बेमौसम बारिश से प्याज की फसल को भारी नुकसान, किसान परेशान

सीकर. जिला मीठे प्याज की खेती के लिए प्रसिद्ध है. यहां उगे प्याज की मांग केवल राजस्थान में ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों में भी है. लेकिन इस सीजन में यहां के किसान प्याज की खेती से मायूस हो गए हैं. इसकी वजह पिछले माह हुई बेमौसम बारिश है, जिससे खेतों में तैयार प्याज की पौध पूरी तरह चौपट हो गई है. कई किसानों की नर्सरी जलभराव से सड़ गई, जिससे अब दोबारा पौध लगानी पड़ रही है.
इसके अलावा प्याज के बीज के भावों में डेढ़ से दो हजार रुपए प्रति किलो तक तेजी आ गई है, कृषि विभाग का अनुमान है कि इस बार जिले में प्याज की बुवाई में 20 से 25 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है. व्यापारियों के अनुसार, जिले में सामान्य वर्षों में करीब 17 से 19 हजार हेक्टेयर में प्याज की बुवाई होती है, लेकिन इस बार यह क्षेत्र घटकर लगभग 15 हजार हेक्टेयर तक रहने की आशंका है. व्यापारियों ने बताया कि मौजूदा भावों को देखते हुए नए प्याज के भावों में तेजी नहीं रही तो किसानों को काफी घाटा उठाना पड़ेगा.
50 हजार से ज्यादा किसान प्रभावित
सीकर जिले में प्याज की खेती से सीधे तौर पर करीब 50 हजार किसान जुड़े हुए हैं, सर्दी के सीजन में प्याज अगस्त माह में बोया जाता है. इस बार रोपाई के बाद बेमौसम की बारिश के कारण कई जगह प्याज की पौध नष्ट हो गई थी. इसके बाद किसानों को प्याज की पौध की दोबारा रोपाई करनी पड़ी, किसानों ने बताया कि शेखावाटी की आबोहवा के अनुसार एक एकड़ प्याज की खेती पर लगभग एक लाख रुपए से ज्यादा की लागत आती है. ऐसे में प्याज की औसत उपज की लागत करीब 16 रुपए प्रति किलो आंकी जाती है. प्याज के पौधे को लगाने, खरपतवार हटाने और कटाई से लेकर कट्टों में पैक करने और मंडी तक लाने में लाखों रुपए खर्च होते हैं.
काफी नुकसान हुआ
किसान रामचंद्र मुंड ने बताया कि सीजन की शुरूआत से प्याज के औसत भाव लागत मूल्य से कम रहे हैं, इससे किसानों को नुकसान हुआ है. सीकर में पिछले दिनों हुई बेमौसम बारिश से अधिकांश जगह प्याज की पौध नष्ट हो गई. इससे प्याज उत्पादकों को नई पौध लगाने के लिए दोबारा खर्च करना पड़ रहा है. इस कारण इस बार जिले में प्याज का बुवाई क्षेत्र अन्य सालों की तुलना में कम रहने के आसार हैं.
सीकर में प्याज उत्पादकों का नुकसान
सीकर जिले में इस बार मौसम की मार से फसलों को भारी नुकसान हुआ है, कई ब्लॉकों में करीब आधी फसल नष्ट हो चुकी है. कृषि विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, जिलेभर में हजारों हेक्टेयर क्षेत्र में पौध खराब हो गई है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है. जानकारी के मुताबिक, सीकर ब्लॉक में इस बार लगभग 7,250 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल बोई गई थी, जिसमें से 3,950 हेक्टेयर क्षेत्र में पौध नष्ट हो गई, यानी करीब 40 प्रतिशत नुकसान हुआ है. इसके अलावा लक्ष्मणगढ़ ब्लॉक में 3,100 हेक्टेयर में बुवाई हुई थी, जिसमें से 2,850 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित रहा, यहां 45 प्रतिशत नुकसान दर्ज किया गया है.
वहीं, नीमकाथाना ब्लॉक की स्थिति और भी खराब है, यहां 4,000 हेक्टेयर में बुवाई हुई थी, जिसमें से 3,750 हेक्टेयर तक की फसल को नुकसान पहुंचा है, जो लगभग 50 प्रतिशत नुकसान है. दांतारामगढ़ ब्लॉक में 3,900 हेक्टेयर में फसल बोई गई, लेकिन 2,700 हेक्टेयर क्षेत्र की पौध नष्ट हो गई, यहां भी करीब 40 प्रतिशत नुकसान हुआ है. श्रीमाधोपुर ब्लॉक में 2,800 हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई के बाद 1,600 हेक्टेयर क्षेत्र में पौध नष्ट हो गई, जबकि खाटूश्यामजी ब्लॉक में 1,700 हेक्टेयर में से 900 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ है, जो कि 50 प्रतिशत नुकसान के बराबर है.



