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करौली के नेत्रहीन गुरुजी देवेंद्र गोयल: जो आंखों से नहीं, आवाज से बच्चों के भविष्य में रोशनी भर रहे हैं!

Last Updated:November 05, 2025, 19:10 IST

Karauli News Hindi : राजस्थान के करौली में एक नेत्रहीन शिक्षक अपनी आवाज और आत्मविश्वास से शिक्षा की नई मिसाल लिख रहे हैं. सरकारी स्कूल नंबर 8 के देवेंद्र गोयल पिछले 35 सालों से सैकड़ों बच्चों के जीवन में उजाला फैला रहे हैं. आंखों की रोशनी खोने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और ज्ञान को अपना सबसे बड़ा दृष्टिकोण बनाया.करौली

करौली के एक सरकारी स्कूल में हर सुबह जब घंटी बजती है, तो बच्चों के चेहरों पर मुस्कान और गुरुजी की आवाज में आत्मविश्वास गूंजता है. फर्क बस इतना है कि ये सरकारी शिक्षक आंखों से दुनिया नहीं देख सकते, लेकिन अपने ज्ञान और जज्बे से सैकड़ों बच्चों के भविष्य को रोशनी दे रहे हैं.

करौली

करौली शहर के सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय नंबर 8 के नेत्रहीन शिक्षक देवेंद्र गोयल की कहानी प्रेरणा और हौसले का ऐसा उदाहरण है, जो हर किसी को भावुक कर देती है.

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देवेंद्र गोयल 8 साल की उम्र से ही नेत्रहीन हैं, लेकिन उनकी आंखों की रोशनी ना होने के बावजूद भी वह बोलकर अपनी मधुर आवाज से शिक्षा का उजियारा फैला रहे हैं. बचपन से ही इस नेत्रहीन शिक्षक ने परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया. परिवार और समाज की तमाम चुनौतियों को पार करते हुए देवेंद्र गोयल ने उच्च शिक्षा प्राप्त की और आज सरकारी सेवा में एक आदर्श शिक्षक के रूप में कार्य कर रहे हैं.

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शहर के नंबर 8 स्कूल में यह नेत्रहीन शिक्षक जब भी कक्षा में प्रश्न पूछते हैं या बच्चों से पाठ सुनते हैं, तो उनकी आवाज में ऐसा आत्मविश्वास झलकता है कि पूरा वातावरण शिक्षा की ऊर्जा से भर जाता है. इनके द्वारा पढ़ाए गए कई छात्र आज सरकारी सेवाओं और निजी संस्थानों में अच्छे पदों पर भी कार्यरत हैं.

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नेत्रहीन शिक्षक देवेंद्र गोयल का कहना है कि बच्चों के साथ घुल-मिलकर रहना उनका सबसे अच्छा अनुभव है. वे कहते हैं कि एक शिक्षक के रूप में बच्चों के नजदीक रहना सबसे अच्छा कार्य है, क्योंकि इससे ज्ञान बना रहता है.

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नेत्रहीन शिक्षक देवेंद्र गोयल ने बताया कि जब वे 8 साल के थे, तब उन्हें अचानक दिखना बंद हो गया था. बचपन में तो उन्हें दिखाई देता था, लेकिन तीसरी-चौथी कक्षा में अचानक उनकी आंखों की रोशनी चली गई.

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लेकिन कहते हैं ना जहां चाह, वहां राह. आंखों से न देख पाने के बाद भी उन्होंने पढ़ाई नहीं छोड़ी. पढ़ा-लिखा परिवार होने के कारण उन्होंने देहरादून से ब्रेल लिपि के माध्यम से अपनी पढ़ाई जारी रखी. आगे उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने अपना शिक्षक बनने का सपना भी पूरा किया.सरकारी शिक्षा के क्षेत्र में वे पिछले 35 वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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खास बात यह है कि नेत्रहीन होने के बावजूद देवेंद्र गोयल की कक्षा में बच्चे हमेशा शांत और अनुशासन में रहते हैं. वे बताते हैं कि कुछ साल पहले उन्हें स्कूल आने-जाने में काफी कठिनाई होती थी. आंखों से दिखाई नहीं देने के कारण कई बार वे हादसे का शिकार भी हो चुके हैं. लेकिन अब उनकी पत्नी रोजाना उन्हें स्कूल छोड़ने और वापस घर लेने आती हैं.

First Published :

November 05, 2025, 19:10 IST

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करौली के नेत्रहीन शिक्षक देवेंद्र गोयल, जो ज्ञान से रोशन कर रहे भविष्य!

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