न जमीन की टेंशन…न ही मेहनत, लेकिन प्रॉफिट दबाकर, इस सब्जी की खेती से किसान की मौज ही मौज

Last Updated:April 21, 2025, 17:26 IST
किसान अभयवीर ने छोटी सी जगह में यह साबित कर दिया कि अगर इच्छाशक्ति हो तो सीमित संसाधनों में भी खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदला जा सकता है. उन्होंने परंपरागत खेती छोड़कर झोपड़ियों में मशरूम की खेती शुरू की है. …और पढ़ेंX

झोपडी मे मशरूम की खेती करता किसान
हाइलाइट्स
अभयवीर सोलंकी ने मशरूम की खेती से आर्थिक समृद्धि पाई.कम लागत में मशरूम की खेती से अच्छी पैदावार और मुनाफा.मशरूम की बढ़ती मांग से किसानों को हो रहा अच्छा मुनाफा.
भरतपुर. भरतपुर के पास में रहने वाले किसान अभयवीर सोलंकी इन दिनों अपनी अनोखी खेती को लेकर चर्चा का विषय बने हुए हैं. जहां अधिकांश किसान परंपरागत फसलों जैसे गेहूं, सरसों और बाजरा की खेती में लगे हुए हैं. वहीं, अभयवीर ने इससे हटकर एक अलग राह चुनी है. उन्होंने अपने फार्म हाउस पर बनी झोपड़ियों में मशरूम की खेती शुरू की है और खास बात यह है कि उन्होंने यह काम बहुत ही कम लागत में शुरू किया है.
अभयवीर ने परंपरागत खेती के साथ-साथ नयापन लाने की सोची और बिना किसी आधुनिक मशीनरी या बड़े संसाधनों के झोपड़ी के अंदर ही ऐसा वातावरण तैयार किया जो मशरूम की खेती के लिए अनुकूल हो. उन्होंने तापमान और नमी को नियंत्रित रखते हुए मशरूम की खेती शुरू की और पहले ही प्रयास में उन्हें अच्छी पैदावार मिली. मशरूम की खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें ज्यादा जमीन की आवश्यकता नहीं होती.
किसानों को हो रहा अच्छा मुनाफाआज बाजार में मशरूम की मांग लगातार बढ़ रही है. होटल, रेस्टोरेंट और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग मशरूम को अपने भोजन में प्राथमिकता दे रहे हैं क्योंकि यह प्रोटीन से भरपूर होता है और कई रोगों से लड़ने में सहायक माना जाता है. यही कारण है कि इसकी खेती किसानों के लिए एक लाभदायक विकल्प बनती जा रही है. अभयवीर की यह पहल न केवल उनके लिए आर्थिक रूप से लाभदायक साबित हुई है बल्कि यह क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है. उनकी सफलता यह संदेश देती है कि अगर किसान थोड़ी समझदारी और साहस के साथ नए प्रयोग करें तो खेती को एक फायदे का सौदा बनाया जा सकता है. किसान इस मशरूम को जयपुर, दिल्ली के साथ-साथ कई शहरों में भेजते हैं, जिससे उन्हें अच्छा खासा मुनाफा मिल जाता है.
Location :
Bharatpur,Rajasthan
First Published :
April 21, 2025, 17:25 IST
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न जमीन की टेंशन…न ही मेहनत, लेकिन प्रॉफिट दबाकर, किसान की मौज ही मौज



