Rajasthan

नागौर में सरसों की फसल तैयार, किसानों को अच्छी पैदावार की आशा

Last Updated:January 08, 2026, 20:37 IST

नागौर जिले में आश्विन माह में बोई गई अगेती सरसों की फसल पूरी तरह पककर तैयार हो चुकी है और बड़े पैमाने पर कटाई शुरू हो गई है. अनुकूल मौसम के कारण फसल की गुणवत्ता, दानों की चमक और वजन अच्छा रहा है, साथ ही पाले और कीट रोगों से भी बचाव हुआ. अगले एक–दो सप्ताह में कटाई चरम पर रहेगी और बाजारों में अच्छी आवक की संभावना है. वहीं, जीरा और ईसबगोल की फसलों में उखटा रोग पर नियंत्रण के लिए विशेषज्ञों ने निगरानी व उचित छिड़काव की सलाह दी है.सरसों की खेती

आश्विन मास के दौरान बोई गई सरसों की अगेती फसल अब पककर पूरी तरह तैयार हो चुकी है. नागौर के खेतों में चारों ओर सुनहरी आभा दिखाई दे रही है और किसानों ने फसल की कटाई का काम बड़े स्तर पर शुरू कर दिया है. कई गांवों में 40 प्रतिशत सरसों की फसल पककर तैयार हो गई है. किसान रामलाल चौधरी ने बताया कि इस बार मौसम अच्छा रहने से किसानों को अगेती सरसों की बुवाई करने का लाभ मिला है.

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उन्होंने बताया कि जिन किसानों ने सितंबर के आखिरी और अक्टूबर के शुरुआती पखवाड़े (आश्विन माह) में सरसों की बुवाई की थी, उनकी फसल को पकने के लिए पर्याप्त समय और अनुकूल मौसम मिला. इस बार सर्दी के मौसम में ओस और तापमान में उतार-चढ़ाव के बावजूद, हाल तक अगेती फसल कीटों और बीमारियों के प्रभाव से काफी हद तक सुरक्षित रही. साथ ही अगेती फसल बोने से उन्हें सरसों पर पाला पड़ने से भी बचाव रहा.

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खेतों में किसान मजदूरों की हलचल बढ़ गई है. किसान अपनी उपज को जल्द से जल्द सुरक्षित करने में जुटे हैं ताकि आने वाले दिनों में मौसम के संभावित बदलाव या तेज हवाओं से फसल को नुकसान न हो, इसलिए पक्की हुई सरसों की कटाई शुरू कर दी है. अगर पैदावार की बात कि जाए तो शुरुआती रुझानों के अनुसार, दाने की चमक और वजन काफी अच्छा है.

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आपको बता दें कि अभी अगले एक-दो सप्ताह में कटाई का काम अपने चरम पर होगा. कृषि विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी अब खेत पर पहुंचकर किसानों को सलाह दे रहे हैं कि फसल की कटाई तब करें जब फलियां हल्की भूरी या पीली पड़ जाएं, ताकि दानों के झड़ने का डर न रहे. साथ ही उन्होंने सरसों की फलियों से निकले दानों को भी देखा, जिसमें 95 प्रतिशत सरसों का दाना पक कर तैयार होने की स्थिति को भी परख रहे हैं. आपको बता दें कि, इस बार सरसों का रकबा पिछले साल के मुकाबले बेहतर रहा है, जिससे तेल मिलों और स्थानीय बाजारों में अच्छी आवक की संभावना है.

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अगेती फसल अब पककर पूरी तरह तैयार होने के अलावा नागौर में इस समय जीरा और ईसबगोल की फसल भी बढ़ रही है. ऐसे में कुछ जगहों पर जीरे, इसबगोल की फसल में उखटा रोग का प्रकोप भी नजर आ रहा है. ऐसे में किसानों को इस समय अपने खेत में पूरी निगरानी रखने की जरूरत है. अनुकूल मौसम होने के कारण इस बार अन्य फसलों की तरह ही जीरे और ईसबगोल की फसल भी अच्छी होने की उम्मीद है.

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कृषि विशेषज्ञ बजरंग सिंह ने बताया कि जीरे और इसबगोल की खेती नागौर क्षेत्र में अधिक मात्रा में होती है.उखटा रोग रोग के कारण पौधों की छोटी अवस्था में ज्यादा होता है. ऐसे में इसके नियंत्रण के लिए किसान 2 ग्राम रिडोमिल प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें. इससे उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ फसल में उखटा रोग का प्रकोप भी खत्म हो जाएगा.

First Published :

January 08, 2026, 20:37 IST

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नागौर में जीरा और इसबगोल में बढ़ रहा उखटा रोग का प्रकोप, ऐसे करें बचाव

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