पंच गौरव योजना में शामिल है धौलपुर का करंज वृक्ष, वन विभाग 50 हजार वृक्ष करेगा तैयार,सालों तक रहता है जीवित!

Last Updated:January 08, 2026, 19:43 IST
राजस्थान सरकार की पंच गौरव योजना के अंतर्गत धौलपुर जिले से कृषि में आलू, खनिज में रेड स्टोन, खेल में हॉकी, पर्यटन में मचकुंड धाम और वनस्पति में करंज के वृक्ष को शामिल किया गया है. करंज के वृक्ष का चयन मिट्टी के कटाव को रोकने, जैविक खेती को बढ़ावा देने और कम पानी में आसानी से उगने की क्षमता के कारण किया गया है. उप वन संरक्षक अधिकारी IFS बी. चेतन कुमार के अनुसार वन विभाग द्वारा इस वर्ष 50 हजार करंज के पौधे तैयार कर वर्षा ऋतु में वितरित किए जाएंगे. करंज का वृक्ष लगभग 50 वर्षों तक जीवित रहता है, नीम जैसी घनी छाया देता है तथा औषधीय, जैव ईंधन और पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी है.
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धौलपुर. राजस्थान सरकार ने पंच गौरव योजना में धौलपुर जिले से कृषि में आलू, खनिज में धौलपुर का रेड स्टोन, खेल में हॉकी, पर्यटन में मचकुंड धाम और वनस्पति में करंज के वृक्ष को शामिल किया है. करंज के वृक्ष को पंच गौरव योजना में इसलिए शामिल किया गया है क्योंकि यह मिट्टी के कटाव को रोकता है, जैविक खेती को बढ़ावा देता है और करंज का वृक्ष आसानी से बड़ा भी हो जाता है.
धौलपुर जिले के उप वन संरक्षक अधिकारी IFS बी. चेतन कुमार ने बताया कि राजस्थान सरकार ने पंच गौरव योजना के अंतर्गत धौलपुर जिले से वनस्पति के रूप में करंज के वृक्ष का चयन किया है. इस वर्ष वन विभाग धौलपुर में करंज के 50 हजार वृक्ष तैयार करने की योजना बना रहा है और इन 50 हजार तैयार करंज के वृक्षों को वर्षा ऋतु में वितरित कर दिया जाएगा.
आसानी से बड़ा हो जाता है यह वृक्ष
IFS बी. चेतन कुमार ने बताया कि राजस्थान सरकार की पंच गौरव योजना में करंज के वृक्ष को इसलिए शामिल किया गया है क्योंकि यह वृक्ष आसानी से बड़ा हो जाता है और इसकी जीवन अवधि लगभग 50 वर्ष होती है. इसकी छाया भी नीम के पेड़ की तरह घनी होती है, यह जैविक खेती, मिट्टी संरक्षण और जैव ईंधन के लिए काफी लाभदायक माना जाता है. करंज का वृक्ष मिट्टी के कटाव को रोकने में भी काफी सहायता करता है और यह वृक्ष धौलपुर की जलवायु के अनुकूल भी माना जाता है. राजस्थान का धौलपुर जिला डांग क्षेत्र में आता है, इसलिए इस वृक्ष को लगाने के लिए ज्यादा पानी देने की आवश्यकता नहीं होती है और इसे आसानी से उगाया जा सकता है.
करंज के वृक्ष का उपयोग औषधि के रूप में भी काफी किया जाता है. इसके पत्ते, बीज और जड़ का उपयोग त्वचा संबंधित बीमारियों, डाइजेशन से संबंधित बीमारियों और कई अन्य प्रकार की बीमारियों की औषधि बनाने में किया जाता है. करंज वृक्ष के बीज से निकाले गए तेल का उपयोग साबुन, लोशन और बायोडीजल बनाने में भी किया जाता है. करंज वृक्ष की पत्तियां कड़वी होती हैं, इसलिए कोई भी जानवर इन्हें खा नहीं सकता है.
About the AuthorMonali Paul
Hello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ें
Location :
Dhaulpur,Rajasthan
First Published :
January 08, 2026, 19:43 IST
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धौलपुर पंच गौरव योजना में करंज वृक्ष चयन से जैविक खेती को बढ़ावा



