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रेगिस्तान की रेत से उठी खुशबू! जोधपुर यूनिवर्सिटी की ‘मरू हीना’ ने मचाई नेचुरल मेहंदी की धूम

Last Updated:October 29, 2025, 16:03 IST

Natural Mehndi : जोधपुर के स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय ने पढ़ाई के साथ नवाचार की नई मिसाल पेश की है. विश्वविद्यालय ने पहली बार नेचुरल तरीके से बिना केमिकल की मेहंदी “मरू हीना” तैयार की है, जो लंबे समय तक गहरा रंग देती है. इस पहल से किसानों को भी नए व्यवसायिक अवसर मिलने की उम्मीद है.

बीकानेर : स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय ने पहली बार मेहंदी का प्रोडक्ट तैयार किया है. विश्वविद्यालय में समन्वित कृषि प्रणाली इकाई है जहां पर नेचुरल तरीके से मेहंदी का पाउडर तैयार किया है. विश्वविद्यालय में काफी जगह मेहंदी की हेज यानी मेहंदी के पौधे लगाए गए है. यह पौधे विश्वविद्यालय की सौंदर्यता को भी बढ़ा रहे है. ऐसे में अब विश्वविद्यालय पढ़ाई के साथ व्यावसायिक दृष्टि से आगे बढ़ रहा है. इस मेहंदी के पौधे को पाउडर में बदला है. विश्वविद्यालय ने पहली बार अपना मेहंदी का प्रोडक्ट बनाया है. जिसे मरू हीना नाम दिया गया है.

स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक डॉ शंकर ने बताया कि यह मेहंदी एकदम ओरिजनल है और इसमें किसी भी तरह का कोई केमिकल नहीं है. अब विश्वविद्यालय ने अपनी मरू हीना के नाम से ब्रांडिंग और पैकिंग की है. कई लोग यहां से मेहंदी का पाउडर लेकर गए हैं उनका रिस्पॉन्स काफी अच्छा था. विश्वविद्यालय का टारगेट है कि अच्छी चीजें लोग तक पहुंच सके. अगर इस प्रोडक्ट की डिमांड बढ़ेगी तो विश्वविद्यालय बड़े स्तर पर इस पर काम करेगा.

देसी ‘मरू हीना’ की धूम मचीअभी छोटे स्तर पर 50 मेहंदी पाउडर की पैकिंग तैयार की गई है. एक पैकेट करीब 400 ग्राम का है. यह मेहंदी रंग लाने में समय लगाता है. आजकल बाजार में जो मेहंदी आती है उसमें तो आधे घंटे में हाथ धो लेते हैं तो मेहंदी का रंग आ जाता है. वहीं मरू हीना में तीन से चार घंटे लगाकर रखेंगे तो मेहंदी अपना रंग लाती है. यह मेहंदी का रंग 15 से 20 दिन तक रहता है. यह मरू हीना मेहंदी का पाउडर 100 रुपए में बेचा जा रहा है. वे बताते हैं कि विश्वविद्यालय में इस तरह का प्रोडक्ट बनाया है तो किसान भी अपना प्रोडक्ट बना सकते है. मेहंदी के पौधे शहर में कई जगह लगाए जा रहे हैं. कई हाइवे के डिवाइडर पर भी मेहंदी के पौधे लगाए गए हैं. जिससे हरियाली और डायवर्सन हो सके. वे वही मेहंदी है जो हर जगह देखने को मिलती है.

जोधपुर की मेहंदी ने मारी बाजीडॉ शंकर ने बताया कि मेहंदी का पौधा तीन से चार माह में तैयार हो जाता है. करीब 12 माह तक पौधा पूरी तरह तैयार होता है. पहले इस मेहंदी के पौधे की कटिंग की जाती है. फिर इसको छांव में सुखाया जाता है. 5 से 10 दिन तक सुखाया जाता है. सूखाने के बाद इसकी पत्तियों को अलग कर देते हैं और फिर पत्तियों से अच्छे से छंटनी करके फिर इसको पाउडर बनाया जाता है. ऐसे में 15 दिन का पूरा प्रोसेस है. इस पौधे की कटिंग एक बार करने के बाद दुबारा तीन से चार माह में फिर से इसकी कटिंग कर सकते है.

Rupesh Kumar Jaiswal

रुपेश कुमार जायसवाल ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के ज़ाकिर हुसैन कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस और इंग्लिश में बीए किया है. टीवी और रेडियो जर्नलिज़्म में पोस्ट ग्रेजुएट भी हैं. फिलहाल नेटवर्क18 से जुड़े हैं. खाली समय में उन…और पढ़ें

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Location :

Bikaner,Rajasthan

First Published :

October 29, 2025, 16:03 IST

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देसी ‘मरू हीना’ का कमाल, नैचुरल मेहंदी ने जीता लोगों का दिल

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