प्रकाश मेहरा-मनमोहन देसाई ने ठुकराई कहानी, नए नवेले डायरेक्टर ने अपनाई स्क्रिप्ट, बन गई कालजयी मूवी – When most infamous villain amjad khan caught Hema Malini arms tightly before Dharmendra in cult classic blockbuster movie sholay fascinating story

Last Updated:November 19, 2025, 22:03 IST
Bollywood Most Iconic Movie : बॉलीवुड में ‘ड्रीम गर्ल’ के नाम से मशहूर हेमा मालिनी ने साउथ सिनेमा से अपने करियर की शुरुआत की थी. उन्होंने सीता और गीता, नसीब, जॉनी मेरा नाम, सत्ते पे सत्ता, क्रांति, त्रिशूल और शोले जैसे आइकॉनिक फिल्म में अपने अभिनय का जादू बिखेरा है. एक बार हेमा मालिनी की बांह खूंखार विलेन ने इतनी जोर से पकड़ ली थी कि उनके होश उड़ गए थे. हेमा मालिनी का वो हिस्सा नीला पड़ गया था. दिलचस्प बात यह है कि जब यह घटना हुई तब धर्मेंद्र भी वहां पर मौजूद थे. आइये जानते हैं दिलचस्स किस्सा……
हेमा मालिनी और धर्मेंद्र ने करीब 28 फिल्मों में साथ में काम किया था. 70-80 के दशक में उनकी जोड़ी खासी लोकप्रिय थी. यह जोड़ी हर डायरेक्टर-प्रोड्यूसर की पहली पसंद थी. हेमा मालिनी-धर्मेंद्र ने शराफत, तू हसीं मैं जवां, नया जमाना, राजा जानी, सीता और गीता, पत्थर और पायल, दोस्त (1974), शोले (1975) चरस, जुगनू, अपना खून, आजाद (1978) और दिल्लगी (1978) जैसी फिल्मों में साथ में काम किया है. दोनों को साथ में काम करने के दौरान प्यार हुआ. दोनों ने मई 1980 में शादी कर ली थी. एक बार शूटिंग के दौरान हिंदी सिनेमा के सबसे खूंखार विलेन ने हेमा मालिनी की बांह इतनी जोर से पकड़ी थी कि उनका बदन नीला पड़ गया था. धर्मेंद्र भी सेट पर मौजूद थे. यह फिल्म हिंदी सिनेमा के इतिहास की सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में से एक है. यह फिल्म थी : शोले. हेमा मालिनी ने एक टीवी शो में यह दिलचस्प किस्सा सुनाया था.

हेमा मालिनी ने किस्से का जिक्र करते हुए बताया था, ‘मेरे ख्याल से सबसे खूंखार विलेन अमजद खान साहब अपने रोल को बहुत संजीदगी से निभाते थे. उनके साथ जैसे ही ‘शोले’ फिल्म की शूटिंग शुरू हुई उनका लुक बहुत रियल था. फिल्म में ‘जब तक है जां, जाने जहां, मैं नाचूंगी’ गाना उनके साथ था. उसमें मैं उनके हाथ से निकलकर भागने का प्रयास करती हूं तो वह पकड़ लेते हैं. उन्होंने मेरा हाथ ऐसा पकड़ा कि उतना हिस्सा नीला पड़ गया. मुझे बहुत दर्द हो रहा था. जब तक उन्होंने अपने डायलॉग पूरे किए, तब तक मैं शांत खड़ी रही. फिर मेरी मां ने उनसे पूछा कि ये सब क्या किया? उन्होंने माफी मांगी और बर्फ लेकर आए. काम ऐसा होता था.’

इस दौरान हेमा मालिनी ने बताया कि उन्हें विलेन प्रेम चोपड़ा से बहुत डर लगता था. हेमा मालिनी ने बताया, ‘प्रेम चोपड़ा के साथ राजा जानी फिल्म की शूटिंग उदयपुर में की थी. फिल्म में एक गाना था ‘कितना मजा आ रहा है’. फिल्म की स्क्रिप्ट के मुताबिक, मुझे धरम जी को चिढ़ाने के लिए प्रेम चोपड़ा के साथ रोमांस करना था. प्रेम चोपड़ा बहुत खुश थे और वो हीरो की तरह एक्टिंग करने लगे. धरम जी असल में इरिटेड होने लगे और बीच-बीच में मेरे पास आकर पूछते थे कि ‘ये क्या कर रहा है.’
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शोले फिल्म 15 अगस्त 1975 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी. रमेश सिप्पी डायरेक्टर थे. सलीम-जावेद सिर्फ चार लाइन का आइडिया लेकर रमेश सिप्पी के पास पहुंचे थे. शुरुआत में यह फिल्म 1 करोड़ के बजट में बननी थी. बाद में बजट बढ़कर 3 करोड़ हो गया था. रमेश सिप्पी ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘4 लाइन के आइडिया को डेवलप करके शोले फिल्म बनाई थी. मैंने उसे अपने पिता के कहने पर ‘मजबूर’ फिल्म छोड़ दी थी जबकि उसकी स्क्रिप्ट तैयार थी. मेरे पिता ने कहा कि समय बर्बाद मत करो, शोले फिल्म बनाओ.’

