कोटा में मानवता की मिसाल! अनाथ रीना की शादी में पुलिस, प्रशासन और समाज बने परिवार, सरकार से भी मिली मदद

देवेंद्र सेन/कोटा. कभी किसी अनजान मोड़ पर मिली एक निराश्रित, मूकबधिर बालिका रीना के जीवन का सबसे बड़ा दिन था. कोटा शहर के नान्ता स्थित नारीशाला में रहने वाली रीना की शादी बुधवार को ऐसे माहौल में संपन्न हुई, जो संवेदनाओं, मानवीय मूल्यों और सामाजिक सरोकारों की अनूठी मिसाल बन गया. इस विशेष समारोह में कोटा पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों, सामाजिक संस्थाओं और स्थानीय लोगों ने जिस तरह बेटी की तरह रीना के हाथ पीले किए, उसने पूरे शहर का दिल जीत लिया.
करीब 13 वर्ष पहले पुलिस को एक लावारिस अवस्था में मिली रीना को नान्ता नारीशाला में आश्रय मिला था. मूकबधिर होने के बावजूद रीना ने यहां रहते हुए योग, सिलाई, कढ़ाई और बुनाई जैसे कौशलों में महारत हासिल की. अपनी मेहनत और सकारात्मक सोच से उसने खुद को आत्मनिर्भर बनाया और आज विवाह के पवित्र बंधन में बंधकर एक नई शुरुआत की.
धर्मराज के साथ रीना ने लिए सात फेरे
दूल्हे धर्मराज के साथ रीना ने सात फेरे लिए, और इस दौरान नारीशाला का प्रांगण भावनाओं से भर उठा. सबसे खास था कोटा पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का रोल. अधिकारी पूरी तरह घराती बनकर बारातियों का स्वागत-सत्कार करते दिखे.मानो यह हर किसी की अपनी बेटी की शादी हो. नारीशाला की महिलाएं, कर्मचारी और शहर के लोग भी इस खुशी के पल में शामिल हुए. इस शादी को और भी खास बनाया राज्य सरकार की उस योजना ने, जिसके तहत निराश्रित या असहाय बालिकाओं की शादी में 5 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाती है. रीना को भी यह आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराई गई, ताकि उसका नया जीवन बिना किसी तनाव और अभाव के आगे बढ़ सके.
समारोह का सबसे भावुक क्षण था कन्यादान
जिला एवं सत्र न्यायालय के प्रोटोकॉल ऑफिसर ललित अरोड़ा अपनी पत्नी के साथ पहुंचे और रीना को बेटी मानकर कन्यादान किया. सामाजिक जिम्मेदारी का यह उदाहरण उपस्थित लोगों के लिए प्रेरणा बन गया. रीना की विदाई के दौरान सभी की आंखें नम थीं, लेकिन चेहरे पर संतोष था कि उनकी ‘रीना’ अब अपने नए परिवार की ओर कदम बढ़ा रही है. वहीं मोशन एजुकेशन संस्थान की ओर से नवविवाहित दंपत्ति को 21 हजार रुपये का चेक भेंट किया गया. वहीं कोटा की कई सामाजिक संस्थाओं, संगठनों और सेवाभावी नागरिकों ने भी अलग-अलग उपहार देकर इस शुभ अवसर को और भी समृद्ध बनाया. पूरा वातावरण मंगलगान, आशीर्वाद और शुभकामनाओं से गूंज उठा.
योग के साथ सिलाई-कढ़ाई में भी अच्छी पकड़
नारीशाला के स्टाफ के अनुसार, रीना हमेशा से शांत, सभ्य और कुशल युवती रही है. योग में उसकी विशेष पकड़ और सिलाई-कढ़ाई में दक्षता उसे आत्मविश्वास देती रही. संस्थान में रहने वाली अन्य बालिकाओं के लिए भी रीना आज प्रेरणा बन गई कि परिस्थितियां कैसी भी हों, हिम्मत और उम्मीद से जीवन को बदला जा सकता है. कोटा जैसे शिक्षा और उद्योग नगरी ने एक बार फिर यह साबित किया कि यह शहर सिर्फ इमारतों और संसाधनों से नहीं, बल्कि दिल से धड़कता है. प्रशासन, पुलिस, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की संवेदनशीलता ने इस शादी को केवल एक विवाह नहीं, बल्कि मानवता का उत्सव बना दिया.



