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New Zealand FTA With India| New Zealand India Trade Deal: अपने मंत्री की बात काटकर निभाई भारत से दोस्ती, ये देश दे रहा ₹1660000000000 का निवेश, बुलाकर दे रहा नौकरियां

Agency:एजेंसियां

Last Updated:December 27, 2025, 11:27 IST

New Zealand FTA With India: भारतीय लोगों को रोजगार देने के लेकर अगर अमेरिका ने अपने नियम सख्त किए हैं, तो एक ऐसा भी देश है, जो बाहें फैलाकर भारतीयों को बुला रहा है. यहां के पीएम ने खुद अपने विदेश मंत्री की बात नजरअंदाज करते हुए भारत के साथ ये समझौता किया है.
अपने मंत्री की बात काटकर निभाई भारत से दोस्ती, दिया ₹1060000000000 का निवेशपीएम मोदी के साथ न्यूजीलैंड के पीएम.

भारत के लिए इस बार खुशखबरी ऑस्ट्रेलियाई देश से आई है. दरअसल न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने भारत के साथ हाल ही में मुक्त व्यापार समझौता किया है, जो दोनों देशों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है. क्रिस्टोफर लक्सन ने कहा कि यह समझौता न केवल आर्थिक सहयोग को मजबूत करेगा, बल्कि भविष्य के लिए नई संभावनाओं का निर्माण भी करेगा. लक्सन के मुताबिक इस समझौते से न्यूजीलैंड में रोजगार के नए मौके मिलेंगे, आय में बढ़ोतरी होगी और निर्यात भी बढ़ेगा.

हालांकि न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने इस समझौते की आलोचना भी की है. उन्होंने कहा कि यह न तो मुक्त है और न ही निष्पक्ष. उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड के लिए यह उचित सौदा नहीं है, क्योंकि इसमें कुछ घरेलू क्षेत्रों, खासकर डेयरी उत्पादों को पर्याप्त सुरक्षा नहीं दी गई है. पीटर्स ने कहा कि यह समझौता न्यूजीलैंड के लिए बुरा सौदा है. हालांकि पीएम लक्सन ने इसे नजरअंदाज करते हुए इस समझौते को न सिर्फ मंजूर किया है बल्कि इस FTA को एक बड़ा आर्थिक कदम बताया, जो भारत के 140 करोड़ उपभोक्ताओं वाले विशाल बाजार तक न्यूजीलैंड की पहुंच को आसान बनाएगा.

भारत-न्यूजीलैंड व्यापार समझौते में क्या-क्या?

प्रधानमंत्री लक्सन ने एक्स पर लिखा है कि यह ऐतिहासिक समझौता अधिक नौकरियों, बेहतर आय और निर्यात के नए अवसर लेकर आएगा. हम बुनियादी समस्याओं को ठीक कर रहे हैं और भविष्य का निर्माण कर रहे हैं. आपको याद दिला दें कि भारत और न्यूजीलैंड के बीच इस FTA पर दिसंबर, 2025 में बातचीत पूरी हुई. इसे भारत के सबसे तेजी से तय किए गए व्यापार समझौतों में से एक माना जा रहा है. आधिकारिक बातचीत की शुरुआत इसी साल मार्च में हुई थी, जब प्रधानमंत्री लक्सन भारत दौरे पर आए थे. यह समझौता दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक रिश्तों और दीर्घकालिक विकास की साझा सोच को दिखाता है.

भारत का होगा कितना फायदा?

भारत-न्यूजीलैंड के इस समझौते के तहत भारत को न्यूजीलैंड में अपने सभी निर्यातों पर जीरो ड्यूटी की सुविधा मिलेगी. इससे भारत के कई प्रमुख क्षेत्रों को सीधा लाभ होने की उम्मीद है. खासतौर पर कपड़ा उद्योग, दवाइयां, इंजीनियरिंग उत्पाद और सेवा क्षेत्र को नए अवसर मिल सकते हैं. भारतीय कंपनियों के लिए न्यूजीलैंड का बाजार पहले की तुलना में ज्यादा पहुंच वाला हो जाएगा.

इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड ने भारत में अगले 15 वर्षों में 20 अरब अमेरिकी डॉलर (USD 20 billion) के निवेश का वादा किया है. यह निवेश यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के मॉडल से मिलता-जुलता है.
यह निवेश मुख्य रूप से मैन्युफैक्चरिंग, बुनियादी ढांचा, सेवाओं, नवाचार और रोज़गार सृजन जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा. इससे भारत में निवेश का माहौल मजबूत होने की उम्मीद है, वहीं न्यूजीलैंड की कंपनियों को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक में दीर्घकालिक अवसर मिलेंगे.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह FTA केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को भी नई ऊंचाई देने वाला है. भारत को जहां अपने निर्यात और निवेश को बढ़ाने का अवसर मिलेगा, वहीं न्यूजीलैंड को अपने उत्पादों और कंपनियों के लिए एक बड़े और उभरते बाजार में मजबूत पकड़ बनाने का मौका मिलेगा.
भारत भी न्यूजीलैंड को महत्वपूर्ण रियायतें देगा. भारत 70 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क में छूट देगा, जिससे न्यूजीलैंड के लगभग 95 फीसदी निर्यात को फायदा होगा. इससे खासतौर पर न्यूजीलैंड के कृषि उत्पादों, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी और मीट और दूसरे सेक्टर्स को भारतीय बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी.
About the AuthorPrateeti Pandey

में Offbeat डेस्क पर कार्यरत हैं. इससे पहले Zee Media Ltd. में डिजिटल के साथ टीवी पत्रकारिता भी अनुभव रहा है. डिजिटल वीडियो के लेखन और प्रोडक्शन की भी जानकारी . टीवी पत्रकारिता के दौरान कला-साहित्य के सा…और पढ़ें

First Published :

December 27, 2025, 11:27 IST

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