कोटा में लगेगा राष्ट्रीय एग्रोटेक मेला, दिल्ली बैठक में बना रोडमैप, किसानों की किस्मत बदलने की तैयारी

कोटा. कोटा–बून्दी संसदीय क्षेत्र सहित राजस्थान के किसानों से जुड़े अहम मुद्दों पर केंद्र और राज्य सरकार के बीच बड़ा संवाद देखने को मिला है. नई दिल्ली में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और राजस्थान के कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा एक मंच पर मौजूद रहे. बैठक का फोकस साफ था- किसानों की आय बढ़ाना, आधुनिक तकनीक को खेत तक पहुंचाना और कोटा–बून्दी अंचल को कृषि नवाचार का केंद्र बनाना. इसी क्रम में कोटा में राष्ट्रीय स्तर का एग्रोटेक मेला आयोजित करने और फूड प्रोसेसिंग सेंटर स्थापित करने जैसे महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर सहमति बनी.
बैठक में तय हुआ कि कोटा में जल्द ही राष्ट्रीय स्तर का एग्रोटेक मेला आयोजित किया जाएगा. यह मेला केंद्रीय कृषि मंत्रालय के सहयोग से होगा और इसमें आधुनिक कृषि तकनीक, एग्री स्टार्टअप्स, मशीनरी, ड्रोन, स्मार्ट सिंचाई और नवाचारों को एक मंच पर लाया जाएगा. इसका उद्देश्य किसानों को नई तकनीक से जोड़ना और उन्हें सीधे लाभ पहुंचाना है. माना जा रहा है कि यह मेला कोटा–बून्दी क्षेत्र को राष्ट्रीय कृषि मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाएगा.
फूड प्रोसेसिंग सेंटर पर सहमति, किसानों को मिलेगा बेहतर दामबैठक में केंद्र के सहयोग से कोटा में फूड प्रोसेसिंग सेंटर स्थापित करने के प्रस्ताव पर भी सकारात्मक चर्चा हुई. इस सेंटर के जरिए स्थानीय स्तर पर फसलों का प्रसंस्करण संभव होगा, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा. साथ ही कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे. यह पहल किसानों को केवल उत्पादक नहीं, बल्कि वैल्यू चेन का हिस्सा बनाने की दिशा में अहम मानी जा रही है.
‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ योजना में बदलाव का प्रस्तावसूक्ष्म सिंचाई को मजबूत करने के लिए ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ योजना पर भी विस्तार से मंथन हुआ. ‘अन्य हस्तक्षेप’ घटक में कृषि विभाग की भागीदारी 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा गया, ताकि फार्म पॉन्ड और डिग्गी जैसी संरचनाओं को बढ़ावा मिल सके. इसके साथ ही सूक्ष्म सिंचाई उपकरणों की बढ़ी हुई बाजार कीमतों को देखते हुए इकाई लागत में संशोधन, फार्म पॉन्ड की वास्तविक लागत के अनुसार अनुदान तय करने और अनुसूचित जाति–जनजाति किसानों के लिए कम से कम 75 प्रतिशत अनुदान देने जैसे सुझाव रखे गए. केंद्रीय कृषि मंत्री ने इन सभी बिंदुओं पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए समाधान का भरोसा दिया.
फसल सुरक्षा, यंत्रीकरण और उर्वरक आपूर्ति पर जोरबैठक में फसल सुरक्षा भी बड़ा मुद्दा रही. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन के तहत गेहूं, मोटे और पोषक अनाज की फसलों को जंगली जानवरों और आवारा पशुओं से बचाने के लिए तारबंदी को फिर से शामिल करने पर चर्चा हुई. वर्ष 2025 से लागू मिशन–दलहन में भी कांटेदार तारबंदी पर अनुदान देने के प्रस्ताव पर विचार किया गया. इसके अलावा कस्टम हायरिंग सेंटर की सब्सिडी संरचना में बदलाव, नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के छिड़काव के लिए ड्रोन की उपलब्धता, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना और रबी सीजन में यूरिया आपूर्ति जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से बातचीत हुई.
केंद्र–राज्य समन्वय से किसानों को राहत का भरोसा
बैठक में मौजूद केंद्रीय और राज्य स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी ने यह संकेत दिया कि इन प्रस्तावों पर अमल के लिए प्रशासनिक स्तर पर भी गंभीरता है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सभी प्रमुख मुद्दों पर आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया. कुल मिलाकर यह बैठक कोटा–बून्दी सहित राजस्थान के किसानों के लिए नई उम्मीदों और ठोस योजनाओं का संकेत लेकर आई है, जहां तकनीक, प्रसंस्करण और नीति—तीनों का संगम किसानों के हित में दिख रहा है.



