देश के कई शहरों में तेंदुए का आतंक: पुणे, उत्तराखंड और जयपुर में दहशत– 55 स्कूल ऑनलाइनल

एयरपोर्ट पर लगातार दिखा तेंदुआ
28 अप्रैल 2025: पुणे एयरपोर्ट पर पहली बार तेंदुए को देखा गया – सुबह और शाम दो बार. यह पूर्ण विकसित नर तेंदुआ था. वन अधिकारियों ने बताया कि यह बेहद बुद्धिमान है और पिंजरों से बचकर निकल जाता है. एयरपोर्ट इसके टेरिटरी का हिस्सा बन गया है.
19 नवंबर 2025: एयरपोर्ट पर बे नंबर 9 और टैक्सी लिंक K4 के पास दो बार साइटिंग – सुबह 5:30 बजे और शाम 7:40 बजे. वन विभाग ने एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) और इंडियन एयर फोर्स (IAF) को चेतावनी जारी की.
25 नवंबर 2025: एयरपोर्ट स्टाफ ने सुबह फिर तेंदुआ देखा. वन विभाग ने 8 कैमरा ट्रैप लगाए. पहले 3 ट्रैप कैमरे लगे थे, लेकिन उनमें कुछ नहीं आया. अब 5 और जोड़े गए.
6-8 दिसंबर 2025: इंडिगो फ्लाइट्स के कैंसिलेशन की वजह से एयरपोर्ट पर कम ट्रैफिक. शांत माहौल में तेंदुए को ट्रैप कैमरों में कैद किया गया. वन अधिकारी मानते हैं कि यह पकड़ने का सबसे अच्छा मौका है. असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स मंगेश ताते ने कहा, “तेंदुआ स्टॉर्मवाटर ड्रेन से आता-जाता है. यह एयरपोर्ट को अपनी टेरिटरी मानता है.”
केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने 25 नवंबर को विशेष तकनीक के इस्तेमाल का निर्देश दिया – नाइट-विजन इक्विपमेंट, थर्मल इमेजिंग डिवाइस और सेंसर्स. उन्होंने कहा कि सुरक्षा की वजह से स्थायी CCTV नहीं लगा सकते, लेकिन अस्थायी कैमरे लगाए जा सकते हैं.
आवासीय इलाकों में भी दहशत
23 नवंबर 2025: औंध में RBI कॉलोनी और सिंध सोसायटी में साइटिंग. पगमार्क्स और बाल सैंपल मिले.
30 नवंबर 2025: बावधान में होटल डी पैलेस और NDA-पाशान रोड पर साइटिंग. वीडियो वेरिफाई किया गया.
1 दिसंबर 2025: बावधान वन उद्यान के पास साइटिंग.
5 दिसंबर 2025: पाशान-सुतारवाड़ी में साइटिंग.
हेल्पलाइन पर कॉल्स की बाढ़
पुणे वन विभाग की हेल्पलाइन 1926 पर रोज 40 कॉल्स आ रही हैं, जबकि पहले हफ्ते में सिर्फ 8-10 कॉल्स आती थीं. रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर मनोज बारबोले ने बताया, “90% कॉल्स गलत या AI से बनाए गए फोटो-वीडियो की हैं. हर रिपोर्ट चेक करनी पड़ती है.” डिप्टी कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स महादेव मोहिते ने कहा कि व्हाट्सएप फॉरवर्ड सबसे बड़ी समस्या है. पुलिस से मदद मांगी गई है ताकि गलत सूचना फैलाने वालों पर कार्रवाई हो सके.
उत्तराखंड: पहाड़ों पर तेंदुओं का कहर, 55 स्कूल ऑनलाइन
उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में तेंदुए का मुद्दा सबसे गंभीर रूप ले चुका है. यहां तेंदुए सिर्फ दिख ही नहीं रहे, बल्कि दिनदहाड़े हमले भी कर रहे हैं.
गजल्ड गांव में जानलेवा हमला
4 दिसंबर 2025: पौड़ी विकास खंड के गजल्ड गांव में सुबह 6:30 बजे 45 वर्षीय राजेंद्र नौटियाल पर तेंदुए ने हमला किया. मौके पर ही मौत हो गई. गुस्साए ग्रामीणों ने वन विभाग के एक अधिकारी को बंधक बना लिया और तेंदुए को गोली मारने की अनुमति मांगी.
जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया, स्थानीय विधायक राजकुमार पोरी और अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे. चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन ने तेंदुए को गोली मारने की अनुमति दी और शूटर तैनात किया गया. जिलाधिकारी ने परिवार से मुलाकात की और पूरे सहयोग का आश्वासन दिया.
55 स्कूल ऑनलाइन, लॉकडाउन जैसा माहौल
4-8 दिसंबर 2025: गजल्ड गांव में हमले के बाद शिक्षा विभाग ने बड़ा, चारधार और धंधारी BEO सर्कल के 55 स्कूलों को ऑनलाइन करने का आदेश दिया. शुक्रवार और शनिवार को स्कूल, आंगनवाड़ी केंद्र बंद रखे गए. ग्रामीण सुरेश सिंह रावत ने कहा, “ऐसा लग रहा है जैसे फिर से कोविड का लॉकडाउन हो. लेकिन इस बार खतरा वायरस नहीं, दिनदहाड़े घूमने वाला शिकारी है.”
आसपास के सिरोली गांव में भी तेंदुआ देखा गया. वन विभाग ने सर्च ऑपरेशन तेज किए, लेकिन तेंदुआ अभी तक पकड़ में नहीं आया.
