Mandi Masjid Row: बड़े प्रदर्शन की तैयारी में हिंदू संगठन, उससे पहले मुस्लिम सुमदाय ने खुद ही तोड़ा डाला मस्जिद में अवैध निर्माण

मंडी. हिमाचल प्रदेश के शिमला के संजौली में मस्जिव में अवैध निर्माण के बाद मंडी में भी कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है. यहां पर शुक्रवार को हिंदू संगठनों ने बड़ी प्रदर्शन की तैयारी कर रखी है. हालांकि, इससे एक दिन पहले, गुरुवार को ही मुस्लिम समुदाय ने मंडी शहर के जेल रोड़ में बनी मस्जिद में हुए अवैध निर्माण को तोड़ना शुरू कर दिया.
यहां पर जिस मस्जिद के अवैध निर्माण को लेकर हिंदू संगठनों ने दो दिन पूर्व मंडी में विरोध प्रदर्शन किया था, उसपर कार्रवाई करते हुए प्रशासन के आदेशों के बाद मुस्लिम समाज से जुड़े लोगों ने अवैध निर्माण को गिराने का काम खुद ही शुरू कर दिया है. गुरुवार शाम करीब चार बजे मुस्लिम समाज के लोगों ने अवैध निर्माण को गिराने का कार्य शुरू कर दिया. इस दौरान पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा और किसी प्रकार की विघ्न बाधा उत्पन्न नहीं हुई.
मंडी में मस्जिद को लेकर आज बड़े प्रदर्शन की तैयारी है.
जेल रोड़ मस्जिद कमेटी के सदस्य इकबाल अली ने कमेटी की तरफ से मीडिया में अपना पक्ष रखा और कहा कि अवैध निर्माण को तोड़ने का कार्य किसी भी दबाव में नहीं किया जा रहा है. अवैध निर्माण को लेकर विभाग के अधिकारियों ने मौके पर निशानदेही की थी और जो ढांचा अवैध पाया गया था, उसे तोड़ने के आदेश दिए थे. प्रशासन के इन्हीं आदेशों का पालन करते हुए इस ढांचे को तोड़ा जा रहा है. जहां तक पीडब्ल्यूडी की जमीन आती है, वहां तक जो भी निर्माण हुआ है, उसे तोड़ा जा रहा है. बाकी मस्जिद निजी भूमि पर बनी है.
मुस्लिम समुदाय ने मंडी शहर के जेल रोड़ में बनी मस्जिद में हुए अवैध निर्माण को तोड़ना शुरू कर दिया.
इकबाल अली ने कहा कि यह काम इसलिए भी किया जा रहा है, ताकि आपसी भाईचारा और सौहार्द बना रहे. प्रशासन के जो भी आदेश प्राप्त हुए हैं, उनका पालन किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि शिमला में मस्जिद को लेकर जो विवाद चल रहा है इनका उससे कोई लेना-देना नहीं है और वहां पर जो कुछ हो रहा है उस आधार पर मंडी की कार्रवाई का कोई नाता नहीं है.
नक्शे के लिए किया था आवेदन, नहीं मिली एनओसी
इकबाल अली ने बताया कि अक्तूबर 2023 में मस्जिद के नक्शे की अनुमति के लिए नगर निगम के पास आवेदन किया गया था. उस वक्त पीडब्ल्यूडी की एनओसी के बारे में पता नहीं था, तब तक अधिकतर निर्माण किया जा चुका था. 6 महीनों बाद इस बारे में पता चला. उसके पहले इस संदर्भ में कोई जानकारी नहीं थी. लेकिन अब जो भी आदेश प्रशासन की तरफ से प्राप्त हुए हैं, उनका पालन किया जा रहा है.
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FIRST PUBLISHED : September 13, 2024, 07:08 IST