Rajasthan

मेजर शैतान सिंह की वीरगाथा: Rezang La Battle Hero Story

Last Updated:December 03, 2025, 10:50 IST

Rezang La Battle Hero Story: 1962 के भारत–चीन युद्ध में मेजर शैतान सिंह भाटी ने लद्दाख के रेजांग ला पर अपनी कंपनी के 120 जवानों के साथ 2000 चीनी सैनिकों का सामना किया और अंतिम सांस तक लड़ाई लड़ी. उन्होंने अपनी बहादुरी से 1300 से अधिक दुश्मनों को ढेर किया. उनकी अदम्य बहादुरी और सर्वोच्च बलिदान के लिए उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र मिला.

Rezang La Battle Hero Story: भारत की वीर भूमि राजस्थान ने अनेक शूरवीर पैदा किए हैं, जिनकी गाथाएं इतिहास के पन्नों में स्वर्णाक्षरों से दर्ज हैं. इन्हीं अमर वीरों में शामिल हैं परमवीर चक्र (Param Vir Chakra) से सम्मानित मेजर शैतान सिंह भाटी, जिन्होंने 1962 के भारत–चीन युद्ध में रेजांग ला की बर्फीली ऊंचाइयों पर शौर्य का ऐसा इतिहास रचा, जिसे दुनिया आज भी श्रद्धा से याद करती है. उनकी बहादुरी ने यह साबित किया कि संख्या बल नहीं, बल्कि साहस और नेतृत्व ही युद्ध का परिणाम तय करते हैं.

1 दिसंबर 1924 को जोधपुर में जन्मे मेजर शैतान सिंह के पिता हेम सिंह भी सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल थे और प्रथम विश्व युद्ध के योद्धा रहे थे. इस प्रकार, अनुशासन, राष्ट्रप्रेम और बहादुरी उन्हें विरासत में मिली.

करियर: 1949 में वे जोधपुर स्टेट फोर्स में शामिल हुए और बाद में कुमाऊं रेजिमेंट का हिस्सा बने.
अन्य अभियान: नागा हिल्स ऑपरेशन और गोवा मुक्ति जैसे अभियानों में भी उन्होंने अद्भुत साहस का परिचय दिया, जिससे उनकी छवि एक निडर और कुशल सेनानी की बन गई थी.

18 नवंबर 1962: वह सुबह जिसने एक किंवदंती को जन्म दियालद्दाख का रेजांग ला, जिसकी ऊंचाई लगभग 16,000 फीट है और तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे था. इन्हीं अमानवीय परिस्थितियों में 13 कुमाऊं रेजिमेंट की चार्ली कंपनी, जिसकी कमान मेजर शैतान सिंह के हाथ में थी, हजारों चीनी सैनिकों से भिड़ी.

पहला हमला: सुबह 5 बजे दुश्मन घाटियों के रास्ते आगे बढ़ा और भारतीय जवानों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर पहली लहर को वहीं ढेर कर दिया.
नेतृत्व: लेकिन हमला रुकने वाला नहीं था. चीनी सेना ने आर्टिलरी और मोर्टार का भारी गोलाबारी की. इस भयावह हमले के बावजूद, मेजर शैतान सिंह अपनी जान की परवाह न करते हुए पोस्ट से पोस्ट दौड़ते हुए अपने जवानों को प्रेरित करते रहे.
अंतिम संदेश: उनका एक ही संदेश था — “पीछे मत हटना. आज रेजांग ला देश को देख रहा है.”

आखिरी गोली, आखिरी सांस तक लड़ाईचीनी सैनिकों की संख्या 2000 से अधिक थी, जबकि मेजर शैतान सिंह के पास मात्र 120 जवान थे. इस भीषण असमान लड़ाई में लड़ते हुए उन्हें गोलियां लगीं, और उनका शरीर लहूलुहान हो गया.

त्याग: सूबेदार रामचंदर यादव उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाना चाहते थे, लेकिन मेजर ने मना कर दिया. उन्होंने कहा — “मुझे यहीं छोड़ दो… मेरे जवान लड़ते रहें.”
शहादत: उन्हें एक बर्फीली चट्टान के पीछे लिटाया गया, और वहीं उन्होंने आखिरी सांस ली, पर हार नहीं मानी.
अदम्य शौर्य: युद्ध समाप्त होने पर पता चला कि केवल 120 भारतीय सैनिकों ने अपनी अंतिम सांस तक लड़ाई लड़ी और 1300 से अधिक चीनी सैनिकों को मार गिराया था. इस लड़ाई में 114 भारतीय वीरगति को प्राप्त हुए.

बर्फ में मिला पार्थिव शरीरमेजर शैतान सिंह की वीरता और कर्तव्यनिष्ठा इतनी महान थी कि उनका पार्थिव शरीर तीन महीने बाद बर्फ के नीचे उसी मुद्रा में मिला, जैसे वह अब भी मोर्चा संभाले हुए हों. उनकी अदम्य बहादुरी और सर्वोच्च बलिदान के लिए उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया.

फिल्म में भी अमर हुई कहानीउनकी वीरता पर आधारित फिल्म ‘120 बहादुर’ में फरहान अख्तर ने उनकी भूमिका निभाई. यह फिल्म रेजांग ला की उस लड़ाई की सजीव गाथा बताती है, जिसमें भारतीय जवानों का अदम्य साहस ही सबसे बड़ा हथियार था.

Location :

Sikar,Sikar,Rajasthan

First Published :

December 03, 2025, 10:48 IST

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रेजांग ला के अमर योद्धा मेजर शैतान सिंह भाटी: बर्फ में भी आग की तरह लड़ी….

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