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Lemon Farming Innovation Using Cow Urine in Rajasthan

Last Updated:October 30, 2025, 10:15 IST

Agriculture Tips: दौसा जिले के किसान गिर्राज प्रसाद मीणा ने अपने नींबू के बगीचे को कीटों से बचाने के लिए गोमूत्र से छिड़काव की देसी और प्रभावी तकनीक अपनाई. 15 लीटर पानी में 1 लीटर गोमूत्र मिलाकर छिड़काव करने से पेड़ स्वस्थ हुए और उत्पादन बढ़ा. यह तकनीक अब जैविक खेती का प्रेरक उदाहरण बन गई है और अन्य किसान भी इसे अपना रहे हैं.

दौसा। राजस्थान के किसान अब पारंपरिक खेती के साथ नवाचार की राह पर भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. इसी क्रम में सिकराय क्षेत्र के किसान गिर्राज प्रसाद मीणा ने अपने नींबू के बगीचे को बचाने के लिए गोमूत्र आधारित प्राकृतिक तकनीक अपनाई है. इस नवाचार ने न केवल उनके खेत को पुनर्जीवित किया, बल्कि अब अन्य किसान भी उनसे प्रेरणा लेकर जैविक खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं.

गिर्राज मीणा पूरी तरह जैविक खेती करते हैं. वे रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग बिल्कुल नहीं करते, जिससे उन्हें पौधों को कीटों से बचाने के लिए प्राकृतिक विकल्प खोजने की जरूरत महसूस हुई. उन्होंने अपने इस प्रयास में गोमूत्र को चुना.

उन्होंने 15 लीटर पानी में 1 लीटर गाय का गोमूत्र मिलाकर नींबू के पेड़ों पर नियमित अंतराल पर छिड़काव किया. इस प्राकृतिक छिड़काव से कुछ ही दिनों में पेड़ों पर लगे कीड़े-मकोड़े और जाले पूरी तरह समाप्त हो गए, जिससे नींबू के पेड़ों को नई जिंदगी मिली.

गोमूत्र बना प्राकृतिक कीटनाशकमीणा का कहना है कि यह देसी प्रयोग उन्होंने लगातार कई वर्षों तक किया और इसके परिणाम बेहद प्रभावशाली रहे हैं. गोमूत्र के छिड़काव के बाद नींबू के पेड़ न केवल हरे-भरे बने रहे, बल्कि उनकी उत्पादन क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई.

गोमूत्र में कई ऐसे प्राकृतिक तत्व होते हैं जो कीटों के लिए हानिकारक होते हैं, जबकि पौधों और मिट्टी के लिए पोषक होते हैं. अब वे इस सफल तकनीक को अन्य किसानों के साथ साझा कर रहे हैं. कई किसानों ने इसे अपनाकर रासायनिक खर्च में कमी और बेहतर, शुद्ध उत्पादन का लाभ पाया है.

कब और कैसे करें छिड़कावकिसान मीणा बताते हैं कि गोमूत्र छिड़काव का सबसे उपयुक्त समय सुबह 7 से 10 बजे और शाम 5 बजे से रात तक है, जब धूप की तीव्रता कम हो. वे कहते हैं कि सर्दियों में इसका असर सबसे अधिक देखा गया है, क्योंकि इस दौरान कीड़े पेड़ों पर निष्क्रिय रहते हैं और गोमूत्र के प्रभाव से आसानी से खत्म हो जाते हैं. छिड़काव के लिए मिश्रण का अनुपात 15:1 (पानी: गोमूत्र) रखना महत्वपूर्ण है.

पर्यावरण संरक्षण में योगदानमीणा का यह नवाचार अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है. वे कहते हैं कि गोमूत्र एक शक्तिशाली प्राकृतिक कीटनाशक है, जिससे फसलें सुरक्षित रहती हैं, मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और पर्यावरण को भी लाभ होता है. रासायनिक खेती से दूरी बनाकर अब कई किसान इस तकनीक को अपनाकर जैविक खेती की ओर मजबूती से बढ़ रहे हैं, जिससे स्वस्थ फसल और शुद्ध वातावरण की दिशा में एक सकारात्मक बदलाव आ रहा है.

Location :

Dausa,Dausa,Rajasthan

First Published :

October 30, 2025, 10:12 IST

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कीटों ने नींबू के पेड़ों पर किया हमला, किसान ने ‘गोमूत्र छिड़काव’ से दिखाया…

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