शोले फिल्म से जुड़ा एक और दिलचस्प तथ्य यह है कि इस फिल्म की स्टोरी शुरुआत में मनमोहन देसाई के पास गई थी. रमेश सिप्पी ने रेडियो नशा को दिए एक इंटरव्यू में इसका खुलासा किया था. रमेश सिप्पी ने बताया था, ‘मनमोहन देसाई के पास उन दिनों कई फिल्में थीं. उन्होंने स्टोरी को देखकर कहा था कि यह मेरे टाइप की फिल्म नहीं है. मुझसे यह फिल्म नहीं बनेगी. फिर सलीम-जावेद ने स्टोरी प्रकाश मेहरा को सुनाई. शुरुआत में जय-वीरु आर्मी अफसर थे. हमने स्टोरी में थोड़ा सा चेंज किया.’

रमेश सिप्पी ने अपने इंटरव्यू में बताया था, ‘जावेद अख्तर ने मुझे गब्बर का रोल समझाया. डैनी को गब्बर के रोल के लिए फाइनल किया गया था. शत्रुघ्न सिन्हा से बात हुई थी लेकिन इतनी बड़ी स्टार कास्ट को संभालना मुश्किल था, इसलिए उन्हें फिल्म में नहीं लिया. हेमा मालिनी ने भी शुरुआत में अपना रोल ठुकरा दिया था. अमिताभ-धर्मेंद्र दोनों को गब्बर सिंह की भूमिका अच्छी लगी थी. अमिताभ लगातार फ्लॉप फिल्में दे रहे थे इसलिए उन्होंने अपने रोल को प्यार से स्वीकार किया.’

शोले फिल्म की ‘मेरा गांव मेरा देश’ से तुलना होती है. कहा जाता है कि दोनों फिल्मों की कहानी भी लगभग मिलती-जुलती है.धर्मेंद्र-आशा पारेख और विनोद खन्ना की यह फिल्म 1971 में रिलीज हुई थी. उस फिल्म में विलेन का रोल करने वाले विनोद खन्ना के कैरेक्टर का नाम झब्बर सिंह था. शोले फिल्म के विलेन का नाम गब्बर सिंह था. इस सवाल के जवाब में रमेश सिप्पी ने कहा था, ‘दोनों फिल्मों की कहानी ठाकुओं की है, इसलिए समानता होना तो स्वभाविक है.’

सबसे दिलचस्प बात यह है कि रमेश सिप्पी ने अमजद खान को गब्बर सिंह का रोल दिए अपनी बहन के एक सुझाव पर दिया था. वो अपनी बहन का एक प्ले देखने गए थे. उसमें अमजद खान भी एक लीड रोल कर रहे थे. मजेदार बात यह भी कि शोले मूवी जब रिलीज हुई तो पूरे एक हफ्ते तक दर्शकों के लिए तरसती रही. सलीम-जावेद ने फिल्म की एंडिंग को बदलने पर विचार किया था. अमिताभ बच्चन को फिर से जिंदा करने पर भी विचार किया. एक वक्त ऐसा भी आया जब लगा कि फिल्म फ्लॉप हो जाएगी लेकिन 7 दिन बाद चमत्कार हुआ. अचानक सिनेमाघरों में भीड़ जुटी और फिल्म ने बाद में इतिहास रच दिया.

शोले फिल्म को भारत की कालजयी मूवी माना जाता है. 3 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने वर्ल्डवाइड 50 करोड़ का कलेक्शन किया था. इस फिल्म के हर किरदार को पहचान मिली. हर किरदार के डायलॉग लोगों की जुबान पर चढ़ गए. एक साल के अंदर सबसे ज्यादा टिकट इस फिल्म के बिकने का वर्ल्ड रिकॉर्ड भी इस मूवी के नाम है.
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November 19, 2025, 19:43 IST
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विलेन ने जकड़ी हेमा मालिनी की बांह, सामने थे धर्मेंद्र, मूवी ने बनाया रिकॉर्ड



