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अमरूद की बागवानी का रामबाण फॉर्मूला! खेत में डाल दें ये देसी घोल, कभी नहीं लगेगा रोग, पैदावार होगी दोगुनी

Last Updated:December 09, 2025, 09:10 IST

अमरूद बागवानी टिप्स: अमरूद की बागवानी में नेमाटोड रोग जड़ों को नुकसान पहुंचाकर पौधों की बढ़वार और उत्पादन दोनों को प्रभावित करता है. इससे पत्ते पीले पड़ते हैं, पौधे कमजोर होते हैं और फलन कम हो जाता है. इससे बचाव के लिए किसान हींग का पानी खेत में डालकर मिट्टी को रोगमुक्त कर सकते हैं. प्रभावित पौधों पर हींग, गौमूत्र, नींबोली और गुड़ से बना देसी घोल जड़ों को फिर से सक्रिय करता है. वहीं गुड़, बेसन और वेस्ट डीकंपोजर वाला घोल मिट्टी को उपजाऊ बनाकर पैदावार बढ़ाता है.करौली

अमरूद की खेती करने वाले किसान अक्सर नेमाटोड रोग से जूझते हैं. यह रोग जड़ों को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है, जिससे पौधे कमजोर हो जाते हैं और उनकी वृद्धि प्रभावित होती है. प्रभावित पौधों में पत्ते पीले पड़ने लगते हैं और फूल व फल कम मात्रा में लगते हैं, जिससे उत्पादन में गिरावट आती है. नेमाटोड मिट्टी में मौजूद सूक्ष्म कीटाणुओं के कारण फैलता है और नियंत्रण न होने पर पूरे बाग को नुकसान पहुंचा सकता है. समय पर रोकथाम और सही उपाय अपनाना फसल की गुणवत्ता और उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है.

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अमरूद की बागवानी शुरू करने से पहले खेत में कुछ आसान देसी उपाय अपना लिए जाएं, तो फसल को न केवल रोगों से बचाया जा सकता है, बल्कि पैदावार भी कई गुना बढ़ाई जा सकती है. आज हम आपको बता रहे हैं ऐसे आसान और देसी टिप्स, जिनसे अमरूद की खेती सुरक्षित और ज्यादा लाभदायक हो सकती है.

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अमरूद के पौधे लगाने से पहले खेत की मिट्टी को पूरी तरह रोगमुक्त करना बेहद जरूरी है. इसके लिए किसान हींग का पानी इस्तेमाल कर सकते हैं. देसी पद्धति में सबसे पहले हींग को पीसकर पानी में घोल बनाया जाता है. इस घोल को खेत में हल्की सिंचाई के साथ मिलाने से मिट्टी में मौजूद नेमाटोड कमजोर होने लगते हैं और पौधों की जड़ें सुरक्षित रहती है.

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अगर अमरूद के पौधे बड़े होने लगे हैं और उनमें नेमाटोड का असर दिखाई दे रहा है, जैस जड़ें काली हो जाएं, पौधे की ग्रोथ रुक जाए, पत्ते पीले पड़ने लगें. तो जड़ों पर एक खास देसी घोल का छिड़काव किया जा सकता है. यह घोल हींग के पानी, गौ मूत्र, गुड़ और नीम की नींबोली को मिलाकर बनाया जाता है. यह मिश्रण जड़ों में मौजूद हानिकारक कीटों को खत्म करके पौधे में फिर से जान डाल देता है.

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अमरूद के बगीचे में नियमित रूप से एक विशेष देसी घोल देने से पौधे मजबूत होते हैं और उत्पादन स्वाभाविक रूप से बढ़ता है. इसके लिए 200 लीटर पानी में 15 किलो गुड़, 4 किलो बेसन और 200 मिली वेस्ट डीकंपोजर मिलाकर घोल तैयार किया जाता है. एक विशेष देसी घोल देने से पौधे मजबूत बनते हैं और उनकी पैदावार स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है.

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डीकंपोजर बनाने के लिए सबसे पहले  सभी मिश्रण को मिलाकर घोल तैयार करें. इसे ढककर कुछ दिनों तक के लिए छोड़ दें. बाद में सिंचाई के पानी के साथ यह घोल अमरूद के पेड़ों की जड़ों तक पहुंचाएं. इससे मिट्टी उपजाऊ होती है, पौधे तेजी से बढ़ते हैं और फसल में किसी भी प्रकार का कीट-रोग लगने की संभावना कम हो जाती है.

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अमरूद की खेती में रासायनिक दवाओं के बजाय देसी उपाय अपनाना मिट्टी और फल दोनों की गुणवत्ता के लिए बेहतर है. देसी उपाय जहां किफायती हैं, वहीं इनके कोई नुकसान भी नहीं होते. इनसे पौधे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और खेत में फसल लंबे समय तक स्वस्थ रहती है.

First Published :

December 09, 2025, 09:10 IST

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अमरूद के पौधे में डाल दें ये देसी घोल, कभी नहीं लगेगा रोग, पैदावार होगी दोगुनी

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