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दांत दर्द से तड़प रहे हैं? पहाड़ों के तिमूर में इसका चमत्कारी इलाज, ये सदियों पुराना सच्चा डेंटिस्ट – Uttarakhand News

Last Updated:December 30, 2025, 19:01 IST

Timur ke fayde : उत्तराखंड में दांत दर्द के लिए तिमूर (तेजफल) का उपयोग वर्षों से किया जाता रहा है. इसकी टहनी या फल चबाने से दांत की नसें सुन्न हो जाती हैं, जिससे दर्द में राहत मिलती है. तिमूर में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो मसूड़ों की सूजन और मुंह की बदबू को भी कम करते हैं. तिमूर एक जंगली पौधा है, जो पहाड़ी इलाकों में प्राकृतिक रूप से उगता है. इसके फल, टहनियां और छाल औषधीय गुणों से भरपूर हैं. timur

उत्तराखंड की पहाड़ियों में कई ऐसे पारंपरिक नुस्खे प्रचलित हैं, जो पीढ़ियों से चले आ रहे हैं. आधुनिक दवाइयों के आने से पहले लोग जंगलों, पेड़ों और जड़ी-बूटियों पर ही निर्भर रहते थे. इन्हीं प्राकृतिक औषधियों में से एक है तेजफल, जिसे स्थानीय भाषा में तिमूर कहा जाता है. दांत दर्द, मसूड़ों की सूजन और मुंह की बदबू के लिए तिमूर का उपयोग उत्तराखंड में बहुत पुराना माना जाता है.

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तिमूर एक जंगली पौधा है, जिसका वैज्ञानिक नाम Zanthoxylum armatum है. यह पौधा उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में प्राकृतिक रूप से उगता है. इसके फल, टहनियां और छाल औषधीय गुणों से भरपूर होती हैं. तिमूर का स्वाद हल्का तीखा और सुन्नता पैदा करने वाला होता है, इसी कारण यह दांत दर्द में असरदार माना जाता है.

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उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में तिमूर आमतौर पर जंगलों या खेतों के किनारे पाया जाता है. बुजुर्ग लोग इसे आसानी से पहचान लेते हैं. पहले के समय में घरों में तिमूर की सूखी टहनी या फल रखे जाते थे ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत इस्तेमाल किया जा सके. आज भी कई गांवों में लोग दांत दर्द होने पर डॉक्टर के पास जाने से पहले तिमूर का सहारा लेते हैं.

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तिमूर में प्राकृतिक रूप से एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-इंफ्लेमेटरी और दर्द निवारक गुण पाए जाते हैं. इसका तीखापन दांत की नसों को कुछ समय के लिए सुन्न कर देता है, जिससे दर्द में राहत मिलती है. यह मुंह में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को भी कम करता है, जो दांत दर्द का मुख्य कारण होते हैं.

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तिमूर इस्तेमाल करने का सबसे आम और पुराना तरीका है. तिमूर की पतली टहनी को हल्का सा चबाना. टहनी चबाने से उसका रस निकलता है, यह रस दर्द वाले दांत और मसूड़ों तक पहुंचता है. कुछ ही मिनटों में दर्द में आराम महसूस होता है. पहाड़ों में इसे प्राकृतिक दातुन के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है. इसका दूसरा उपयोग, सूखे तिमूर के फल को हल्का सा कूटकर दर्द वाले दांत पर रखा जाता है. इससे दांत की नसों में सुन्नता आती है, सूजन, जलन कम होती है और मुंह की बदबू भी दूर होती है. यह तरीका विशेष रूप से तेज दांत दर्द में अपनाया जाता है.

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आयुर्वेद में तिमूर को उष्ण प्रकृति का माना गया है. यह कफ और वात दोष को संतुलित करता है. आयुर्वेदिक ग्रंथों में तिमूर को दांत, मसूड़े और मुख रोगों के लिए लाभकारी बताया गया है. इसी कारण कई आयुर्वेदिक दंत मंजन और औषधियों में तिमूर का उपयोग किया जाता है.

precautions

हालांकि तिमूर प्राकृतिक है, फिर भी इसका अत्यधिक उपयोग नुकसानदायक हो सकता है. ज्यादा चबाने से मुंह में जलन हो सकती है, बच्चों को सीमित मात्रा में ही दें और लंबे समय तक दांत दर्द रहे तो डॉक्टर से जरूर सलाह लें. तिमूर अस्थायी राहत देता है, स्थायी इलाज के लिए दंत चिकित्सक आवश्यक है.

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December 30, 2025, 19:01 IST

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