ओमप्रकाश मेहता की अनार खेती से 5 करोड़ का कारोबार, निर्यात भी

Last Updated:January 08, 2026, 19:17 IST
सरहदी बाड़मेर की तपती रेत में जहाँ खेती एक चुनौती मानी जाती है, वहीं किसान ओमप्रकाश मेहता ने अनार की खेती से नई मिसाल कायम की है. बीकॉम के बाद नौकरी छोड़कर उन्होंने 175 बीघा बंजर जमीन पर आधुनिक तकनीक से अनार की खेती शुरू की. आज वे हर साल करीब 500 टन उत्पादन लेकर 3 से 5 करोड़ रुपये का कारोबार कर रहे हैं और देश–विदेश में बाड़मेर के भगवा सिंदूरी अनार की पहचान बना चुके हैं.
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बाड़मेर. सरहदी बाड़मेर की तपती रेत में, जहां खेती करना चुनौती माना जाता है, वहीं किसान ओमप्रकाश मेहता ने अनार की खेती से नई इबारत लिख दी है. बीकॉम की पढ़ाई के बाद नौकरी की राह छोड़कर उन्होंने खुद का व्यवसाय चुना और बंजर जमीन को हरियाली में बदलते हुए आज हर साल 3 से 5 करोड़ रुपये का कारोबार कर रहे हैं. बाड़मेर शहर से सटी हापो की ढाणी में ओमप्रकाश मेहता ने 175 बीघा जमीन में अनार की व्यावसायिक खेती कर मिसाल कायम की है. जहां कभी यह जमीन पूरी तरह बंजर पड़ी थी, वहां उन्होंने आधुनिक तकनीक और दूरदृष्टि के सहारे हरियाली की चादर बिछा दी.
साल 2016 में उन्होंने अनार की खेती शुरू की और 2018 में उत्पादन शुरू हुआ. साल 2016 में जमीन का समतलीकरण कर ओमप्रकाश मेहता ने करीब 25 हजार भगवा सिंदूरी अनार के पौधे लगाए. शुरुआती वर्षों में पानी, मौसम और संसाधनों की कई चुनौतियां सामने आई, लेकिन मेहनत और तकनीकी समझ के दम पर उन्होंने हार नहीं मानी. हर साल यहां का भगवा सिंदूरी अनार विदेशों में निर्यात किया जाता है.
विदेशों में भी निर्यात किया जा रहा अनार
ओमप्रकाश मेहता हर साल करीब 500 टन अनार का उत्पादन कर रहे हैं, जिससे उन्हें 3 से 5 करोड़ रुपये तक का वार्षिक कारोबार मिल रहा है. अनार की खेती केवल उनकी आमदनी का जरिया ही नहीं बनी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार का बड़ा साधन भी साबित हुई है. इससे हर साल 50 से 100 मजदूरों को नियमित और मौसमी रोजगार मिल रहा है, जिससे आसपास के गांवों के कई परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है. आधुनिक तकनीक, बूंद-बूंद सिंचाई और जैविक खाद के उपयोग ने ओमप्रकाश मेहता की अनार बागवानी को अलग पहचान दिलाई है. खेतों में ड्रिप इरिगेशन सिस्टम से हर पौधे तक सटीक मात्रा में पानी और पोषक तत्व पहुंचाए जाते हैं, जिससे पानी की बचत के साथ बेहतर उत्पादन भी होता है.
ओमप्रकाश बताते हैं कि उनके खेत से नासिक से व्यापारी अनार लेने के लिए आते हैं. रासायनिक खाद के बजाय जैविक खाद और प्राकृतिक तरीकों को अपनाने से अनार की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतर रही है. यही वजह है कि हापो की ढाणी में उगा अनार अब केवल देश के बाजारों तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों में भी निर्यात किया जा रहा है. ओमप्रकाश बताते हैं कि उनका जैविक अनार लंदन, यूरोप, ईरान, इज़राइल, अमेरिका सहित खाड़ी देशों में निर्यात होता है, जिससे किसानों को अच्छा मुनाफा मिलता है.
About the AuthorMonali Paul
Hello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ें
Location :
Barmer,Rajasthan
First Published :
January 08, 2026, 19:17 IST
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बाड़मेर: ओमप्रकाश मेहता की अनार खेती से 5 करोड़ का कारोबार, निर्यात भी



