Rajasthan

Medicinal Plants of Aravalli & Tribal Faith in Bhakhar Dev

Last Updated:December 21, 2025, 08:48 IST

#SaveAravali: अरावली पर्वत श्रृंखला, जो 2.5 अरब साल पुरानी है, औषधीय पौधों का समृद्ध स्रोत और आदिवासियों के लिए ‘भाखर देव’ के रूप में पूजनीय है. सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में 100 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली पहाड़ियों को ही अरावली का हिस्सा मानने की नई परिभाषा दी है, जिससे अवैध खनन पर लगाम लगेगी. हालांकि, इस परिभाषा को लेकर स्थानीय आदिवासियों और पर्यावरणविदों में चिंता है, क्योंकि वे इन पर्वतों को अपनी आध्यात्मिक और प्राकृतिक विरासत मानते हैं.

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देव, दवा और धरती की आख़िरी दीवार: 2.5 से 3.5 अरब साल पुरानी अरावली पर टिकी....अरावली की पहाड़ियों में छुपा है औषधियों का भंडार. अरावली पर्वत श्रृंखला को ‘भाखर देव’ मानते हैं आदिवासी.

#SaveAravali: अरावली पर्वत शृंखला भारत की सबसे पुरानी पर्वत शृंखला है, जो राजस्थान, गुजरात, हरियाणा और दिल्ली में लगभग 692 किलोमीटर (उत्तर-पूर्व) तक फैली हुई है. यह दुनिया की सबसे प्राचीन पर्वत श्रेणियों में से एक है, जिसकी आयु 2.5 अरब साल से भी अधिक मानी जाती है. यह शृंखला अपने विविध वनस्पतियों और औषधीय पौधों के लिए विश्व विख्यात है. अरावली की कंदराओं में पाए जाने वाले अनगिनत औषधीय पौधे आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति का मुख्य आधार हैं. यहाँ की जड़ी-बूटियां असाध्य बीमारियों के इलाज में रामबाण साबित होती हैं, जिससे यह क्षेत्र आयुर्वेद के लिए किसी प्राकृतिक अस्पताल से कम नहीं है.

आदिवासी आस्था और ‘भाखर देव’ का संरक्षणसिरोही जिले में अरावली पर्वत श्रृंखला का महत्व केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि गहरा आध्यात्मिक भी है. यहाँ के आदिवासी समाज के लिए ये पर्वत ‘भाखर देवता’ के रूप में पूजनीय हैं. सिरोही में इसे ‘आबू राज’ के नाम से भी जाना जाता है. आदिकाल से ही आदिवासी समुदाय इन पर्वतों की गोद में निवास कर रहा है और वे इसे अपना रक्षक मानते हैं. आदिवासियों का प्रथम उद्देश्य पर्यावरण का संरक्षण करना है, क्योंकि वे शुद्ध जलवायु और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व को भली-भांति समझते हैं. उनके लिए अरावली का विनाश उनके देवता के अपमान के समान है.

सुप्रीम कोर्ट का फैसला और नई परिभाषाअरावली के संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण परिभाषा को मंजूरी दी है. कोर्ट के अनुसार, अब 100 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली पहाड़ियों को ही ‘अरावली’ का हिस्सा माना जाएगा. इस फैसले का उद्देश्य क्षेत्र में अवैध खनन पर पूरी तरह से रोक लगाना है. हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा वैध खानों में नियमों के तहत काम जारी रह सकता है. शीर्ष अदालत ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को यह भी निर्देश दिया है कि यदि आवश्यक लगे, तो अरावली रेंज के प्रत्येक जिले के लिए अलग से ‘मैनेजमेंट प्लान’ तैयार किया जाए.

चिंता का विषय और भविष्य की चुनौतियांकोर्ट के इस फरमान और अरावली की नई परिभाषा को लेकर पर्यावरणविदों और स्थानीय समुदायों में चिंता का विषय बना हुआ है. विशेषज्ञों का मानना है कि 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों को परिभाषा से बाहर रखने से पारिस्थितिक तंत्र को नुकसान पहुँच सकता है. अरावली न केवल औषधियों का भंडार है, बल्कि यह थार रेगिस्तान के विस्तार को रोकने वाली एक अभेद्य दीवार भी है. यदि इन पहाड़ियों का संरक्षण प्रभावित हुआ, तो इसका सीधा असर पश्चिमी भारत की जलवायु और जल स्तर पर पड़ेगा.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore is a multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience in digital media, social media management, video production, editing, content writing, and graphic, A MAJMC gra…और पढ़ें

Location :

Sirohi,Sirohi,Rajasthan

First Published :

December 21, 2025, 08:48 IST

homerajasthan

देव, दवा और धरती की आख़िरी दीवार: 2.5 से 3.5 अरब साल पुरानी अरावली पर टिकी….

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