य का अनोखा संगम माना जाता है. जहां अधिकांश मंदिर सूर्य और चंद्र ग्रहण के दौरान बंद रहते हैं, वहीं इस मंदिर के कपाट ग्रहण काल में भी खुले रहते हैं. मान्यता है कि यहां माता काली की विशेष कृपा और शक्ति विद्यमान है, जिसके कारण दर्शन पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जाता. यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और भक्तों की गहरी आस्था का प्रतीक मानी जाती है.

नागौर. नागौर के डीडवाना शहर के भाटीबास स्थित मां काली माता मंदिर अखाड़ा 2 हजार वर्ष से अधिक प्राचीन है. यह सिद्ध शक्ति स्थल नाथ योगियों, तंत्र साधना के सिद्ध संतों व अनेक महात्माओं के चमत्कारों व साधना का केन्द्र रहा हैं. आभानगरी के उद्गम का मुख्य स्त्रोत के रूप में अपने मूल स्थान सिंधी बास के निकट भाटी बास में महायोगी गुरु श्री गोरखनाथ के समय 2 हजार से भी ज्यादा वर्षों पहले स्थापित सिद्ध शक्ति स्थल अनेक महात्माओं के आगमन पर चमत्कारों का केन्द्र रहा हैं.

संत बंजीराम द्वारा गोरखनाथ से उल्टे प्रश्रों के वाद संवाद साबर साधना के प्रभाव से छः माह तक बिना अन्न ग्रहण किए सतत् साधना के प्रमाण हैं. उस संत ने मंदिर परिसर में ही जीवित समाधि ली थी जहां पीपल का वृक्ष आज भी विद्यमान हैं. साबर साधना के माध्यम से ही राजा भृर्तहरि एवं योगी गोपीचंद ने योगी के रूप में मां काली की प्रतिमा से साक्षात रूप में बात की थी. चमत्कारी रूप के चेहरे के आवभाव बदलने वाली आदमकद प्रतिमा के चमत्कार से अभीभूत होकर उन्होंने प्रति बारहवें वर्ष में एक बार यहां आकर दर्शन करने व मत्था टेकने की घोषणा की थी जिसे वे आज भी निभाते हैं.

मानसिक कष्ट हरती है देवी कालीमंदिर की वर्तमान अर्चक पीढ़ी ने 2001 में योगी गोपीचंद भूर्तहरि को सिंह के साथ मंदिर परिसर में देखा हैं. परिसर में अनेक नाम पर बने चबूतरे पर बैठने के बाद अन्तर ध्यान हो गए. योगी मनोहरनाथ ने प्रजापत समाज की माता बृजाबाई द्वारा जल सेवा करने पर वर्ष वि.स. 1826 में संवतः पुत्रवत प्रसाद प्राप्त कर नित्य भिक्षा के रूप में प्रजापत समाज का अन्न ग्रहण करने एवं समाज को सिद्धी प्रदान कर रोग दोषों से मुक्त कर गुरु शिष्य परम्परा का प्रादुर्भाव कर स्थान को गुरुद्वारा के रूप में स्थापित किया. प्रधान अर्चक सोहननाथ योगी बताते है कि दूसरी शताब्दी में माहेश्वरी सेठ द्वारा शक्ति को विचरण करते देखने पर माहेश्वरियों को आशीर्वाद प्रदान करने का विवरण तत्कालीन पंचोली परिवारों की कुलदेवी आदिवृतांतों की किवदतियोंसे पता चलती है.

महाकाली आदियोग परिसर में चल रहा है हवन पूजनव्यवस्थापक सोहननाथ योगी ने बताया कि महाकाली आदियोग स्किल पीठ परिसर में रोजाना हवन पूजन का आयोजन किया जा रहा है. सोहननाथ योगी ने कहा कि हवन पूजन करने से शारीरिक व मानसिक रूप से कष्टों व सभी प्रकार के दुखों का निवारण होता है.

वर्ष 1992 में मंदिर के जीर्णोद्धार के समय मंदिर में जड़ते समय मार्बल के आंगन में लगातार घृत व भभूत का भी निकलना भी एक चमत्कार हैं. इस भभूती को शरीर पर लगाने से रोगों से मुक्ति भी मिला जाना सम्भव हैं. सूर्य ग्रहण व चन्द्रग्रहण के दौरान इस मंदिर के पठ बंद नहीं होते है बल्कि मां के सामने तंत्र साधना से सिद्धी प्राप्त भी की जाती है.

About the AuthorJagriti Dubey

With more than 6 years above of experience in Digital Media Journalism. Currently I am working as a Content Editor at News 18 in Rajasthan Team. Here, I am covering lifestyle, health, beauty, fashion, religion…और पढ़ें

Location :

Nagaur,Rajasthan

First Published :

January 09, 2026, 15:15 IST

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जहां ग्रहण नहीं रोक पाता आस्था! काली माता मंदिर में ग्रहण के दौरान होते दर्शन

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