Rajasthan

सीकर में पक्षियों का मेला: हर्ष-रैवासा में 300 से अधिक प्रजातियां

Last Updated:January 05, 2026, 11:21 IST

Sikar News: सीकर का हर्ष-रैवासा क्षेत्र पक्षियों का बड़ा हॉटस्पॉट बन गया है. यहाँ 300 से अधिक देशी-विदेशी प्रजातियों के पक्षी पहुंचे हैं, जिनमें मैक्वीन बस्टर्ड जैसे दुर्लभ परिंदे शामिल हैं. अरावली की पहाड़ियां और रैवासा का ग्रासलैंड इनका मुख्य ठिकाना बना हुआ है.पक्षी

सीकर में पक्षी प्रेमियों के लिए नया हॉटस्पॉट बनी रैवासा झील राजस्थान का सीकर जिला अब विदेशी मेहमान पक्षियों के लिए सांभर झील के बाद एक बड़े हॉटस्पॉट के रूप में उभर रहा है. हर्ष पर्वत की चट्टानी अरावली पहाड़ियों से सटे रैवासा झील और उसके आसपास के आर्द्र व घास के मैदानों (वेटलैंड और ग्रासलैंड) में बड़ी संख्या में विदेशी पक्षी डेरा डाल रहे हैं. यहाँ का शांत वातावरण और अनुकूल परिस्थितियां देशी और विदेशी पक्षियों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं, जिससे यह क्षेत्र जैव-विविधता का केंद्र बनता जा रहा है.

यहां अब तक स्थानीय और प्रवासी मिलाकर 300 से अधिक प्रजातियों के पक्षी देखे जा चुके हैं. इनमें मैक्वीन बस्टर्ड (तिलोर), तुर्किस्तान शॉर्ट-टो लार्क, यूरोपियन बी-ईटर, शॉर्ट-इयर्ड आउल, वाटर पिपिट और नॉर्दन लेपविंग जैसी दुर्लभ प्रजातियां भी शामिल हैं. ये दुर्लभ प्रजातियों के पक्षी बहुत कम जगह पर देखने के लिए मिलते हैं.

रैवासा झील और उसके आसपास के ग्रासलैंड अब पक्षी विशेषज्ञों के लिए शोध का केंद्र बनते जा रहे हैं. यहाँ की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इस क्षेत्र में स्थानीय और प्रवासी पक्षियों की 300 से अधिक प्रजातियां दर्ज की जा चुकी हैं. दुर्लभ प्रजातियों का नया बसेरा रैवासा के वेटलैंड में कई ऐसे पक्षी देखे जा रहे हैं जो दुनिया भर में बहुत दुर्लभ माने जाते हैं. इनमें मैक्वीन बस्टर्ड (तिलोर), तुर्किस्तान शॉर्ट-टो लार्क, यूरोपियन बी-ईटर, शॉर्ट-इयर्ड आउल, वाटर पिपिट और नॉर्दन लेपविंग जैसी प्रजातियां शामिल हैं. ये पक्षी आमतौर पर बहुत कम स्थानों पर दिखाई देते हैं, लेकिन रैवासा का पारिस्थितिकी तंत्र इनके अनुकूल होने के कारण यहाँ इनकी मौजूदगी पक्षी प्रेमियों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी हुई है.

खास बात यह है कि तुर्किस्तान शॉर्ट-टो लार्क जैसी दुर्लभतम प्रजाति के पक्षी भी यहां रिकॉर्ड में दर्ज हो चुके है. यही वजह है कि अब हर साल 50 से ज्यादा देशी व विदेशी पक्षी प्रेमी और पर्यटक हर्ष-रैवासा क्षेत्र में बर्ड वॉचिंग के लिए पहुंच रहे हैं. पक्षी विशेषज्ञ निर्मल सिंह के अनुसार हर्ष व रैवासा क्षेत्र में सुदूर उत्तरी गोलार्द्ध, मध्य एशिया, युरेशिया और अफ्रीका से हजारों किलोमीटर का सफर तय कर प्रवासी पक्षी पहुंच रहे हैं.

रैवासा क्षेत्र की जैव-विविधता इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिला रही है. यहाँ की सबसे खास बात तुर्किस्तान शॉर्ट-टो लार्क जैसी दुर्लभतम प्रजाति के पक्षियों की मौजूदगी है, जिनका रिकॉर्ड में दर्ज होना वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए बड़ी उपलब्धि है. हर्ष-रैवासा क्षेत्र में बढ़ रहा बर्ड वॉचिंग पर्यटन पक्षी विशेषज्ञ निर्मल सिंह के अनुसार, यहाँ सुदूर उत्तरी गोलार्द्ध, मध्य एशिया, युरेशिया और अफ्रीका जैसे देशों से हजारों किलोमीटर का सफर तय कर प्रवासी पक्षी पहुँच रहे हैं. इन दुर्लभ पक्षियों को देखने के लिए अब हर साल 50 से ज्यादा देशी और विदेशी पक्षी प्रेमी व पर्यटक विशेष रूप से हर्ष-रैवासा क्षेत्र का रुख कर रहे हैं. यह बढ़ती संख्या दर्शाती है कि सीकर का यह इलाका भविष्य में इको-टूरिज्म का एक बड़ा केंद्र बन सकता है.

