सीकर का रहस्यमयी समाधि स्थल! जहां पेड़ काटने वाला हो जाता है अंधा, संत रामराय बाबा का चमत्कारी धाम

Last Updated:November 08, 2025, 20:10 IST
Sikar News Hindi : सीकर जिले के सुरेरा-मंढ़ा के बीच स्थित संत रामराय बाबा का समाधि स्थल आस्था और पर्यावरण संरक्षण का अद्भुत संगम है. जहां सदियों पहले संत ने जीवित समाधि ली थी. यहां न पेड़ काटे जाते हैं, न पत्थर निकाले जाते – मान्यता है कि ऐसा करने वालों को दैवी दंड मिलता है.
सीकर : राजस्थान के सीकर जिले में एक ऐसी जगह है जहां पर सैकड़ों साल पर एक संत ने जिंदा समधी ली थी. आज यह लोगों के लिए आस्था का केंद्र बन चुकी है. यह जगह दांतारामगढ़ उपखंड से दक्षिण दिशा में सुरेरा-मंढ़ा के बीच स्थित है. इस जगह पर संत रामराय बाबा का समाधि स्थल है. यह जगह केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण का भी अद्भुत संगम है. बताया जाता है कि इस समाधि स्थल से कई किलोमीटर तक एक ओरण क्षेत्र बना हुआ है.

स्थानीय निवासी अर्जुन राम ने बताया, यहां दादूपंथी संप्रदाय के संत रायराम बाबा ने विक्रम संवत 1915 में इस जगह जीवित समाधि ली थी. उन्होंने बताया कि पर्वतमाला के बीच स्थित इस तपोस्थली पर बाबा ने वर्षों तक नग्न अवस्था में तपस्या की. वे नरैना (फुलेरा) से यहां आए थे और मलयाली कुएं के पास पीपली के पेड़ तले साधना शुरू की थी. बाद में डूंगरी की चोटी पर दोहड़ा के पेड़ के नीचे 12 वर्षों तक तपस्या की. उनके भोजन की व्यवस्था गोपाललाल जोशी करते थे.

यहां पेड़ लगाए जाते हैं, काटे नहीं जाते हैं. ग्रामीणों के अनुसार एक बार किसी ने पेड़ काटा तो वह अंधा हो गया. तब से यह परंपरा बनी कि डूंगरी में कुल्हाड़ी नहीं चलती. इसके अलावा यहां पशुओं को चराना भी वर्जित है. वहीं, पत्थर की निकासी भी नहीं होती. एक बार किसी ने पत्थर निकाला तो उसकी गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया था. किंवदंती है कि बाबा ने दांता जागीरदार ठाकुर उदयसिंह को चमत्कार दिखाया, जिसके बाद उन्होंने ग्राम मंढ़ा में दो कुएं और जमीन दान दी थी.

आज भी यहां चमत्कारों की कहानियां श्रद्धालुओं को आकर्षित करती हैं. कार्तिक शुक्ला तेरस, चौदस और पूर्णिमा को यहां वार्षिक मेला लगता है. आसपास के गांवों से श्रद्धालु, साधु-संत बड़ी संख्या में दर्शन के लिए आते हैं. इस दिन भजन संध्या आयोजित होती है. यहां पहाड़ पर 1976 में बड़ा होद बनाया गया था जो आज भी वर्षा जल से भरा रहता है. बताया जाता है कि इस क्षेत्र में कभी पानी की कमी नहीं होती है.

अब तक छह महंत यहां सेवा दे चुके हैं. आज भी यहां पर संत महात्मा आकर भगवान की तपस्या करते हैं. वर्तमान में सातवीं पीढ़ी के महंत ओमप्रकाश बाबा पूजा अर्चना का कार्य संभाल रहे हैं. पूर्व में रामराय बाबा, माहीरामदास, नारायणदास, कन्हरदास, चंद्रदास, गणपतदास यहां पूजा अर्चना और तपस्या कर चुके हैं. आपको बता दें कि पहाड़ी पर बने इस समाधि स्थल के आसपास कई जानवरों का आश्रय स्थल है.

यहां पर कई दुर्लभ औषधीय वनस्पति अभी पाई जाती है. मुख्य रूप से यहां नीमगिलोय, अश्वगंधा, गूगल, निनावा, वज्रदंती जट्टरबट्टी, उटपगड़ा, जाल, लेसवा जैसे पेड़ यहां आसानी से देखे जा सकते हैं. इस समाधि स्थल के आसपास का क्षेत्र पूरा हराभरा है. संत रामराय बाबा की इस समाधि स्थल पर राजस्थान भर के लोग आते हैं. इसके अलावा सुरेरा गांव के प्रवासी भी यहां साल में एक बार जरूर आते हैं.
First Published :
November 08, 2025, 20:10 IST
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सीकर का रहस्यमयी धाम! जहां पेड़ काटने वाला हो जाता है अंधा



