एक नहीं, दो नहीं… 4 परीक्षाओं में सफलता, पिता की किडनी फेल होने से 2 साल छूटी पढ़ाई, ऐसी है सवाईराम की कहानी

Last Updated:December 30, 2025, 07:55 IST
Barmer Sawai Ram Success Story% सरहदी बाड़मेर जिले के आदर्श लुखु गांव निवासी सवाईराम ने कठिन हालातों को पीछे छोड़ते हुए असाधारण सफलता हासिल की है. पिता की दोनों किडनियां फेल होने, पढ़ाई रुकने और आर्थिक संकट के बावजूद सवाईराम ने महज 10 महीनों की तैयारी में जेल प्रहरी, कॉन्स्टेबल, पटवारी और ग्राम विकास अधिकारी चार सरकारी भर्तियों में चयन पाकर मिसाल कायम की है.
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बाड़मेर. मां ने अपनी किडनी देकर पति की जान बचाई तो बेटे ने हार मानने के बजाय संघर्ष को ही अपनी ताकत बना लिया. पढ़ाई छूटी, हालात बिगड़े, लेकिन सवाईराम का हौसला नहीं टूटा. सरहदी बाड़मेर जिले के आदर्श लुखु गांव से निकला सवाईराम का महज 10 महीनों में जेल प्रहरी, कॉन्स्टेबल, पटवारी और ग्राम विकास अधिकारी के पद पर चयन हुआ है. सरहदी बाड़मेर जिले के धोरीमन्ना उपखंड क्षेत्र के आदर्श लुखु गांव निवासी सवाईराम ने कठिन हालातों को मात देकर मिसाल कायम की है. पिता चिमाराम की दोनों किडनियां खराब होने के कारण परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. इलाज, परेशानियां और आर्थिक संकट के चलते सवाई राम की पढ़ाई करीब दो साल तक पूरी तरह ठप हो गई. इसके बावजूद सवाईराम का महज 10 महीने की तैयारी से एक साथ 4 सरकारी भर्तियों में चयन हुआ है.
इस कठिन दौर में मां भंवरी देवी ने एक किडनी दान कर पति की जान बचाई. पिता की तबीयत धीरे-धीरे सामान्य हुई तो सवाई राम ने घर पर रहकर दोबारा पढ़ाई शुरू की. संसाधन सीमित थे, लेकिन हौसले अडिग थे. यही वजह रही कि सवाईराम ने एक साथ 4 परीक्षाओं में सफलता हासिल की है. सवाईराम का डॉक्टर बनने का सपना था, लेकिन पिता की किडनियां फेल होने के बाद घर की जिम्मेदारी आ गई, जिससे उन्होंने साइंस को छोड़कर आर्ट्स लेकर अपनी पढ़ाई जारी रखी.
10 माह में 4 परीक्षाओं में हासिल की सफलता
घर पर रहकर ही सवाईराम ने बिना किसी कोचिंग के रोजाना 12-14 घंटे पढाई करते थे. लगातार मेहनत और आत्मविश्वास का नतीजा यह रहा कि सवाई राम ने महज 10 महीनों की तैयारी में सरकारी नौकरियों की झड़ी लगा दी है. उनका चयन जेल प्रहरी में 240वी रैंक, कॉन्स्टेबल, पटवारी में 115वी रैंक और ग्राम विकास अधिकारी में 56वी रैंक पर चयन हुआ है. बेटे की कामयाबी पर मां भंवरी देवी अपनी भावनाएं रोक नहीं पाई. लोकल 18 से बातचीत करते समय आंखों में खुशी के आंसू और चेहरे पर संतोष साफ झलक रहा था. भंवरी देवी के मुताबिक उनके पति चिमाराम को एक किडनी देकर उनकी जान बचाई तो परिवार भी बिखरने से बच गया. वे बताती हैं कि घर की माली हालतों की वजह से 2 साल तक दुःखों का पहाड़ टूट पड़ा और अब बेटे की सफलता ने उन्हें फिर से जीने की राह दिखा दी है.
सवाईराम के संघर्ष की कहानी हर युवा के लिए प्रेरणास्रोत
सवाईराम ने लोकल 18 को बताया कि शुरुआती सफर काफी संघर्षों भरा रहा है. नवम्बर 2022 से दिसम्बर 2023 तक का समय हर घड़ी जिंदगी इम्तिहान लेती रही. वे बताते हैं कि उनकी माता भंवरी देवी अपने परिवार के लिए तारक बनी और परिवार की खुशियां बनाए रखने के लिए खुद की किडनी दान कर दी. इसके बाद घर पर रहकर ही तैयारी की. ग्राम विकास अधिकारी में ऑल राजस्थान में 56वी रैंक से चयन हुआ है. सवाई राम की यह कहानी वाकई आज उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो कठिन हालातों के चलते अपने सपनों से समझौता करने की सोचते हैं.About the Authordeep ranjan
दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
Location :
Barmer,Rajasthan
First Published :
December 30, 2025, 07:55 IST
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पिता की किडनी फेल, 2 साल रूकी पढ़ाई, फिर भी 4 सरकारी परीक्षाओं में पाई सफलता



