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पब्लिक ओपिनियन : राजस्थान में कड़ा कानून; शव के साथ विरोध किया तो सीधे 5 साल की सजा! जानें क्या कह रहे लोग?

Last Updated:December 09, 2025, 16:17 IST

Public Opinion : राजस्थान सरकार ने मृत शरीर सम्मान कानून लागू किया, जिससे शव रखकर विरोध पर 5 साल तक की सजा और जुर्माना होगा. अंतिम संस्कार 24 घंटे में अनिवार्य है. जयपुर में लोगों ने सराहा.

जयपुर. हाल ही में राजस्थान सरकार ने मृत शरीर सम्मान कानून अधिनियम को 4 दिसंबर को अधिसूचना जारी कर लागू कर दिया है. इसके तहत यदि सड़क, सार्वजनिक स्थान, अस्पताल सहित किसी भी जगह मृत शरीर को रखकर विरोध प्रदर्शन किया जाता है तो सरकार सख्त कार्रवाई करेगी. इस कानून का उद्देश्य मृत शरीर पर राजनीति रोकना और बिना कारण अंतिम संस्कार में देरी को अपराध की श्रेणी में लाना है. इस अधिनियम के तहत कैद और जुर्माने का प्रावधान भी शामिल है. नियम के अनुसार यदि परिजन 24 घंटे के भीतर अंतिम संस्कार नहीं करते हैं तो पुलिस स्वयं अंतिम संस्कार कर सकती है.

सरकार का दावा है कि ऐसा कानून लागू करने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य बन गया है. इसका मुख्य उद्देश्य है कि सार्वजनिक स्थानों पर शव रखकर किए जाने वाले विरोध प्रदर्शन न केवल कानून व्यवस्था बिगाड़ते हैं, बल्कि मृतक की गरिमा का भी उल्लंघन करते हैं. इस अधिनियम से मृत व्यक्तियों के सम्मान की रक्षा और समाज में अनुशासन बनाए रखने में बड़ी मदद मिलेगी. लोकल-18 जयपुर ने आम जनता से इस कानून पर बात की तो लोगों ने इसे सराहनीय कदम बताया और कहा कि इससे मृतक व्यक्ति की गरिमा सुरक्षित रहेगी और परिजन समय पर अंतिम संस्कार करेंगे.

शव को लेकर विरोध पर मिलेगी सख्त सजामृत शरीर सम्मान अधिनियम के अनुसार किसी भी मृतक का अंतिम संस्कार 24 घंटे के भीतर करना अनिवार्य है. यदि ऐसा नहीं होता है और शव के साथ विरोध किया जाता है तो किसी भी नेता, संगठन या गैर-परिजन को 5 साल तक की सजा दी जा सकती है. जयपुर में लोगों ने इस सजा के प्रावधान पर अपनी राय दी. रामस्वरूप सोनी का कहना था कि यह नियम मृतक की गरिमा की रक्षा करेगा और शव का दुरुपयोग रोक देगा. वहीं राकेश कुमार ने कहा कि कानून अच्छा है, लेकिन विदेश में रहने वाले परिजनों के मामलों में छूट जरूरी होनी चाहिए क्योंकि उन्हें आने में समय लगता है. ज्यादातर लोगों का कहना है कि हत्या या दुर्घटनाओं के मामलों में मांगों को लेकर लोग शव सड़क पर रखकर दिनों तक धरना देते हैं, जिससे शव गलने लगता है और यह मृतक के सम्मान के खिलाफ है. इस नए कानून से ऐसी लापरवाही पर रोक लगेगी.

कानून में देरी की सीमित परिस्थितियाँराजस्थान सरकार के नियमों के अनुसार केवल आवश्यक परिस्थितियों में ही देरी मान्य होगी, जैसे परिजन मौजूद न हों, बाहर हों या पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया चल रही हो. इसके अलावा पुलिस को यह अधिकार दिया गया है कि वह मृतक का शव अपने कब्जे में लेकर अंतिम संस्कार कर सकती है. अक्सर मुआवजे की मांगों को लेकर सड़क जाम और विरोध प्रदर्शन किए जाते हैं, जिनसे कानून व्यवस्था बिगड़ती है. इस कानून में परिजनों को भी छूट नहीं दी गई है, क्योंकि यदि वे राजनीतिक या सामाजिक दबाव में शव लेकर धरने पर बैठते हैं तो वे भी सजा के पात्र होंगे. अधिसूचना लागू होने के बाद अब परिजन, नेता और मामले से जुड़े सभी लोग यदि सार्वजनिक व्यवस्था बाधित करने की कोशिश करेंगे तो उन पर सीधी कार्रवाई की जाएगी.

About the AuthorAnand Pandey

नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें

Location :

Jaipur,Rajasthan

First Published :

December 09, 2025, 16:16 IST

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राजस्थान में कड़ा कानून; शव के साथ विरोध पर 5 साल की सजा!जानें क्या कह रहे लोग

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