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जोधपुर: टेबल टेनिस की बढ़ती लोकप्रियता और प्रतियोगिता की तेज़ रफ्तार के बीच, रैकेट टेस्टिंग आज इस खेल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू बन चुकी है. खिलाड़ियों की सुरक्षा और खेल में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए इंटरनेशनल टेबल टेनिस फेडरेशन (ITTF) ने सख्त मानक तय किए हैं। इस विषय पर भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण, लखनऊ से जुड़े अंतरराष्ट्रीय रैकेट कंट्रोलर अमित कुमार सिंह ने लोकल 18 से खास बातचीत में बताया कि खिलाड़ी और टूर्नामेंट की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रैकेट का परीक्षण कितनी सावधानी से किया जाता है.
अमित कुमार सिंह के अनुसार, रैकेट टेस्टिंग की शुरुआत सबसे पहले रैकेट की सतह से होती है। “सबसे पहले हम रैकेट के कवरिंग को देखते हैं कि कहीं कट तो नहीं है। कट नहीं होने के बाद उसकी फ्लैटनेस, यानी सतह की समता और थिकनेस जाँची जाती है। इसके बाद रबर और चिपकाने वाले ब्लू या फ़ोन जैसे पदार्थों में किसी प्रकार की हानिकारक गैस मौजूद तो नहीं है, इसकी भी जांच होती है.
खिलाड़ी को टूर्नामेंट में खेलने की अनुमति दी जाएइसके लिए विशेष इक्विपमेंट का उपयोग किया जाता है, जो रैकेट की प्लेटनेस, थिकनेस और रबर की सुरक्षा मापने में सक्षम होता है। सभी माप डेटा को लैपटॉप पर बने प्रोग्राम में डाला जाता है. नियमों के अनुसार, कुल थिकनेस 4.10 मिमी से कम होनी चाहिए. अगर रैकेट इस सीमा से ऊपर या नीचे होती है, तो उसका उपयोग टूर्नामेंट में खेलने के लिए योग्य नहीं माना जाता. रेफरी को रिपोर्ट भेजी जाती है और वे तय करते हैं कि खिलाड़ी को टूर्नामेंट में खेलने की अनुमति दी जाए या नहीं.
रैकेट टेस्टिंग के मानकतीन साल में लगातार यदि किसी खिलाड़ी का रैकेट फेल होता है, तो होस्ट असोसिएशन उसे दो साल के लिए बैन कर सकती है। इस प्रक्रिया में दुनिया में केवल चार रैकेट कंट्रोलर ही सक्रिय हैं.हाल ही में चीन और साउथ कोरिया में आयोजित मुख्य टूर्नामेंट में भी अमित कुमार सिंह ने रैकेट कंट्रोलिंग का काम किया. एशियन चैंपियनशिप भुवनेश्वर में अनऑफिशियल रैकेट कंट्रोल के दौरान वर्ल्ड नंबर सात खिलाड़ी युबिन का रैकेट भी अवैध पाया गया.
रैकेट टेस्टिंग: सुरक्षा और निष्पक्षता की गारंटीअमित कुमार सिंह ने कहा कि पहले बहुत कम टूर्नामेंट में रैकेट टेस्टिंग होती थी, लेकिन अब हर प्रमुख टूर्नामेंट में इसकी डिमांड बढ़ती जा रही है.2026 में भी वह चार-पांच देशों के टूर्नामेंट में रैकेट कंट्रोलिंग करने के लिए जाएंगे. इस तरह, रैकेट टेस्टिंग न केवल खिलाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है, बल्कि खेल की निष्पक्षता और प्रतिस्पर्धा की गुणवत्ता भी बनाए रखती है.
खिलाड़ियों के लिए विशेष चेतावनीखिलाड़ियों को चाहिए कि वे इन सभी मानकों और मापदंडों का विशेष ध्यान रखें। रैकेट में कट, फ्लैटनेस, थिकनेस या हानिकारक गैस जैसी किसी भी अनियमितता को अनदेखा करना भारी पड़ सकता है.यदि खिलाड़ी इन नियमों का पालन नहीं करते, तो उन्हें टूर्नामेंट से बाहर कर दिया जा सकता है और दो साल के लिए प्रतिबंध भी लगाया जा सकता है. इसलिए हर खिलाड़ी को रैकेट की नियमित जांच और सुरक्षा मानकों पर पूरी सतर्कता बरतनी चाहिए



