धौलपुर रियासत के संस्थापक महाराज कीरत सिंह

Last Updated:January 11, 2026, 08:57 IST
Dholpur History: महाराज राना कीरत सिंह ने 1805 में धौलपुर की जाट रियासत की स्थापना की और शेरगढ़ दुर्ग को अपनी पहली राजधानी बनाया. गोहद के किले को खोने के बाद उन्होंने बेहद सीमित संसाधनों के साथ धौलपुर की नींव रखी. उन्होंने 1811 में कीर्ति नगर (पुरानी छावनी) बसाया और मचकुंड धाम में जगन्नाथ मंदिर की नींव रखी. अपनी वीरता के साथ-साथ वे अपनी परोपकारी छवि के लिए भी जाने जाते थे. 1835 में उनके देहांत के बाद मचकुंड में उनकी याद में छतरी बनाई गई.
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Dholpur History: धौलपुर के इतिहास में जाट नरेशों का युग स्वर्णिम और वीरतापूर्ण रहा है. धौलपुर को एक स्वतंत्र जाट रियासत के रूप में पहचान तब मिली. जब महाराज राना कीरत सिंह ने 1805 में चंबल के बीहड़ों के मध्य स्थित शेरगढ़ किले को अपनी राजधानी बनाया. धौलपुर आने से पूर्व राना कीरत सिंह गोहद के शासक थे. ग्वालियर के सिंधिया शासकों के साथ लंबे संघर्ष के बाद 1805 में ईस्ट इंडिया कंपनी और तत्कालीन गवर्नर जनरल सर जॉर्ज बार्लो के साथ हुए समझौते के तहत उन्हें धौलपुर. बाड़ी और राजाखेड़ा जैसे परगने मिले. जिसके बाद धौलपुर रियासत की सुदृढ़ नींव रखी गई.
इतिहासकार अरविंद शर्मा के अनुसार. जब महाराज राना कीरत सिंह ने गोहद छोड़ा. तब उनके पास बहुत ही सीमित संसाधन थे. वे अपने साथ मात्र 57 सरदार. 150 पैदल सैनिक. 50 घुड़सवार. 10 टेंट और 27 तोपें लेकर धौलपुर के शेरगढ़ दुर्ग पहुँचे थे. 1805 से लेकर 1811 तक उन्होंने चंबल के घने बीहड़ों में स्थित इसी शेरगढ़ दुर्ग से शासन का संचालन किया. यह किला अपनी भौगोलिक स्थिति और मजबूती के कारण सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण था.
कीर्ति नगर का निर्माण और दूसरी राजधानी
1811 में महाराज राना कीरत सिंह ने धौलपुर शहर से 3 किलोमीटर दूर ‘कीर्ति नगर’ की स्थापना की. यहाँ उन्होंने धौलपुर के प्रसिद्ध लाल और सफेद बलुआ पत्थरों से भव्य महलों का निर्माण करवाया. वर्तमान में इसी क्षेत्र को ‘पुरानी छावनी’ के नाम से जाना जाता है. कीर्ति नगर में उन्होंने भगवान श्री राम और हनुमान जी के भव्य मंदिरों का निर्माण करवाया और सुरक्षा हेतु मंदिरों के चारों तरफ गहरी खाइयों का निर्माण भी कराया था.
धार्मिक और सैन्य योगदान
महाराज कीरत सिंह केवल कुशल योद्धा ही नहीं. बल्कि धार्मिक प्रवृत्ति के शासक भी थे. उन्होंने पवित्र मचकुंड धाम में जगन्नाथ मंदिर की नींव रखी. जिसे बाद में उनके पुत्र महाराज भगवंत सिंह ने पूर्ण करवाया. सुरक्षा की दृष्टि से उन्होंने एक अद्वितीय ‘हुंकार तोप’ का निर्माण करवाया था. जिसका मुख सिंह (शेर) की आकृति जैसा था. यह तोप धौलपुर की सैन्य शक्ति का प्रतीक मानी जाती थी.
परोपकारी और दयालु शासक
राना कीरत सिंह अपनी प्रजा के प्रति अत्यंत विनम्र और दयालु थे. कहा जाता है कि उनके राज्य में कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं सोता था. वे स्वयं ढोलक बजाकर यह सूचित करवाते थे कि यदि कोई व्यक्ति भूखा है. तो वह महलों में आकर भोजन कर सकता है. उस समय धौलपुर रियासत की वार्षिक आय लगभग ₹9 लाख थी. 1835 में महाराज का निधन हुआ और उनका अंतिम संस्कार मचकुंड धाम पर किया गया. जहाँ आज भी उनकी भव्य छतरी बनी हुई है.
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Vicky Rathore is a multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience in digital media, social media management, video production, editing, content writing, and graphic, A MAJMC gra…और पढ़ें
Location :
Dhaulpur,Dhaulpur,Rajasthan
First Published :
January 11, 2026, 08:57 IST
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57 सरदारों और 27 तोपों से शुरू हुआ था धौलपुर का इतिहास, बीहड़ों के बीच सजी….



