Rajasthan

First Calendar of Mewar: मेवाड़ का पहला कैलेंडर यहीं हुआ था तैयार, 1881 से इतिहास संभाले खड़ा है ये मुद्रणालय

Last Updated:September 30, 2026, 12:08 IST

First Calendar of Mewar: उदयपुर का महाराणा सज्जन सिंह राजकीय मुद्रणालय 1881 से मेवाड़ के इतिहास को संजोए हुए है. इसी ऐतिहासिक प्रेस में मेवाड़ का पहला कैलेंडर छापा गया था. कभी यहां राजकीय दस्तावेज, आदेश और जरूरी सूचनाएं तैयार होती थी, आज यह पुराना मुद्रणालय मेवाड़ की प्रशासनिक व्यवस्था और प्रिंटिंग तकनीक के गौरवशाली दौर की कहानी सुनाता है.

उदयपुर. शहर में कई ऐसी ऐतिहासिक इमारतें हैं, जिनके बारे में शहर में रहने वाले बहुत से लोगों को भी शायद जानकारी नहीं होगी.ऐसी ही एक खास जगह है. महाराणा सज्जन सिंह राजकीय मुद्रणालय, जहां कभी मेवाड़ के कई महत्वपूर्ण राजकीय काम हुआ करते थे. यही वह जगह है जहां मेवाड़ का पहला कैलेंडर भी छापा गया था. करीब डेढ़ सौ साल पुराना यह मुद्रणालय आज भी अपने इतिहास को समेटे हुए है. इस राजकीय मुद्रणालय की स्थापना साल 1881 में महाराणा सज्जन सिंह के समय हुई थी. उस दौर में आज की तरह हर जानकारी कंप्यूटर और डिजिटल माध्यम से तैयार नहीं होती थी. सरकारी दस्तावेज, आदेश, सूचनाएं और दूसरी जरूरी सामग्री तैयार करने के लिए प्रिंटिंग प्रेस का ही इस्तेमाल किया जाता था. ऐसे में इस मुद्रणालय की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हुआ करती थी.

इतिहासविद् कौशल मूंदड़ा बताते हैं कि महाराणा सज्जन सिंह के समय उदयपुर में कई तरह के प्रशासनिक कामों को व्यवस्थित करने की कोशिश की जा रही थी. इसी दौर में राजकीय मुद्रणालय की शुरुआत हुई, यहां मेवाड़ राज्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों और राजकीय सामग्री को छापने का काम किया जाता था. बताया जाता है कि इसी मुद्रणालय में मेवाड़ का पहला कैलेंडर भी छापा गया था. उस समय कैलेंडर सिर्फ तारीख देखने का साधन नहीं था, बल्कि इसमें पंचांग, महत्वपूर्ण तिथियों और अलग-अलग जानकारियों को भी शामिल किया जाता था. राजकीय स्तर पर तैयार होने वाली ऐसी सामग्री उस समय लोगों तक जानकारी पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम थी. मुद्रणालय में सिर्फ कैलेंडर ही नहीं, बल्कि अलग-अलग तरह के राजकीय कागजात, आदेश, सूचनाएं और प्रशासन से जुड़ी सामग्री भी तैयार की जाती थी.

उस समय किसी भी सरकारी काम को लिखित रूप में लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रिंटिंग प्रेस की बड़ी जरूरत होती थी, इसलिए यह जगह मेवाड़ की प्रशासनिक व्यवस्था का भी एक अहम हिस्सा रही. आज जब प्रिंटिंग का काम पूरी तरह आधुनिक तकनीक और डिजिटल मशीनों के दौर में पहुंच चुका है, ऐसे में इस पुराने मुद्रणालय का इतिहास हमें उस समय की याद दिलाता है, जब एक-एक पन्ने को तैयार करने में काफी मेहनत और समय लगता था. उदयपुर की इस ऐतिहासिक इमारत को सिर्फ एक पुरानी प्रिंटिंग प्रेस के तौर पर नहीं देखा जा सकता. यह मेवाड़ के प्रशासन, प्रिंटिंग तकनीक और उस दौर की व्यवस्था से जुड़ी एक महत्वपूर्ण धरोहर है. 1881 में शुरू हुआ यह राजकीय मुद्रणालय आज भी उदयपुर के इतिहास के उस दौर की कहानी बताता है, जब यहीं से मेवाड़ की कई जरूरी जानकारियां और राजकीय दस्तावेज लोगों तक पहुंचते थे.

About the Authorमोनाली पाल

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…

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Udaipur,Rajasthan

First Published :

September 30, 2026, 12:08 IST

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