Rajasthan

नागौर किसान रामनिवास डांगा की सफलता | Nagaur Farmer Polyhouse Farming Success Story.

Last Updated:January 03, 2026, 11:12 IST

Farming Success Story: नागौर के रियांबड़ी निवासी रामनिवास डांगा ने सरकारी अनुदान से 2.5 बीघा में पॉली हाउस लगाकर खीरे और शिमला मिर्च की खेती शुरू की है. आधुनिक फॉगर सिस्टम और ड्रिप इरिगेशन की मदद से वे रोजाना 1200 किलो तक खीरा उत्पादन कर लाखों की कमाई कर रहे हैं.

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नागौर: राजस्थान के नागौर जिले के किसान अब पारंपरिक खेती की जगह आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर कृषि क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहे हैं. इसी कड़ी में रियांबड़ी गांव के किसान रामनिवास डांगा एक मिसाल बनकर उभरे हैं. रामनिवास ने अपनी मेहनत और सरकारी योजनाओं के सही समन्वय से खेती को एक मुनाफे वाले बिजनेस में बदल दिया है. आज वे अपने खेत में पॉली हाउस तकनीक के जरिए खीरा और शिमला मिर्च का बंपर उत्पादन कर रहे हैं और सालाना लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं. उनकी यह सफलता अब आसपास के क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है.

रामनिवास डांगा को आधुनिक खेती की प्रेरणा अजमेर में लगे पॉली हाउस को देखकर मिली थी. उन्होंने महसूस किया कि कम जमीन और नियंत्रित वातावरण में बेहतर पैदावार ली जा सकती है. इसके बाद उन्होंने कृषि विभाग की सरकारी योजना के तहत आवेदन किया. आवेदन स्वीकृत होने पर उन्होंने अपनी 2.5 बीघा भूमि पर पॉली हाउस स्थापित किया. इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत लगभग 55 लाख रुपये आई, जिसमें से रामनिवास को केवल 11 लाख रुपये ही वहन करने पड़े. शेष भारी-भरकम राशि कृषि विभाग द्वारा अनुदान (Subsidy) के रूप में दी गई, जिससे उनके लिए यह तकनीक अपनाना आसान हो गया.

बूंद-बूंद सिंचाई और फॉगर सिस्टम का कमालरामनिवास डांगा ने अपने पॉली हाउस में जल संरक्षण और पौधों की सटीक जरूरत के लिए ‘ड्रिप इरिगेशन’ (बूंद-बूंद सिंचाई प्रणाली) को अपनाया है. वे प्रतिदिन प्रत्येक लाइन में मात्र 10 से 20 मिनट पानी देते हैं, जिससे पानी की भारी बचत होती है और मिट्टी में आवश्यक नमी बनी रहती है. इसके अलावा, राजस्थान की भीषण गर्मी से फसल को बचाने के लिए उन्होंने ‘फॉगर सिस्टम’ (मिनी फव्वारे) लगाए हैं. जब बाहर का तापमान बढ़ता है, तो ये फॉगर पॉली हाउस के अंदर का वातावरण ठंडा कर देते हैं. इन फॉगर का उपयोग कीटनाशक दवाओं के छिड़काव के लिए भी किया जाता है, जिससे फसल कीटों और मक्खियों से सुरक्षित रहती है.

लाखों का मुनाफा और बेहतर गुणवत्ताफसल चक्र की बात करें तो खीरे की तुड़ाई रोपाई के मात्र 45 से 50 दिनों के भीतर शुरू हो जाती है और यह प्रक्रिया करीब 4 महीने तक चलती है. रामनिवास बताते हैं कि उन्हें प्रतिदिन लगभग 1000 से 1200 किलोग्राम खीरे की उपज प्राप्त होती है. बाजार में 40 से 45 रुपये प्रति किलो के भाव मिलने से उन्हें बहुत अच्छी आमदनी हो रही है. खास बात यह है कि रस्सियों के सहारे पौधों को ऊपर चढ़ाने से खीरे की गुणवत्ता शानदार रहती है और उनकी तुड़ाई भी आसान हो जाती है. रामनिवास डांगा की यह कहानी साबित करती है कि यदि तकनीकी ज्ञान और सरकारी मदद का सही उपयोग हो, तो खेती वाकई लाभ का सौदा है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore is a multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience in digital media, social media management, video production, editing, content writing, and graphic, A MAJMC gra…और पढ़ें

Location :

Nagaur,Nagaur,Rajasthan

First Published :

January 03, 2026, 11:02 IST

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खेती से लाखों की कमाई! नागौर के किसान रामनिवास डांगा की सक्सेस स्टोरी

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