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Poultry Farming: सर्दियों में मुर्गीपालन के लिए अपनाएं ये खास तरीके, नहीं घटेगा अंडा उत्पादन, मुर्गियां भी रहेंगी हेल्दी

Last Updated:January 09, 2026, 06:20 IST

Winter Poultry Farming Tips: मुर्गीपालन मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है. अंडा उत्पादन के लिए लेयर्स और मांस उत्पादन के लिए ब्रोयलर्स पाले जाते हैं. लेगहॉर्न नस्ल सबसे अधिक अंडे देने वाली मानी जाती है. वहीं जर्म-प्लाज्म से विकसित प्रतापधन, कामरूपा, झारसीम और नर्मदानिधि नस्लें भी लोकप्रिय हैं. सर्दी के मौसम में लेयर्स की उत्पादन क्षमता घट जाती है, इसलिए विशेष देखभाल जरूरी होती है.मुर्गीपालन

मुर्गीपालन दो प्रकार से करते हैं, जो मुर्गियां अंडों के उत्पादन के लिए पाली जाती है उनको लेयर्स और जो मुर्गियां मांस के लिए पाली जाती हैं, उनको ब्रोयलर्स कहते है. सर्वाधिक अंडे देने वाली मुर्गी की नस्ल लेगहॉर्न है. जर्म-प्लाज्म की मदद की मुर्गियों की 4 नस्लें विकसित की गई हैं, जिनका नाम प्रतापधन, कामरूपा, झारसीम और नर्मदानिधि हैं. राजस्थान की प्रतापधन नस्ल बहुरंगी होती है. इसके अंडे का रंग हल्का भूरा होता है. ये लगभग 161 अंडे प्रतिवर्ष देती है.

मुर्गीपालन

सर्दी के मौसम में मुर्गीपालन में मुर्गियों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है. इस मौसम में मुर्गी का बीमार पड़ने के साथ-साथ अपनी उत्पादन क्षमता भी घटा देती है. अगर मुर्गी या बीमार पड़ती है तो इससे मुर्गी पालकों को काफी नुकसान भी होता है. ऐसे में कुछ जरूरी सावधानियां को अपना कर मुर्गी पालक इस समस्या से बच सकते हैं. सर्दी के मौसम में अंडे देने वाली मुर्गियां को खास समस्या होती है.

मुर्गीपालन

ऐसे में मुर्गियों को इस समय बीमार होने से बचने के लिए सर्दी में मुर्गियों के लिए बिछावन की मोटाई 8 इंच तक कर दें. ध्यान रहे कि बिछावन को सूखा रखें. इसके अलावा उनके लिए लकड़ी का बुरादा प्रयोग कर सकते हैं. ठंडी हवा आने पर मुर्गियों में शीत-आघात या हाइपोथर्मिया हो सकता है. इसलिए कुक्कुट फॉर्म के खिड़की और दरवाजों पर पर्दै- टाट की बोरियां लगा दें. पर्दों के ऊपर थोड़ी जगह छोड़ें, ताकि घुटन न हो.

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मुर्गीपालन

पशु चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. योगेश आर्य ने बताया कि सर्दी के समय अधिक कोहरा होने के बाद जब दिन में तेज धूप हो जाने पर इनको थोडा हटा दें, ताकि अंदर नमी भी सूख जाए और वायु-संचालन भी बेहतर हो जाए. अधिक सर्दी होने पर बल्ब या हीटर जलाकर उचित तापमान बनाए रखें. इसके अलावा जिन जगहों पर मुर्गियों को रखा जाता है सर्दी के समय ध्यान रखें कि वहां में अंदर सर्दी प्रवेश न करें.

नागौर, राजस्थान

पशु चिकित्सा विशेषज्ञ के अनुसार, सर्दी के मौसम में मुर्गियों को संतुलित आहार दें. बाजार में ऐसे आहार उपलब्ध हैं, जिनमें पर्याप्त ऊर्जा और प्रोटीन होता है. मुर्गियों को मल्टी-विटामिन और मिनरल सप्लीमेंट दें, ताकि सेहत और रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे. मुर्गियों को गुनगुना या हल्का गर्म पानी दें. पीने का पानी साफ होना चाहिए. इसके अलावा आवास का निः संक्रमण पहले ही कर लें.

मुर्गीपालन

साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखने के साथ मुर्गियों का समय पर टीकाकरण-कृमिनाशन करवाएं. बीमारी के कोई भी लक्षण दिखाई दे, उसका उपचार करें. पशु चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. योगेश आर्य ने बताया कि मुर्गियों का समय पर टीकाकरण करवाएं. लेयर्स में रोग-प्रकोप फैला हो तो संक्रमित-कोराईजा एवं मुर्गी-कोलेरा रोगों से बचाव के लिए 8 सप्ताह की उम्र में टीकाकरण करके 12 सप्ताह की उम्र में इनकी बूस्टर डोज लगाते हैं. स्पाईरोकीटोसिस रोग से बचाव 6 सप्ताह और एग-ड्रॉप-सिंड्रोम से बचाव के लिए 18 सप्ताह में टीकाकरण करते हैं.

First Published :

January 09, 2026, 06:20 IST

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