BLO SIR Pressure Story: राजस्थान के BLO पर बढ़ता काम का बोझ

जयपुर. “मैं बीएलओ हूं” इस एक लाइन में वो पूरा संघर्ष छिपा है जो हजारों BLO इन दिनों झेल रहे हैं. स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के काम ने उनकी जिंदगी बदलकर रख दी है. हर पल डर सताता है कि “कब निलंबन की तलवार गिर जाए.” बीएलओ बताते हैं कि वे सुबह 5 बजे उठ जाते हैं और 7 बजे तक घर से निकलकर फील्ड में उतर जाते हैं. घर-घर जाकर फॉर्म देना, मैपिंग करना और एक ही घर पर 2-3 बार दस्तक देनी पड़ती है. उनके पास इतना समय नहीं बचता कि वे ठीक से खाना भी खा सकें “खाना कब मिलेगा, पता नहीं… कभी शाम को 6 बजे, कभी बिल्कुल नहीं.”
दिनभर फॉर्म वितरण और शाम को फॉर्म कलेक्शन के बाद असली चुनौती शुरू होती है. रात 12 बजे तक ऑनलाइन डेटा अपलोड करना. यह काम अत्यधिक तकनीकी और समय लेने वाला होता है. एक बीएलओ बताते हैं, “कभी 1 बजे सोते हैं… नींद आती नहीं, बस सोचते रहते हैं कि कल का टारगेट पूरा होगा या नहीं. अगर नहीं हुआ तो नोटिस और सस्पेंशन का डर.” यह मानसिक तनाव उन्हें लगातार परेशान कर रहा है.
महिलाएं समझ नहीं पातीं, पुरुष घर पर नहीं-काम और मुश्किलबीएलओ बताते हैं कि सुबह जल्दी जाना जरूरी होता है क्योंकि 8–9 बजे तक कामकाजी पुरुष घर से निकल जाते हैं. वहीं, घर पर मौजूद महिलाएं अक्सर कहती हैं कि उन्हें समझ नहीं आता कि फॉर्म में क्या भरना है. ऐसे में एक ही घर के कई चक्कर लगाने पड़ते हैं. एक बीएलओ की पीड़ा है, “हर सदस्य में एक घंटा चला जाता है… तो पूरे इलाके का टारगेट कैसे पूरा होगा?”
ग्रामीण बनाम शहरी BLO: दोनों का दर्द अलग
ग्रामीण क्षेत्र में कम परिवर्तन होने के कारण काम थोड़ा सरल है, लेकिन शहरों में हालात बदतर हैं. एक शहरी बीएलओ ने बताया, “2002 का वोटर कार्ड मंगवाना सबसे मुश्किल है. लोग गांव से शहर आ गए लेकिन कार्ड वहीं पुराने घर पर है. अगर मिलेगा तो ठीक, नहीं मिला तो BLO की नींद उड़ गई.” इस जटिलता और भागदौड़ ने उनका तनाव कई गुना बढ़ा दिया है.
परिवार भी डिप्रेशन में इतिहास में पहली बार इतना दबावकई BLO अपने बच्चों को साथ रखते हैं ताकि वे ऑनलाइन काम में मदद कर सकें. इस दबाव के कारण कई BLO भावनात्मक रूप से टूट चुके हैं. एक BLO ने खुले शब्दों में कहा, “इतना प्रेशर है कि कभी-कभी जीवन खत्म कर देने का मन करता है.” उनका कहना है कि “इतिहास में पहली बार नौकरी में इतना डर और दबाव है. परिवार भी डरता है कि हम कहीं परेशान होकर कोई गलत कदम न उठा लें.”
जयपुर की दर्दनाक घटना-मुकेशचंद का आखिरी पत्र
SIR के दबाव ने एक परिवार से उनका सबकुछ छीन लिया. जयपुर के बीएलओ मुकेशचंद जांगिड़ ने सुसाइड नोट में लिखा: “मैं बीएलओ SIR से परेशान हो चुका हूं. पूरी रात नींद नहीं आती. सुपरवाइजर सीताराम बलाई सहयोग नहीं करते और बार-बार निलंबित कराने की धमकी देते हैं. अब मैं परेशान होकर सुसाइड कर रहा हूं.” इस घटना ने पूरे प्रदेश को हिला दिया है और सवाल उठा दिए हैं. आखिर BLO किस हाल में काम कर रहे हैं?