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उन्होंने बताया कि, सर्दियों में करीब 125 प्रजातियां, गर्मियों में 25 से अधिक प्रजातियां, जबकि 150 से ज्यादा स्थानीय प्रजातियां पूरे साल यहां निवास करती है. सर्दियों में पहुंच रहे ये पक्षी शीतकालीन प्रवास के दौरान ब्लैक स्टॉर्क, नॉर्दन लेपविंग, ग्रेलैंग गूज, बार-हेडेड गुज, नॉर्दन शॉवलर, नॉर्दन पिंटेल, ग्रीन-विंग्ड टील, कॉमन पॉचार्ड, हैरियर, केस्ट्रल, व्हीटियर और गॉडविट सहित 125 से अधिक प्रजातियों के पक्षी रैवासा ग्रासलैंड में देखे जा रहे हैं.

पक्षी विशेषज्ञ निर्मल सिंह के अनुसार, रैवासा का पारिस्थितिकी तंत्र साल के हर मौसम में पक्षियों को आश्रय प्रदान करता है. यहाँ पक्षियों की उपस्थिति का गणित कुछ इस प्रकार है. रैवासा में पक्षियों का वार्षिक कैलेंडर यहाँ पूरे साल लगभग 150 स्थानीय प्रजातियां निवास करती हैं. गर्मियों के मौसम में करीब 25 प्रजातियां देखी जाती हैं, जबकि सर्दियों का समय सबसे खास होता है, जब करीब 125 से अधिक प्रवासी प्रजातियां यहाँ अपना डेरा डालती हैं. शीतकालीन मेहमानों की लंबी फेहरिस्त वर्तमान में शीतकालीन प्रवास के दौरान रैवासा ग्रासलैंड में पक्षियों की भारी आवक देखी जा रही है. यहाँ ब्लैक स्टॉर्क, नॉर्दन लेपविंग, ग्रेलैंग गूज, बार-हेडेड गुज, नॉर्दन शॉवलर, नॉर्दन पिंटेल, ग्रीन-विंग्ड टील, कॉमन पॉचार्ड, हैरियर, केस्ट्रल, व्हीटियर और गॉडविट जैसी प्रजातियां आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं. ये पक्षी हजारों मील की यात्रा कर यहाँ के वेटलैंड और ग्रासलैंड में सर्दियाँ बिताने पहुँचते हैं.

विदेशी पक्षी

हर्ष की पहाड़ियों में पेरेग्रिन फाल्कन, अल्पाइन स्विफ्ट और टाइगा फ्लायकैचर जैसे पक्षी हजारों किलोमीटर की दूरी तय करके पहुँच रहे हैं. पक्षी विशेषज्ञ निर्मल सिंह के मुताबिक, यहाँ केवल सर्दियों में ही नहीं बल्कि गर्मियों में भी विदेशी पक्षियों का जमावड़ा रहता है. ग्रीष्मकाल के दौरान अफ्रीका और दक्षिण भारत जैसे क्षेत्रों से कॉमन कुकू, चातक (पाइड कुकू), पिट्टा नवरंग और तिब्बती सैंड प्लोवर सहित 25 से अधिक प्रजातियों के पक्षी प्रवास के लिए यहाँ आते हैं.

विदेशी पक्षी

पक्षी विशेषज्ञ निर्मल सिंह ने बताया कि पक्षी केवल सौंदर्य का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि कीट नियंत्रण, बीज प्रसार और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में उनकी अहम भूमिका होती है. अरावली में पक्षियों की विविधता इस क्षेत्र की स्वस्थ पारिस्थितिकी का संकेत है. अरावली की इन वादियों में व्हाइट-नेप्ड टिट, स्पॉटेड क्रीपर, इंडियन रोलर (लीलटास), मार्शल आयोरा, नॉब-बिल्ड डक, कॉलर डव, आइबिस, स्टिल्ट, ग्रे श्रइक और रेड-वॉटल्ड लैपविंग जैसी 150 से अधिक स्थानीय प्रजातियों की चहचहाट सालभर सुनाई देती है.

First Published :

January 05, 2026, 11:21 IST

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हर्ष-रैवासा में 300 से अधिक प्रजातियों का जमावड़ा, सात समंदर पार से आए मेहमान

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