मेरठ का देसी गुड़ बिक्री में टॉप

Dausa: सर्दी बढ़ते ही देसी गुड़ की मांग तेज. सर्दी का मौसम शुरू होते ही लोगों की खानपान आदतों में बड़ा बदलाव देखने को मिलता है. ठंड बढ़ते ही लोग परंपरागत और सेहतवर्धक चीजों की ओर लौटते हैं, जिनमें देसी गुड़ सबसे पसंदीदा है. इसी बीच मेरठ से आने वाला देसी गुड़ राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों में खूब धूम मचा रहा है. सिकंदरा क्षेत्र और नेशनल हाईवे-21 पर बैलगाड़ियों पर सजाकर रखा गया गुड़ खरीदारों को खूब आकर्षित कर रहा है. इसकी वजह इसकी शुद्धता और परंपरागत स्वाद है.
मेरठ से 4 महीने के लिए आता है गुड़ बेचने का दल
संवाददाता पुष्पेंद्र मीना ने मेरठ से आए युवक शकील से बातचीत की. शकील पिछले पाँच वर्षों से बैलगाड़ी पर गुड़ लाकर सिकंदरा और आसपास के कस्बों में बिक्री करते हैं. वे बताते हैं कि मेरठ के गन्ने के खेतों के पास बने परंपरागत कोल्हू और डेहरियों (गुड़ भट्ठियों) से सीधे गुड़ तैयार करवाकर लाया जाता है. यही कारण है कि उनके गुड़ में किसी प्रकार की मिलावट नहीं होती और उसकी शुद्धता ही उसकी सबसे बड़ी पहचान बन चुकी है. यह दल हर साल चार महीने के लिए यहां आता है.
चार वैरायटी के गुड़ की भारी मांग
शकील के अनुसार, मेरठ का गुड़ चार वैरायटी में मिलता है:
सादा गुड़ – 60 रुपये प्रति किलो
शक्कर गुड़ – 80 रुपये प्रति किलो
खजूर गुड़ – 100 रुपये प्रति किलो
ड्राई फ्रूट गुड़ – 150 रुपये प्रति किलो
इनमें सबसे ज्यादा बिक्री सादा गुड़ की होती है, जिसे लोग घर के उपयोग के लिए खरीदते हैं. पशुपालक किसान भी बड़ी मात्रा में यही गुड़ खरीदते हैं, क्योंकि यह पशुओं के लिए भी पौष्टिक माना जाता है. कई ग्राहक एक बार में 25–30 किलो तक गुड़ ले जाते हैं, ताकि वे पूरी सर्दी इसका उपयोग कर सकें.
क्यों है मेरठ का गुड़ इतना लोकप्रिय?
शकील बताते हैं कि गुड़ पूरी तरह प्राकृतिक पद्धति से बनाया जाता है. गन्ने का रस निकालकर लोहे के कढ़ाहों में पकाया जाता है, फिर उसे प्राकृतिक तरीके से साफ किया जाता है. रस गाढ़ा होने पर उसे मोल्ड में डालकर गुड़ का रूप दिया जाता है. प्रक्रिया में किसी भी प्रकार के रसायन या कृत्रिम पदार्थ का उपयोग नहीं होता. सर्दियों में गुड़ शरीर को गर्मी देने, पाचन को बेहतर करने और खून साफ करने में मददगार माना जाता है. इसी वजह से ग्रामीण और शहरी—दोनों क्षेत्रों में गुड़ की मांग लगातार बढ़ रही है.
सर्दी शुरू होते ही लोग करते हैं इंतजार
मेरठ के युवा हर साल जयपुर, दौसा, बांदीकुई, अलवर, करौली और भरतपुर सहित कई जगहों पर गुड़ की बैलगाड़ी लगाते हैं. उनकी पहचान इतनी मजबूत हो चुकी है कि सर्दी शुरू होते ही लोग इंतजार करने लगते हैं कि “मेरठ का गुड़” कब पहुंचेगा.



