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Last Updated:December 30, 2025, 16:49 IST
Podar Haveli: 1902 में बनी पोदार हवेली आज भी अपनी मूल संरचना और भव्यता के साथ खड़ी है. यह हवेली राजस्थान की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का शानदार उदाहरण मानी जाती है. खास बात यह है कि इसमें ट्रेन का चित्र बनवाने के लिए मुंबई से विशेष चित्रकारों को बुलाया गया था, जो उस दौर में आधुनिकता और प्रगति का प्रतीक था. बारीक भित्ति चित्र, मजबूत निर्माण और अनूठी सोच के कारण पोदार हवेली आज भी इतिहास प्रेमियों को आकर्षित करती है.
Podar Haveli: शेखावाटी क्षेत्र की पहचान उसकी भव्य हवेलियों और अद्भुत भित्तिचित्रों से है. इसी शेखावाटी क्षेत्र के हृदय में स्थित नवलगढ़ की पोदार हवेली एक ऐसी ऐतिहासिक धरोहर है, जिसका बोलबाला आज केवल राजस्थान में ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में है. यह हवेली अपनी अद्भुत सुंदरता, रंगीन भित्तिचित्रों और अनूठे वास्तुशिल्प के कारण प्रसिद्ध है. पोदार हवेली न सिर्फ एक इमारत है, बल्कि यह इतिहास, संस्कृति और कला की जीवंत कहानी है, जो अपनी दीवारों के माध्यम से सदियों की दास्तान सुनाती है.

पोदार हवेली का निर्माण 1902 ई. में प्रसिद्ध मारवाड़ी व्यापारी सेठ आनंदीलाल पोदार द्वारा करवाया गया था. वे मुंबई में कपास मिलों के बड़े व्यवसायी थे और कला व संस्कृति के गहरे प्रेमी भी. अपनी मातृभूमि नवलगढ़ में उन्होंने ऐसी हवेली बनवाई, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन सके. बाद में यह हवेली शिक्षा का केंद्र बनी और 1955 से स्कूल के रूप में उपयोग होने लगी. वर्ष 2007 में सेठ आनंदीलाल पोदार के पौत्र कांति कुमार पोदार ने इसे संग्रहालय में परिवर्तित कर अपने पिता की स्मृति में इसका नाम डॉ. रामनाथ ए. पोदार संग्रहालय रखा.

750 भित्तिचित्रों की रंगीन दुनिया: पोदार हवेली की सबसे बड़ी और अनोखी पहचान इसके लगभग 750 भित्तिचित्र हैं. ये भित्तिचित्र हवेली की दीवारों, छतों, स्तंभों और आंगन पर बेहद बारीकी और जीवंत रंगों के साथ बनाए गए हैं. इनमें रामायण, महाभारत, राधा-कृष्ण की लीलाए, देवी-देवताओं के दृश्य, राजसी जीवन, लोक जीवन और सामाजिक परंपराए दिखाई देती हैं. इन चित्रों की खास बात यह है कि कलाकारों ने केवल धार्मिक कथाओं तक ही सीमित न रहकर अपने समय की आधुनिक घटनाओं को भी दर्शाया है.
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रोचक तथ्य जो इस हवेली को खास बनाते हैं: कुछ चित्रों में भाप इंजन वाली ट्रेन, शुरुआती कारें और बदलते पहनावे को दर्शाया गया है. यह दर्शाता है कि उस दौर के कलाकार समय के साथ चलने वाली सोच रखते थे और कला को समाज का दर्पण मानते थे. कहा जाता है कि ट्रेन के चित्र बनाने के लिए कलाकारों को पहले मुंबई भेजा गया, ताकि वे रेल को करीब से देख सकें, क्योंकि उस समय शेखावाटी क्षेत्र में रेल नहीं पहुंची थी. हवेली का मुख्य द्वार इतनी बारीक लकड़ी की नक्काशी से बना है कि इसे देखते है तो इतिहास के द्वार में प्रवेश करने जैसा अनुभव होता है.

पोदार हवेली की वास्तुकला राजस्थानी और मुगल शैली का अद्भुत संगम है. ऊंचे मेहराबदार द्वार, नक्काशीदार झरोखे, खुले आंगन और रंगीन स्तंभ इसकी भव्यता को और बढ़ा देते हैं. आज पोदार हवेली एक समृद्ध संग्रहालय है, जिसमें 22 दीर्घाए हैं. इन दीर्घाओं में राजस्थान की पारंपरिक वेशभूषा, पगड़िया, आभूषण, संगीत वाद्ययंत्र, लघु चित्रकला, लोक नृत्य, विवाह परिधान और त्योहारों से जुड़ी दुर्लभ वस्तुएँ प्रदर्शित की गई हैं.

इस संग्रहालय में मिट्टी से बने पारंपरिक बर्तन बड़ी संख्या में देखने को मिलते हैं. यह संग्रहालय राजस्थानी संस्कृति को नज़दीक से समझने का बेहतरीन माध्यम है. पोदार हवेली नवलगढ़ का प्रमुख पर्यटन आकर्षण है. देश-विदेश से आने वाले पर्यटक यहां राजस्थान की कला और संस्कृति को करीब से देखने आते हैं. विशेष रूप से अक्टूबर से मार्च के महीनों में यहाँ पर्यटकों की संख्या अधिक रहती है, जब मौसम सुहावना होता है. यह हवेली अपनी सुंदरता के कारण जानी जाती है.
First Published :
December 30, 2025, 16:49 IST
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पोदार हवेली का अनोखा इतिहास, जहां 1902 में मुंबई के कलाकारों ने रचा था अजूबा



