एसी बस चला रहे हैं? जानें लें जरूरी नियम और मानक, थोड़ी सी चूक पड़ सकती है भारी

जयपुर. राजस्थान के जैसलमेर में 14 अक्टूबर को एक प्राइवेट एसी स्लीपर बस में शॉर्ट सर्किट से लगी आग ने 21 लोगों की जिंदगी छीन ली, जिसमें तीन बच्चे शामिल थे. बस जोधपुर जा रही थी, जब पीछे से धुआं निकला और आग तेजी से फैल गई. बस के फ्रंट में आग लगने से निकास अवरुद्ध होने के साथ दरवाजा जाम हो गया और लाल-गर्म धातु ने रेस्क्यू को चार घंटे लेट कर दिया. 15 घायल गंभीर हैं, जिन्हें जोधपुर रेफर किया गया. यह बस मात्र पांच दिन पहले बिना उचित सेफ्टी चेक के नॉन-एसी से एसी में कन्वर्ट की गई थी,
इस हृदयविदारक घटना ने एसी बसों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं. केंद्र के मोटर व्हीकल एक्ट और राज्य परिवहन विभाग के दिशानिर्देशों के तहत फायर सेफ्टी मानक सख्त हैं. इनका पालन न करने पर लाइसेंस रद्द हो सकता है. जैसलमेर हादसे ने सबक दिया कि कन्वर्शन के बाद इलेक्ट्रिकल चेक और निकास सुविधाएं कितनी महत्वपूर्ण हैं. आइए जानें प्रमुख नियम, जो ऐसी त्रासदियों को रोक सकते हैं.
एसी बस में फायर सेफ्टी के लिए नियम और मानक
फायर एक्सटिंग्विशर: बस में एक ड्राइवर के पास और एक बस के बीच में कम से कम दो अलग-अलग प्रकार के फायर एक्सटिंग्विशर होने चाहिए, क्योंकि हर तरह की आग को बुझाने के लिए एक ही तरह का एक्सटिंग्विशर काम नहीं आता. हर छह महीने में इनकी जांच भी होनी चाहिए.
अलार्म सिस्टम: धुआं और आग का अलार्म होना चाहिए, जिससे आपातकाल की स्थिति में यात्रियों को तुरंत सूचना मिल सके और वे सुरक्षित तरीके से बाहर निकल सकें.
आपात निकास: बस में कम से कम दो आपातकालीन दरवाजे और खिड़कियां होनी चाहिए. साथ ही दरवाजे और खिड़कियां आसानी से खुलने योग्य हों. शटर या जंजीरों से फंसने वाले रास्ते नहीं होने चाहिए.
प्रशिक्षण: चालक और स्टाफ को फायर सेफ्टी और आपातकालीन निकासी का प्रशिक्षण अनिवार्य होना चाहिए. इसमें आग बुझाने और यात्रियों को सुरक्षित तरीके से बाहर निकालने की प्रक्रिया का नियमित अभ्यास शामिल होना चाहिए.
संकेतक: आपातकालीन निकास के पास स्पष्ट संकेत और निर्देश होने चाहिए. यात्रियों को पता होना चाहिए कि निकास कहां है.
विशेष सुविधाएं: सर्विस गेट के पास दिव्यांग यात्रियों के लिए आरक्षित सीट होनी चाहिए. सभी विंडो में टफन ग्लास हो जिससे आसानी से कांच टूट सके और विंडो और इमरजेंसी गेट के पास हथौड़ा होना जरूरी है.
जांच: बसों की नियमित चैकिंग हो. फिटनेस जांच हो, जिससे पता चल सके कि नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं. साथ ही वार्षिक फायर ऑडिट अनिवार्य है. कन्वर्टेड बसों की वायरिंग-ईंधन टैंक सघन जांच करना जरूरी है.



