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धरोहर: 1935 की शाही धरोहर सिटी जुबली हॉल: रियासत काल की यादों से सजी धौलपुर की ऐतिहासिक पहचान

Last Updated:December 15, 2025, 14:36 IST

धरोहर : धौलपुर की धरती पर खड़ी सिटी जुबली हॉल सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि रियासत काल की शान और इतिहास की जीवित विरासत है. कभी हेरिटेज लाइब्रेरी और शाही टॉकीज रही यह इमारत आज 30 हजार दुर्लभ पुस्तकों के साथ नए रूप में धौलपुर की पहचान बन चुकी है.

धौलपुर : राजस्थान में आज भी कई ऐसी ऐतिहासिक इमारतें हैं जिनकें शौर्य और स्थापत्य कला की वजह से आज राजस्थान को दुनिया भर में जाना जाता है एक ऐसी ही इमारत है राजस्थान के धौलपुर में जिसे हेरिटेज लाइब्रेरी और हेरिटेज टॉकीज के रूप में संचालित किया गया था. धौलपुर में स्थित इस हेरिटेज लाइब्रेरी की नींव 7 मई 1935 को धौलपुर रियासत के महाराज राना उदयभान सिंह के समय अंग्रेज अफसर पोलिटिकल एजेंट द्वारा रखी गई थी.

इतिहासकार अरविंद कुमार शर्मा बताते हैं धौलपुर के लाल सफेद बलुआ पत्थर से बनी धौलपुर की इस ऐतिहासिक इमारत को सिटी जुबली हॉल के नाम से जाना जाता है. यह भव्य ऐतिहासिक इमारत 1935 में उस समय अस्तित्व में आई जब इंग्लैंड के सम्राट जार्ज पंचम के राज्यारोहण की 25वीं वर्षगांठ पूरे भारतवर्ष में धूमधाम से मनाई जा रही थी और इस वर्षगांठ को पूरे भारतवर्ष में सिल्वर जुबली के नाम से मनाया जा रहा था इस कारण 1935 में धौलपुर के महाराज राना उदयभान सिंह ने धौलपुर में सिटी जुबली हॉल के नाम से धौलपुर में इस भव्य शाही इमारत का निर्माण करवा दिया.

रियासत काल की शाही इमारत, इतिहास की जीवित मिसालआज भी हम जब इस शाही ऐतिहासिक इमारत को देखते हैं तो रियासत काल के समय की ऐतिहासिक यादें हमें याद आ जाती हैं इस ऐतिहासिक इमारत के साथ कई युग जुड़े हुए हैं रियासत काल के समय यह ऐतिहासिक इमारत हेरिटेज लाइब्रेरी के साथ-साथ टॉकीज के रूप में भी संचालित होती रही है. रियासत के समय धौलपुर राज्य परिवार के सदस्य इस ऐतिहासिक टॉकीज में फिल्म देखा करते थे. आजादी के बाद इस ऐतिहासिक शाही इमारत में सिटी जुबली हॉल के नाम से हेरिटेज विद्यालय स्थापित कर दिया गया.

30 हजार दुर्लभ पुस्तकों से सजी धौलपुर की लाइब्रेरीइतिहासकार अरविंद कुमार शर्मा कहते हैं कि मैं भी स्वयं 1975 में इस हेरिटेज विद्यालय का विद्यार्थी रह चुका हूं और वर्तमान में राजस्थान सरकार ने इसमें हेरिटेज लाइब्रेरी फिर से संचालित कर दी अगर इस ऐतिहासिक लाइब्रेरी की सांस्कृतिक योग्यता देखी जाए तो इस लाइब्रेरी में 30 हजार दुर्लभ पुस्तके हैं और इसमें कुछ पुस्तकें रियासत काल के समय ही संकलित की गई है और इस पुस्तकालय में कवि श्यामलदास की किताब वीर विनोद के कई खंड भी मौजूद हैं.

जीर्णोद्धार से मिली नई पहचान, बना धौलपुर का गौरववर्तमान समय में जिस तरह से इस इमारत का जीर्णोद्वार हुआ है वह बहुत ही प्रशंसनीय है क्योंकि धौलपुर के भामाशाहों तत्कालीन SP सुमित महेरणा, जिला परिषद सीईओ IAS अवध निवृत्ति सोमनाथ और मंजरी फाउंडेशन के संजय शर्मा और गौरव गर्ग के प्रयासों से इस ऐतिहासिक इमारत को पुस्तकालय के रूप में एक नया जीवनदान मिला है और इस पुस्तकालय में बेटियों के लिए भी पढ़ने के लिए अलग से व्यवस्था की जा रही है. यह ऐतिहासिक इमारत आज धौलपुर का गौरव है जो हमें रियासत काल से लेकर स्वतंत्रता के बाद तक कें धौलपुर कें स्वर्णिम इतिहास के रूप में याद दिलाती है.

About the AuthorRupesh Kumar Jaiswal

A Delhi University graduate with a postgraduate Diploma in Journalism and Mass Communication, I work as a Content Editor with the Rajasthan team at India Digital. I’m driven by the idea of turning raw in…और पढ़ें

Location :

Dhaulpur,Rajasthan

First Published :

December 15, 2025, 14:36 IST

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धौलपुर सिटी जुबली हॉल: 1935 की ऐतिहासिक हेरिटेज लाइब्रेरी और गौरव

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