राजस्थान में क्यों पहना जाता है बाजूबंद? जानें इसके सौंदर्य, ऊर्जा और शुभता से जुड़े राज और सांस्कृतिक महत्व

Last Updated:December 06, 2025, 07:01 IST
राजसथान पारंपरिक गहना: राजस्थानी संस्कृति में बाजूबंद सिर्फ आभूषण नहीं, बल्कि परंपरा, आस्था और पहचान का प्रतीक माना जाता है. सोने, चांदी, कुंदन और मोतियों से बना यह बाहों पर पहना जाने वाला आभूषण प्राचीन काल से रानियों, नर्तकियों और योद्धाओं तक की शान रहा है. इसे पहनने से सौंदर्य बढ़ता है, नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा होती है और शुभता का आशीर्वाद माना जाता है. आज भी शादियों, भरतनाट्यम और फेस्टिव लुक में बाजूबंद आधुनिक डिजाइन में बेहद लोकप्रिय है, जिसकी मांग लगातार बढ़ रही है.
राजस्थानी संस्कृति में आभूषण सिर्फ सजावट का साधन नहीं, बल्कि परंपरा, पहचान और आस्था का प्रतीक भी होते हैं. इन आभूषणों में बाजूबंद एक ऐसा पारंपरिक आभूषण है, जिसे सदियों से राजकुमारियों, नर्तकियों, दूल्हनों और योद्धाओं द्वारा गर्व से धारण किया जाता रहा है. आज भी यह आभूषण परंपरा और महिला सौंदर्य का खास हिस्सा बना हुआ है. बाजूबंद एक सजावटी पट्टी जैसा आभूषण है, जो आमतौर पर सोने, चांदी या अन्य धातुओं से बनाया जाता है. कई बार इसे कीमती रत्नों, मोतियों और नक्काशी से भी सजाया जाता है. इसे ऊपरी बांह पर पहना जाता है, इसलिए यह किसी भी पारंपरिक लुक को अधिक शाही और सुंदर बना देता है.

बाजूबंद बाजुओं के बाइसेप्स (ऊपरी भुजा) पर पहना जाता है. प्राचीन समय में इसे दोनों हाथों में पहना जाता था, लेकिन आजकल महिलाएa एक हाथ में भी पहनती हैं. शास्त्रीय नृत्य–विशेषकर भरतनाट्यम में नर्तक व नर्तकियां इसे पहनते हैं, जिसके कारण यह विश्व भर में लोकप्रिय हुआ. दुल्हन का श्रृंगार हो या नृत्य का मंच बाजूबंद हर रूप में संस्कृति की गहराई और सुंदरता को प्रदर्शित करता है. आधुनिक फैशन में इसकी मांग बढ़ रही है, और यह फिर से महिलाओं की पसंदीदा ज्वेलरी में शामिल हो चुका है.

राजस्थानी समाज में बाजूबंद धारण करने के पीछे कई सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं. सौंदर्य और आभा बढ़ाने के लिए पहना जाता है. कहा जाता है कि बाजूबंद धारण करने से महिला की आभा बढ़ती है और उसके व्यक्तित्व में एक खास आकर्षण आ जाता है. बाजूबंद आभूषण को लेकर यह मान्यता रहती है कि इसे पहनने से नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा होती है. पुरानी मान्यताओं के अनुसार बाजूबंद शरीर को नकारात्मक ऊर्जाओं से बचाता है. खासकर शुभ अवसरों, त्योहारों और विवाह में इसे पहनना शुभ माना जाता है.
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कई पौराणिक मान्यताओं में कहा गया है कि ऊपरी भुजा पर बाजूबंद पहनना शरीर की ऊर्जा को संतुलित करता है और आध्यात्मिक शक्ति को स्थिर रखता है. इसलिए इसे सोलह श्रृंगार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है. इसे योद्धाओं और वीरों का प्रतीक माना जाता था. प्राचीन काल में पुरुष योद्धा भी बाजूबंद पहनते थे, क्योंकि यह शक्ति, साहस और विजय का प्रतीक माना जाता था.

बाजूबंद पहनने की परंपरा बहुत प्राचीन है. असीरियन कला, प्राचीन भारतीय मूर्तियों, मंदिरों की दीवारों, और राजस्थानी लोक संस्कृति में राजा-रानियों और देवी-देवताओं को बाजूबंद पहने दिखाया गया है. इससे पता चलता है कि यह आभूषण हजारों वर्षों से हमारे परिधान का हिस्सा रहा है.

आजकल बाजूबंद कई तरह की डिजाइन में मिलते हैं. राजस्थानी और मारवाड़ी नक्काशीदार बाजूबंद, मोतियों वाला पारंपरिक बाजूबंद, कुंदन और पोल्की सेट बाजूबंद, चांदी व ऑक्सीडाइज्ड फिनिश वाले ट्रेंडी बाजूबंद और फ्लोरल, पंखुड़ी या बेल-बूटा डिज़ाइन वाले आधुनिक बाजूबंद के रूप में लोकप्रिय है. शादियों, मेहंदी, संगीत और फोटोग्राफी शूट में यह आभूषण आज फिर से बेहद लोकप्रिय हो गया है.

फैशन के बदलते दौर में भी बाजूबंद की मांग लगातार बढ़ रही है. दूल्हनें अपने ब्राइडल लुक में इसे खास जगह देती हैं. नृत्य–कलाकार इसे अपने कॉस्ट्यूम का अनिवार्य हिस्सा मानते हैं. इसी के साथ फेस्टिव और ट्रेडिशनल फोटोशूट में इसे ट्रेंडिंग आभूषण माना जा रहा है. ऑनलाइन मार्केट, ज्वेलरी स्टोर्स और डिजाइनर बुटीक में बाजूबंद की स्टाइलिश और बजट–फ्रेंडली रेंज आसानी से मिल जाती है. जिस वजह से इसकी मांग मैं बढ़ोतरी हो रही है.
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December 06, 2025, 07:01 IST
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क्यों पहनते हैं बाजूबंद? जानें इसके सौंदर्य, ऊर्जा और शुभता से जुड़ा महत्व