उत्तराखंड में हर महीने 8 हमले
उत्तराखंड वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 25 सालों (2000-2025) में राज्य में तेंदुओं के 2,683 हमले हुए, जिनमें 547 मौतें और 2,126 लोग घायल हुए. मतलब हर महीने औसतन 8 से ज्यादा हमले. सिर्फ 2025 में अब तक 438 वन्यजीव हमले हुए, जिनमें 44 मौतें और 394 घायल हुए हैं.
पौड़ी गढ़वाल और अल्मोड़ा सबसे ज्यादा प्रभावित जिले हैं. टिटली ट्रस्ट की 2021-22 की रिपोर्ट के अनुसार, “उत्तराखंड में कोई भी महीना ऐसा नहीं जाता जब तेंदुए, बाघ, हाथी या अन्य वन्यजीवों के हमले न हों. तेंदुए के हमले सबसे ज्यादा और सबसे गंभीर हैं.”
चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स रंजन मिश्रा ने कहा कि संवेदनशील इलाकों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, लेकिन स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण है. ‘लिविंग विद लियोपार्ड्स’ प्रोग्राम पौड़ी में विफल रहा है.
जयपुर: हाई-सिक्योरिटी इलाकों में घुसे तेंदुए
राजस्थान की राजधानी जयपुर में भी तेंदुओं की साइटिंग बढ़ी है. जालाना लियोपार्ड सफारी से सटे आवासीय इलाकों में तेंदुए बार-बार दिख रहे हैं.
सिविल लाइंस में खलबली
20 नवंबर 2025: जयपुर के सबसे हाई-सिक्योरिटी इलाके सिविल लाइंस में सुबह 9 बजे तेंदुआ दिखा. यह पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बंगले नंबर 11 के सामने से गुजरा, फिर जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत के सरकारी बंगले में घुसा. राजभवन, मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री के आवास भी आसपास हैं.
तेंदुआ फिर टाइनी ब्लॉसम सीनियर सेकेंडरी स्कूल के कैंपस में भाग गया. पुलिस, वन विभाग और ट्रैंक्विलाइजर टीम पहुंची. दो घंटे से ज्यादा मशक्कत के बाद लेन नंबर 6 के एक घर में दोपहर 11 बजे तेंदुए को ट्रैंक्विलाइज किया गया. 30 से ज्यादा अधिकारी मौजूद थे. तेंदुए को जालाना रिजर्व ले जाया गया.
विद्याधर नगर में बछड़ा मारा
26 नवंबर 2025: विद्याधर नगर सेक्टर 10 में मंगलवार देर रात तेंदुआ घुसा. बुधवार तड़के बछड़े को मार दिया. सुबह लोगों ने मंदिर के बगीचे में बछड़े का शव देखा और तुरंत वन विभाग को सूचित किया. स्थानीय लोगों ने बताया, “रात 2 बजे कुत्ते जोर से भौंक रहे थे. बाहर देखा तो सब सामान्य लगा. सुबह पता चला कि तेंदुए ने बछड़े को मार दिया था.”
ताजा पगमार्क्स मिले. यह सिविल लाइंस घटना के सिर्फ 6 दिन बाद था. विद्याधर नगर में पहले भी तेंदुए दिखे हैं – जून में सेक्टर 8 की छतों पर और दिसंबर 2024 में सेंट्रल गवर्नमेंट गेस्ट हाउस में.
शास्त्री नगर और बजाज नगर में भी साइटिंग
27 नवंबर 2025: शास्त्री नगर में साइटिंग.
27-28 नवंबर 2025: चांदपोल बाजार के पास नेहरू नगर, पानीपेच और सीकर हाउस इलाके में तेंदुआ देखा गया. CCTV फुटेज में छतों पर दौड़ता और सड़क पार करता दिखा. 4 किलोमीटर तक घनी आबादी वाली गलियों में घूमा. गुरुवार देर रात कुरैशी कॉलोनी में सरोज सिनेमा हॉल से 20 मीटर दूर एक घर के गैराज में घुसा. घर के मालिक मोहम्मद साबिर ने तुरंत शटर बंद कर वन विभाग को सूचित किया. देर से पहुंची टीम ने 90 मिनट बाद तेंदुए को ट्रैंक्विलाइज किया.
7 दिसंबर 2025: बजाज नगर के AG कॉलोनी में शनिवार शाम CCTV में तेंदुआ दिखा. रविवार को लोगों ने फुटेज देखी और वन विभाग को सूचित किया. अनीता कॉलोनी, सरस्वती मार्ग और AG कॉलोनी में कई बार देखा गया.
चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन की टीम सक्रिय
चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन के.सी. अरुण प्रसाद के नेतृत्व में क्विक रिस्पांस टीम बनाई गई. रेंजर टीम का नेतृत्व जितेंद्र सिंह शेखावत कर रहे हैं. आधुनिक ट्रैकिंग टूल्स, ग्राउंड सर्विलांस और नागरिकों की रिपोर्ट्स के आधार पर तेंदुए की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है.
वन विभाग की कवायद
पुणे में:
15 ट्रैप कैमरे लगाए गए3 टनल-स्टाइल पिंजरे कैज लगाए गएएयरपोर्ट और वन रेंज के अधिकारी, RESQ संगठन और इंडियन एयर फोर्स मिलकर काम कर रहे हैंनाइट-विजन और थर्मल इमेजिंग डिवाइस का इस्तेमाल
उत्तराखंड में:
मैन-ईटर घोषित करने के बाद शूटर तैनात55 स्कूल ऑनलाइन शिफ्टपिंजरे और कैमरे लगाए गएलेकिन तेंदुआ अभी पकड़ में नहीं आया
जयपुर में:
क्विक रिस्पांस टीम गठितआधुनिक ट्रैकिंग टूल्स का इस्तेमाल24×7 निगरानीनागरिकों से सहयोग मांगा गयाआम लोगों के लिए सावधानियां



