दूध, पेस्ट्री या आइसक्रीम? शुगर बोर्ड ने बताया किस चीज में कितना ‘जहर’! पैरेंट्स के उड़ गए होश

Last Updated:December 04, 2025, 20:20 IST
अलवर के स्कूलों में शुगर बोर्ड लगाए जा रहे हैं, जिससे बच्चों को चीनी के नुकसान और संतुलित खानपान के बारे में जागरूक किया जा सके. राजेश अग्रवाल और डॉ. रूप सिंह सक्रिय हैं.
अलवर. शुगर आज बच्चों और बड़ों दोनों के लिए गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है. बच्चों की डाइट में चीनी की बढ़ती मात्रा उनके स्वास्थ्य को गहराई से प्रभावित कर रही है. इसी को ध्यान में रखते हुए सीबीएसई बोर्ड और भारत सरकार की गाइडलाइन के तहत स्कूलों में शुगर बोर्ड लगाए जा रहे हैं ताकि छात्रों को चीनी के नुकसान और संतुलित खान-पान के बारे में जागरूक किया जा सके. यह प्रयास इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि छोटे बच्चों में शुगर से जुड़ी समस्याएं तेज़ी से बढ़ रही हैं और अभिभावकों और शिक्षकों को इसके प्रति सजग होकर कदम उठाने की जरूरत है.
रेडक्रॉस सोसाइटी के डॉ. रूप सिंह बताते हैं कि पोषण और न्यूट्रिशन की सही जानकारी होना आज पहले से कहीं ज़्यादा ज़रूरी हो गया है. रोटरी क्लब भिवाड़ी के अध्यक्ष राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में शहर के विभिन्न स्कूलों में शुगर बोर्ड लगाने का अभियान चलाया जा रहा है. इसका उद्देश्य बच्चों और शिक्षकों को यह समझाना है कि वे क्या खा रहे हैं और उस भोजन में कितनी शुगर मौजूद है. डॉ. सिंह का कहना है कि स्कूली बच्चों में मोटापे की दर 50 प्रतिशत से भी ज्यादा पहुंच चुकी है, जो आने वाले समय में गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है.
शुगर बोर्ड क्यों ज़रूरी हैडॉ. रूप सिंह बताते हैं कि बच्चों द्वारा रोजमर्रा के जिन खाद्य पदार्थों का सेवन किया जाता है उनमें शुगर की मात्रा बहुत अधिक होती है. उदाहरण के तौर पर एक कोल्ड ड्रिंक में लगभग 6 चम्मच चीनी होती है. एक पेस्ट्री में लगभग 11 चम्मच चीनी पाई जाती है. एक आइसक्रीम में 8 से 10 चम्मच तक चीनी होती है. कम उम्र में इतनी अधिक मात्रा में चीनी का सेवन आगे चलकर मोटापा, डायबिटीज और मेटाबॉलिक सिंड्रोम जैसी बीमारियों की वजह बन सकता है. इसलिए स्कूलों में लगाए जा रहे शुगर बोर्ड बच्चों को सजग करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं.
कौन-सा फूड कितना सही हैशुगर बोर्ड में भोजन को तीन कैटेगरी में बांटा गया है. रेड कैटेगरी में कोल्ड ड्रिंक, पिज्जा, पास्ता जैसे खाद्य पदार्थ शामिल हैं जिनमें शुगर, फैट और साल्ट की मात्रा बहुत ज्यादा होती है. येलो कैटेगरी में पोहा, दलिया, खिचड़ी जैसे हल्के भोजन शामिल हैं जिनका सेवन सीमित मात्रा में किया जा सकता है. ग्रीन कैटेगरी में हरी सब्जियां, पत्तेदार सब्जियां, फल और अंकुरित अनाज जैसे नैचुरल फूड शामिल हैं जिनका सेवन अधिक करना चाहिए. साथ ही बच्चों को यह सलाह भी दी जा रही है कि पैकेज्ड फूड का सेवन कम से कम करें और यदि करना पड़े तो महीने में एक या दो बार ही खाएं.
About the AuthorAnand Pandey
नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें
Location :
Alwar,Rajasthan
First Published :
December 04, 2025, 20:20 IST
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दूध, पेस्ट्री या आइसक्रीम? शुगर बोर्ड ने बताया किस चीज में कितना ‘जहर’!



